100-200 साल पुरानी एंटीक-विंटेज घड़ियों को चुटकी में ठीक कर देते हैं 86 साल के घड़ीसाज, विदेशों से रिपेयर होने देहरादून आती हैं घड़ियां

पृथ्वीराज बताते हैं कि साल 1955 से वह इस पेशे में हैं. उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की और फिर पूरी तरह इसी काम को अपना लिया. एनडीटीवी से बातचीत में वे कहते हैं, यह काम मेरी जिंदगी बन गया है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

आज जब पूरी दुनिया डिजिटल क्रांति के दौर से गुजर रही है और हर हाथ में स्मार्ट वॉच नजर आती है, तब यह सवाल उठता है कि क्या आज भी मैकेनिकल घड़ियों का इस्तेमाल होता है? जवाब है-हां. और ये घड़ियां कोई 20–30 साल पुरानी नहीं, बल्कि 100, 150, 200 साल पुरानी एंटीक और विंटेज घड़ियां हैं.

देहरादून में एक ऐसे ही घड़ीसाज हैं- पृथ्वीराज, जो पिछले 71 वर्षों से मैकेनिकल घड़ियां ठीक कर रहे हैं. खुद उनकी उम्र 86 साल है, लेकिन उनकी आंखों और हाथों की पकड़ आज भी वैसी ही मजबूत है. उनके पास न सिर्फ देश के अलग-अलग हिस्सों से, बल्कि विदेशों से भी पुरानी घड़ियां रिपेयर के लिए आती हैं.

महज 15 साल की उम्र से ठीक कर रहे घड़ियां

पृथ्वीराज ने महज 15 साल की उम्र में घड़ियां ठीक करने का काम शुरू किया था. उन्हें यह हुनर अपने पिता से विरासत में मिला. देहरादून में सचिवालय के ठीक सामने उनकी एक छोटी-सी दुकान है, जहां कई पुरानी और खुद बनाई गई घड़ियां आज भी टिक-टिक करती नजर आती हैं. खास बात यह है कि पृथ्वीराज बिना चश्मे के, नंगी आंखों से घड़ियों के बेहद छोटे-छोटे पुर्जे भी आसानी से देख लेते हैं.

मैकेनिकल घड़ियां बैटरी से नहीं चलतीं, बल्कि इनमें स्प्रिंग, गियर और कई सूक्ष्म मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं. ये घड़ियां दो तरह की होती हैं- मैन्युअल वाइंड और ऑटोमेटिक.

पृथ्वीराज न सिर्फ इन्हें रिपेयर करते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके पार्ट्स खुद तैयार भी करते हैं. उनके पास जर्मनी, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड की पुरानी एंटीक मशीनें हैं, जिनकी मदद से वे यह काम करते हैं.

विदेशों से भी ठीक होने देहरादून आती हैं घड़ियां

पृथ्वीराज बताते हैं कि साल 1955 से वह इस पेशे में हैं. उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की और फिर पूरी तरह इसी काम को अपना लिया. एनडीटीवी से बातचीत में वे कहते हैं, 'यह काम मेरी जिंदगी बन गया है. आज की स्मार्ट वॉच यूज-एंड-थ्रो होती है, लेकिन मैकेनिकल घड़ियां पीढ़ियों तक चलती हैं.'

मुंबई, चेन्नई, कोलकाता जैसे शहरों के साथ-साथ स्विट्जरलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस से भी घड़ियां उनके पास रिपेयर के लिए आती हैं. वह कलाई घड़ियों के साथ-साथ दीवार घड़ियां भी ठीक करते हैं. रोज सुबह 10 बजे दुकान खोलकर शाम 6 बजे तक काम करने वाले पृथ्वीराज सचमुच अपने आप में एक चलती-फिरती 'घड़ी कंपनी' हैं.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Delhi Riot Case: Umar Khalid और Sharjeel Imam को नहीं मिली Supreme Court से जमानत | BREAKING