ईरान ने भारत को कहा शुक्रिया-जयशंकर बोले-जहाज को जगह देना मानवीय फैसला

जयशंकर ने कहा, “इस पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रही है. सोशल मीडिया, अपने नेचर से, बहुत तीखे, गुस्से वाले, कभी-कभी बहुत ज्यादा विचारों को जाहिर करने का एक फोरम है. लोगों को यह कहने का हक है, लेकिन मेरा मतलब है, प्लीज हिंद महासागर की असलियत को समझें."

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ईरान ने अपने पोत की सहायता के लिए भारत को धन्यवाद दिया है.
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  • भारत ने ईरानी नौसेना के जहाज आईरिस लवन को तकनीकी खराबी के कारण कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी थी
  • आईरिस डेना जहाज को अमेरिकी सबमरीन के टॉरपीडो हमले से नुकसान हुआ, जिसमें 87 नाविकों की मौत और 32 की बचत हुई
  • जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति और विदेशी सैन्य उपस्थिति को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया
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ईरान के पोत 'डेना' पर हुए अमेरिकी हमलों और उसमें भारत को बदनाम करने की कोशिशों के बीच ईरान ने भारत को थैंक यू बोला है. ये ईरान और भारत संबंधों और नाजुक समय की स्थितियों पर बेहतर समझ को दिखाता है. भारत के विदेश मंत्री ने हिंद महासागर में ईरानी पोत पर हुए हमले की पूरी कहानी भी बता दी है.

ईरान ने क्या कहा

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने एएनआई को बताया, "हिंद महासागर में ईरानी नौसैनिक पोत आईरिस डेना से जुड़ी दुखद घटना के बाद, ईरान चालक दल के सदस्यों की स्थिति पर नजर रख रहा है और घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है. मगर, इसी दौरान एक अन्य ईरानी नौसैनिक पोत आईरिस लवन तकनीकी और रसद संबंधी व्यवस्थाओं के लिए भारत के कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा है.

मैं इस अवसर पर भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों को इस पोत के बंदरगाह पर पहुंचने और चालक दल को सहायता प्रदान करने में उनके सहयोग और मानवीय दृष्टिकोण के लिए हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं. इन कठिन परिस्थितियों में भारतीय अधिकारियों का उत्कृष्ट समन्वय और सहयोग हमारे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है. हम भारत सरकार और जनता के बहुमूल्य समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हैं. हमें विश्वास है कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक और रचनात्मक संबंध भविष्य में भी बढ़ते और मजबूत होते रहेंगे."

जयशंकर ने क्या कहा

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच कोच्चि में ईरानी नौसेना के जहाज को डॉक करने की अनुमति देने के भारत के फैसले को लेकर बयान दिया. रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण के आखिरी दिन उन्होंने कहा कि जहाज घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए थे. नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में विदेश मंत्री ने बताया कि कैसे भारत को ईरान की तरफ से उसके एक नौसेना के जहाज 'आईआरआईएस लवन' को लेकर एक रिक्वेस्ट मिली थी. ईरानी नौसेना के जहाज ने इलाके में ऑपरेट करते समय तकनीकी समस्या की रिपोर्ट की थी.

आईआरआईएस लवन ने पिछले महीने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लिया था. वह तकनीकी खराबी आने के बाद कोच्चि की ओर रवाना हुआ था. सरकार के मुताबिक श्रीलंका के दक्षिण में ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना से कई दिन पहले ईरान ने भारत से संपर्क किया था.  यह जहाज इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलान 2026 अभ्यास के लिए ईरान की नौसेना की तैनाती के हिस्से के तौर पर इस इलाके में मौजूद था. इस अभ्यास का आयोजन 15 फरवरी से 25 फरवरी के बीच हुआ था. ईरानी साइड से तकनीकी खराबी की रिपोर्ट मिलने के बाद भारत ने 1 मार्च को डॉकिंग रिक्वेस्ट को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद जहाज कोच्चि के लिए रवाना हुआ और वहां डॉक किया, जिसके 183 क्रू मेंबर अभी शहर में नेवल फैसिलिटी में रह रहे हैं.

कब की है बात

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि जब ईरान ने आईआरआईएस लवन के लिए मदद मांगी तो भारत ने इंसानियत वाला रवैया अपनाया था. उन्होंने कहा, “हमें ईरानी पक्ष से संदेश मिला कि एक शिप, जो शायद उस समय हमारी सीमा के सबसे पास था, हमारे पोर्ट में आना चाहता था. वे बता रहे थे कि उन्हें दिक्कतें आ रही हैं. यह 28 फरवरी की बात है. 1 मार्च को, हमने कहा कि आप आ सकते हैं और उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर वे कोच्चि आए. बहुत सारे युवा कैडेट थे. वे पास की एक जगह पर उतर गए हैं. जब वे निकले और यहां आए, तो स्थिति बिल्कुल अलग थी. वे फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे और फिर वे एक तरह से गलत स्थिति में फंस गए. मुझे लगता है कि यह इंसानियत का काम था.”

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Photo Credit: AFP

ईरानी जहाज असल में क्षेत्रीय स्थिति बिगड़ने से पहले नौसेना इंगेजमेंट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे. आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लवन और आईआरआईएस बुशहर जहाजों ने फरवरी की शुरुआत में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा होस्ट किए गए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलान 2026 नौसेना के अभ्यास में हिस्सा लिया था. आईआरआईएस डेना को लेकर डॉ एस. जयशंकर ने कहा, “दूसरे जहाजों के मामले में एक के साथ श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी और उन्होंने जो फैसला लिया, वह उन्होंने लिया और एक दुर्भाग्य से नहीं ले पाया. हमने कानूनी मुद्दों को छोड़कर, मानवता के नजरिए से इसे देखा. मुझे लगता है कि हमने सही काम किया.”

कैसे हुई थी रिश्ते खराब कराने की कोशिश

4 मार्च को ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना श्रीलंका में गाले के दक्षिणी तट से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर इंटरनेशनल पानी में सफर करते समय यूनाइटेड स्टेट्स सबमरीन से दागे गए टॉरपीडो की चपेट में आ गया. श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, विशाखापत्तनम में नौसेना के अभ्यास से लौटते समय जहाज के डूबने के बाद समुद्र से 87 लाशें बरामद की गईं, जबकि 32 नाविकों को जिंदा बचा लिया गया. बाद में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस घटना की पुष्टि की. इस घटना को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इंडियन ओशन रीजन (आईओआर) के रणनीतिक डायनामिक्स के बारे में सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर भी टिप्पणी की.

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जयशंकर ने कहा, “इस पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रही है. सोशल मीडिया, अपने नेचर से, बहुत तीखे, गुस्से वाले, कभी-कभी बहुत ज्यादा विचारों को जाहिर करने का एक फोरम है. लोगों को यह कहने का हक है, लेकिन मेरा मतलब है, प्लीज हिंद महासागर की असलियत को समझें. डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिंद महासागर में है. यह कोई पिछले हफ्ते या पिछले महीने की बात नहीं है. यह बात कि जिबूती में विदेशी सेनाएं मौजूद हैं, इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी.”

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