खाड़ी युद्ध ने तेल और गैस की कीमतों में लगाई आग, पूरा दुनिया में लड़खड़ा गई सप्लाई चेन

खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में काफी तेजी आ गई है. कतर के रास लफान गैस प्लांट पर ईरान के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार में नेचुरल गैस की कीमतों में तेजी आने की आशंका बढ़ गई है.

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फाइल फोटो
नई दिल्ली:

कतर के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट रास लफान पर ईरान द्वारा मिसाइल से हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय गैस और तेल मार्केट में उथल पुथल बढ़ गई है. दुनिया के सबसे बड़े LNG प्लांट पर ईरानी मिसाइल हमले की वजह से वहां LNG का प्रोडक्शन पूरी तरह से रुक गया है. दूसरी तरफ खाड़ी युद्ध जारी रहने के कारण कच्चा तेल और नेचुरल गैस की कीमतें लगातार आसमान छूती जा रही हैं. उल्लेखनीय है कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल 40 देशों से आयात करता है. मिडिल-ईस्ट में जंग का असर अब कई देशों पर पड़ना शुरू हो चुका है. 

मार्च के पहले हफ्ते में भी ईरान ने कतर के गैस फ़ील्ड्स पर मिसाइल से हमला किया था. जिसके बाद दुनिया की सबसे बड़ी नेचुरल गैस एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी कतर एनर्जी को नैचुरल गैस का प्रोडक्शन रोकना पड़ा था. दरअसल मध्य-पूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर में नैचुरल गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है, क्योंकि नैचुरल गैस का प्रोडक्शन और सप्लाई बुरी तरह से बाधित हो गया है.

पिछले 20 दिनों से जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वॉर जोन का हिस्सा बना हुआ है, जिस वजह से 700 से ज्यादा कार्गो जहाज मध्य-पूर्व एशिया के बड़े पोर्ट्स के आसपास सेफ जोन में फंसे हुए हैं. इसका सबसे ज्यादा असर भारत जैसे देश पर पड़ रहा है जो अपनी जरूरत का करीब 50% नैचुरल गैस अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है. उल्लेखनीय है कि भारत अपनी जरूरत का करीब 20% नैचुरल गैस कतर से आयात करता है.

एनर्जी एक्सपर्ट किरीट पारीख ने बताया कि भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी गैस अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है. इसमें से करीब 40% LNG हम कतर से खरीदते हैं, यानी भारत के कुल LNG आयात का करीब 20% कतर से भारत पहुंचता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भारत को गैस का उपयोग कम करना पड़ेगा, इंडस्ट्री में विशेषकर पावर सेक्टर में गैस का इस्तेमाल कम करना होगा. 

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आज हर दिन भारत में नेचुरल गैस की खपत 189 MMSCMD है. इसमें से 97.5 MMSCMD का प्रोडक्शन भारत में होता है. पिछले हफ्ते तक मौजूदा खाड़ी संकट के कारण कंडीशन की वजह से भारत द्वारा आयात किये जाने वाले कुल नेचुरल गैस का 47.4 MMSCMD की सप्लाई बाधित हुई थी, जिसके बाद सरकरी गैस कंपनियों ने वैकल्पिक नए सोर्स से LNG कार्गो आर्डर किया था. 

युद्ध के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पूरी तरह से लड़खड़ा गया है. गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में ब्रेंट ऑयल की कीमत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है. पिछले एक महीने में ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत करीब 57% तक बढ़ चुकी है. 

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पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में युद्ध की वजह से 17 मार्च, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर 146.09 प्रति बैरल के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है. इससे पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 18 साल पहले, 2008 में 147 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंची थी.

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