Nuh Violence: नूंह में क्यों फेल हुई हरियाणा सरकार? हिंसा को रोकने में पुलिस से कहां हुई चूक?

मणिपुर का मुद्दा अभी चल ही रहा है. इस बीच हरियाणा के नूंह में हुई हिंसा का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट को बुधवार को नूंह हिंसा के बाद पैदा तनाव के मामले में दखल देना पड़ा.

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नूंह में भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने अब तक 26 एफआईआर दर्ज की है.
नई दिल्ली:

हरियाणा के नूंह (Nuh Violence) में सोमवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अब तक 6 की मौत हो चुकी है. कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हिंसा को लेकर पुलिस ने अब तक 26 एफआईआर दर्ज की है. 116 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने कहा कि हिंसा में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से करेंगे. नूंह में भड़की हिंसा को लेकर हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. 

NDTV की एक रिपोर्ट में हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों ने भी माना कि नूंह में पुलिस और प्रशासन हालात को भांपने में नाकाम रहा. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा कैसे हुई? यह पता लगाने के लिए अभी भी जांच चल रही है. पुलिस हिंसा के लिए उपद्रवियों द्वारा फैलाई गई अफवाहों को जिम्मेदार ठहराती है.

आइए जानते हैं नूंह हिंसा में आखिर सीएम खट्टर सरकार से कहां हुई चूक और उठ रहे कौन से सवाल:-
 

1. जिस दिन हिंसा हुई, उस दिन नूंह के एसपी छुट्टी पर थे. पलवल के एसपी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. क्या पलवल के एसपी पहले से नूंह में मौजूद थे या वो हिंसा के बाद वहां पहुंचे? ये अभी साफ नहीं हो पाया है.

2. जब मोनू मानेसर का एक वीडियो पहले से ही सोशल मीडिया पर चल रहा था, जिसमें वो कह रहा था कि वो नूंह आएगा. ऐसे में सवाल है कि बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा के रास्ते पर पुलिस की पहले से ही पर्याप्त तैनाती क्यों नहीं की गई?

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3. क्या प्रशासन को पहले से सोमवार के तनाव का अंदाज़ा नहीं हो पाया था. जबकि ये बात सामने आ रही है कि भीड़ में कई लोग पत्थर और हथियार लेकर पहुंचे हुए थे, तभी तो शोभायात्रा पर पत्थरबाज़ी हुई. ऐसे में क्या इसे खुफिया विभाग की नाकामी नहीं मानी जानी चाहिए?

4. हरियाणा के नूंह में तैनाती को लेकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच ये धारणा है कि उन्हें मेवात की ज़िम्मेदारी देकर मुख्य धारा से किनारे कर दिया गया है. कुछ अधिकारियों की यह भी शिकायत रहती है कि उन्हें पनिशमेंट पोस्टिंग दी गई है. इसलिए ये कहा जाता है कि कई अधिकारी वहां तैनाती को बहुत गंभीरता से नहीं लेते. 
अगर ऐसा है, तो ये पुलिस प्रशासन की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है.

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5. हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बयान दिया है कि उनके प्रशासन को अंदाजा नहीं था कि शोभायात्रा में इतनी भीड़ जुटेगी. सवाल ये है कि प्रशासन को शोभायात्रा में कितने लोग आएंगे, इसकी जानकारी क्या वाकई नहीं दी गई थी?

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6. सवाल इस बात का है कि अगर इतने पुलिसकर्मी थे, तो उनका किस इलाके में मोबिलाइजेशन हुआ? सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज और सावन के महीने को देखते हुए क्या अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत नहीं थी? 

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एसपी के छुट्टी पर होने से क्या होनी चाहिए व्यवस्था?
जब किसी जिले का एसपी छुट्टी पर हो, तो जिले में क्या व्यवस्था होनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, "ऐसे संवेदनशील प्रकरणों के पहले, जहां मालूम है कि समस्या उत्पन्न होने की प्रबल संभावना है... जब तक कि जिंदगी और मौत का मामला न हो, पुलिस अधिकारियों की छुट्टी निरस्त कर दी जाती है. ऐसे मामलों में अधिकारी छुट्टी पर नहीं जा सकते और न उन्हें जाना चाहिए. अगर इसके बाद भी अधिकारी या एसपी छुट्टी पर गए हैं, तो उनके लिंक अफसर की पूरी जिम्मेदारी बनती है."

हरियाणा में क्या हैं ताजा हालात?
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए नूंह, फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम में मानेसर, पटोदी व सोहना इलाके में 5 अगस्त की आधी रात तक इंटरनेट बंद कर दिया गया है. नूंह में सोमवार को भड़की हिंसा के दो दिन बाद भी कर्फ्यू जारी है. गुरुग्राम, पलवल जिले में तनाव का माहौल है. हरियाणा में पुलिस की 30 कंपनियां और केंद्रीय सुरक्षा बलों की 20 कंपनियों को तैनात किया गया है. सेंट्रल फोर्स की गुरुग्राम में 2 और नूंह में 14 कंपनियां लगाई गई हैं. दिल्ली और राजस्थान के भरतपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है.

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