- अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मृत्यु हो चुकी है, जिससे मिडिल ईस्ट संकट बढ़ा
- ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने कहा कि खामनेई अंतिम समय तक राष्ट्रपति भवन के कार्यालय में ही थे
- अंजुमन‑ए‑हैदरी की श्रद्धांजलि सभा में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें राजनयिक और धार्मिक नेता शामिल थे
अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो चुकी है. उनकी मौत के बाद मिडिल ईस्ट का संकट और गहरा गया है. इस बीच तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि खामेनेई के आखिर पल किस तरह गुजरे. ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने कहा कि अयातुल्लाह खामनेई बंकर में नहीं गए थे, बल्कि अंतिम समय तक अपने राष्ट्रपति भवन के कार्यालय में रहे. राजदूत ने पश्चिमी मीडिया की उन तमाम खबरों को खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि वे अपनी सुरक्षा के लिए बंकर में चले गए थे. उन्होंने कहा, “हमने एक बड़ा नेता खो दिया है, वे हमारे आध्यात्मिक पिता थे, मानवता का बड़ा चेहरा थे, देशों की स्वतंत्रता और मानवीयता के प्रतीक थे. रमजान में उनकी शहादत होना एक दुखद घड़ी है.”
श्रद्धांजलि सभा में कौन-कौन पहुंचा
अंजुमन‑ए‑हैदरी की ओर से अयातुल्लाह खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित शोकसभा में कई गणमान्य उपस्थित रहे, जिनमें के.सी. त्यागी, मिखाइल ज्येतसेव (First Secretary, Russian Embassy), डॉ. अली सादिक अब्दुल्लादी (Counsellor, Embassy of Republic of Iraq), डॉ अब्दुल माजिद हकीम इलाही (Representative of Iran's Supreme Leader) और डॉ मोहम्मद फताली (Ambassador of Iran to India) शामिल थे. अंजुमन‑ए‑हैदरी के Chief Patron मौलाना सैयद कल्बे जवाद की ओर से यह शोकसभा आयोजित की गई.
भारत के प्रति आभार और ऐतिहासिक संबंध
ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने कहा, “आने वाली पीढ़ियां इस आक्रामकता को नहीं भूलेंगी. हम फिर से खड़े होंगे, फिर से उभरेंगे. भारत के लोगों का धन्यवाद, जो इस दुख में हमारे साथ हैं, हमारी सभ्यता के पुराने संबंध हैं. इतिहास में याद रखा जाएगा कि आपने सही का साथ दिया, आप सही के साथ खड़े रहे.”
के.सी. त्यागी ने क्या कहा
के.सी. त्यागी ने कहा कि बहरीन, कतर पर हवाई हमले को समूचे अरब जगत पर हमला नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि यूएनओ मानवाधिकारों के लिए बना था, लेकिन आज वह कहीं नजर नहीं आता. उन्होंने कहा कि स्कूल पर हमला जैसी घटनाएं पहले नहीं हुई थीं और फिलिस्तीन का भी यही हाल किया गया; पूरी दुनिया शांत बैठी रही, ऐसे हालात पहले कभी नहीं रहे.
मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने कहा कि आयतुल्लाह खामनेई की मौत का दुख हर उस व्यक्ति को है जो इंसाफ में भरोसा रखता है.
ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि क्या बोले
अब्दुल मजीद हकीम (Representative of Iran's Supreme Leader) ने कहा कि ईरान में संवैधानिक व्यवस्था है और किसी एक व्यक्तित्व पर सिस्टम नहीं चलता, इसीलिए सिस्टम अब भी चल रहा है. उन्होंने कहा, “हमारी शहादत की विरासत है, इसलिए ईरान अब भी दृढ़ है, अब भी खड़ा है. पहले भी इस तरह के हमले और युद्ध ईरान झेल चुका है, लेकिन हमारी जीत हुई क्योंकि सच हमारे साथ है. यह युद्ध नैरेटिव का है—कई झूठे तथ्यों को हमारे खिलाफ पेश किया जा रहा है.” उन्होंने यह भी बताया, “एक बार मैंने उनके सुरक्षा कर्मी से पूछा था कि आयतुल्लाह खामनेई को किसी दूसरे सुरक्षित शहर या बंकर में क्यों नहीं ले जाते. सुरक्षा कर्मी ने कहा कि उन्होंने (खामनेई) कहा, ‘जहां हमारी 9 करोड़ आवाम रहेगी, वहीं हम भी रहेंगे.' ”














