- पूर्व IPS अमिताभ दास की गिरफ्तारी एक नाबालिग NEET छात्रा की मौत से जुड़े विवाद में हुई और केस तेजी से बढ़ा.
- पटना पुलिस ने अमिताभ दास के खिलाफ भ्रामक और भड़काऊ बयान देने के आरोप में FIR दर्ज की है.
- गिरफ्तारी के बाद दास के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर फॉरेंसिक जांच शुरू की गई.
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति और सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया है. एक नाबालिग NEET छात्रा की संदिग्ध मौत से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐसी कहानी बन चुका है, जिसमें आरोप, वीडियो बयान, छापेमारी, अस्पताल भर्ती और नए केसों की परतें लगातार जुड़ती जा रही हैं और हर मोड़ पर नया मोड़ सामने आ रहा है.
एक मौत, कई सवाल, और सोशल मीडिया पर उठी आंधी
NEET छात्रा की मौत शुरू से ही संदिग्ध बताई जा रही थी. सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज थी और इसी दौरान पूर्व IPS अमिताभ दास ने लगातार वीडियो और पोस्ट डालकर इस मौत पर सवाल उठाए. पटना पुलिस के मुताबिक, दास ने ऐसे बयान साझा किए जिन्हें भ्रामक, तथ्यहीन और भड़काऊ माना गया. इसी आधार पर पटना के चित्रगुप्त नगर थाना में एफआईआर संख्या 44/2026 दर्ज हुई और इसमें POCSO Act का भी उल्लेख किया गया, क्योंकि मामला नाबालिग से जुड़ा था.
हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पॉक्सो की कौन-सी धारा लगाई गई है, लेकिन कार्रवाई को गंभीर बताते हुए आगे बढ़ा दिया गया.
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गिरफ्तारी का ड्रामा: छापेमारी, डिजिटल सबूत और अचानक बिगड़ी तबीयत
पुलिस बीते दिन दास के पटना स्थित आवास पहुंची. मोबाइल फोन, लैपटॉप, अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए, ताकि सोशल मीडिया पोस्टों और डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जा सके. गिरफ्तारी के तुरंत बाद पूछताछ शुरू हुई, लेकिन थोड़ी देर में उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने जांच कर स्थिति सामान्य बताई और देर रात उन्हें छोड़ दिया गया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.
एक और नया केस: राजकीय प्रतीक के उपयोग को लेकर जांच
रिहाई के कुछ घंटों बाद ही सामने आया कि एक नया मामला भी दर्ज हुआ है. आरोप लगे कि अमिताभ दास ने अपने निजी लेटर पैड या संचार में सरकारी प्रतीक और पूर्व IPS पद का उपयोग ऐसे तरीके से किया जो नियमों के खिलाफ हो सकता है. पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है. यह स्पष्ट नहीं कि यह नया केस अलग है या पुराने एफआईआर में जोड़ा गया है.
विवाद की जड़: NEET छात्रा की मौत की मूल जांच
जिस छात्रा की मौत से यह पूरा विवाद शुरू हुआ, उसकी जांच अब अलग स्तर पर चल रही है. डीएनए, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन डेटा, यात्रा विवरण सभी की जांच हो रही है. मामला S.I.T. और केंद्रीय एजेंसी तक पहुंचने की चर्चा भी चल रही है.
महत्त्वपूर्ण यह है कि छात्रा की मौत की जांच और अमिताभ दास पर दर्ज एफआईआर- दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों एक ही कहानी का हिस्सा बन गई हैं.
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राजनीतिक तापमान: बयानबाज़ी, आरोप और अभिव्यक्ति की आजादी की बहस
अमिताभ दास ने अपने कुछ बयानों में 'बड़े नामों' का जिक्र किया था और डीएनए जांच की मांग की थी. पुलिस का आरोप है कि इससे जांच प्रभावित हो सकती थी. समाज में भ्रम फैल सकता था. इसीलिए कार्रवाई जरूरी थी. वहीं दास के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्होंने सिर्फ सवाल उठाए थे.
कहानी का मौजूदा मोड़
गिरफ्तारी, फोन-लैपटॉप जब्त, अस्पताल में भर्ती, रातोंरात रिहाई, नया केस, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी है. मामला अब जांच की मेज पर है और आने वाले दिनों में पुलिस या कोर्ट की ओर से और बड़े खुलासे हो सकते हैं. कहानी की शुरुआत एक मौत से हुई थी, लेकिन अब यह दस्तक दे रही है कानून, राजनीति और सोशल मीडिया के तिहरे मोर्चे पर और हर अगला दिन इस कहानी में नया अध्याय जोड़ रहा है.














