IPTA का कारवां 19 और 20 मई को भोपाल और सीहोर से गुजरेगा

भारतीय जन नाट्य संघ ( IPTA) का कारवां 19 और 20 मई को भोपाल (Bhopal) और सीहोर से गुजरेगा. आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में इप्टा ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा निकाल रहा है, जिसमें नाटक, गीत, पोस्टर प्रदर्शनी, गायन, लोककथाओं, नृत्यों आदि कलारूपों की अलग-अलग प्रस्तुतियां होंगी.

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भोपाल और सीहोर में लोक कलाकारों और विभिन्न सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी. 
भोपाल :

भारतीय जन नाट्य संघ ( IPTA) का कारवां 19 और 20 मई को भोपाल (Bhopal) और सीहोर से गुजरेगा. आजादी के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में इप्टा ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा निकाल रहा है, जिसमें नाटक, गीत, पोस्टर प्रदर्शनी, गायन, लोककथाओं, नृत्यों आदि कलारूपों की अलग-अलग प्रस्तुतियां होंगी. भोपाल शहर और आसपास के कार्यक्रमों के लिए एक आयोजन समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि राजेश जोशी होंगे. इप्टा मध्य प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष राजेश जोशी जी ने कहा नफरत की राजनीति के दौर में ढाई आखर प्रेम के बोलना और इस प्रेम की बात को आगे बढ़ाने का कम हम सभी मिल जुलकर करेंगे. 

शोर के इस दौर में प्रेम की गूंज को सुनना और सुनाना बेहद जरूरी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इप्टा की इस यात्रा से देश और प्रदेश के सांस्कृतिक परिवेश में वह आवाजें एकजुट होंगी, जो हाशिए पर चली गई हैं और इनसे हमारी प्रतिरोध की संस्कृति को नई राह मिलेगी. इप्टा के राज्य सचिव सचिन श्रीवास्तव ने बताया कि 9 अप्रैल को रायपुर से शुरू हो रही यह यात्रा छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों, कस्बों, गांवों से होते हुए 15 मई को छतरपुर के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगी और टीकमगढ़, चंदेरी, अशोकनगर, गुना से होते हुए 19 मई को भोपाल पहुंचेगी. 19 और 20 मई को भोपाल समेत आसपास के विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम होंगे. भोपाल से 20 मई को यात्रा इंदौर के लिए निकलेगी, जहां 22 मई को समापन कार्यक्रम होगा.

इस 45 दिवसीय यात्रा के दौरान प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, दलित लेखक संघ, जन नाट्य मंच समेत अन्य संगठनों, समूहों के सहयोग से 250 से अधिक स्थानों पर गीत, संगीत, नाटक, फिल्म, किस्सागोई के तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. अब तक यह यात्रा छत्तीसगढ़ और झारखंड से गुजर चुकी है, जबकि बिहार के कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. यात्रा में करीब 25 ख्यातिलब्ध कलाकार साथ—साथ चल रहे हैं. साथ ही स्थानीय कलाकारों के सहयोग से प्रस्तुतियां की जा रही हैं.

भोपाल और सीहोर में लोक कलाकारों और विभिन्न सांस्कृतिक समूहों की प्रस्तुतियां होंगी. इनमें कबीर गायन, जनगीत, गीत प्रस्तुति और नाटकों का मंचन प्रमुख है.

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