INS सुदर्शिनी का मिशन ‘लोकायन 26' : 10 महीने में करेगा 13 देशों, 18 विदेशी बंदरगाहों और इतना लंबा सफर

इस अभियान में भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के 200 से अधिक प्रशिक्षु शामिल होंगे. उन्हें लंबी दूरी की समुद्री यात्रा और पारंपरिक नौकायन का अनुभव मिलेगा. साथ मे उन्हें मौसम की समझ, हवा और लहरों के अनुसार, जहाज संचालन और खुले समुद्र में जीवन से जुड़ी जरूरी बातें सिखाई जाएंगी.

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INS सुदर्शिनी का 10 महीने वाला मिशन.
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  • भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 26 अभियान के लिए 20 जनवरी को रवाना होगा
  • यह जहाज लगभग दस महीने तक 22,000 नॉटिकल माइल से अधिक की दूरी तय करते हुए 13 देशों के 18 बंदरगाहों पर पहुंचेगा
  • लोकायन 26 युवा नौसैनिकों को पारंपरिक सेलिंग, लंबी दूरी की नौवहन और खुले समुद्र में काम करने का अनुभव देगा
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नई दिल्ली:

भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप (पाल वाला जहाज ) INS सुदर्शिनी एक बार फिर भारत की समुद्री परंपरा को बहाली के लिए लोकायन 26 पर रवाना होगा. अपने नौसैनिक कौशल को दुनिया के सामने दिखाने के लिए 20 जनवरी को यह जहाज ऐतिहासिक ट्रांस-ओसैनिक अभियान पर रवाना होगा. यानि यह कई महासागर को पार करेगा.

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वैश्विक समुद्री सहयोग का प्रतीक है 'लोकायन 26'

यह यात्रा लगभग 10 महीने तक चलेगी. इसमें आईएनएस सुदर्शिनी 22,000 नॉटिकल माइल से अधिक की दूरी तय करते हुए 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों पर पहुंचेगा. लोकायन 26 केवल एक प्रशिक्षण यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री विरासत, वसुधैव कुटुम्बकम की भावना और वैश्विक समुद्री सहयोग का प्रतीक है. इस अभियान के माध्यम से भारतीय नौसेना समुद्र के जरिए देशों के बीच सहयोग और मित्रता के पुल बना रही है.

यह अभियान मुख्य रूप से युवा नौसैनिकों को प्रशिक्षण देने के लिए आयोजित किया गया है. इसके तहत उन्हें पारंपरिक सेलिंग, लंबी दूरी की समुद्री नेविगेशन और खुले समुद्र में काम करने का वास्तविक अनुभव मिलेगा. यात्रा के दौरान जहाज हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरेगा.

अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप आयोजनों में होगा शामिल

लोकायन 26 के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप आयोजनों में हिस्सा लेगा. पहला है एस्काल आ सेत जो फ्रांस के सेत बंदरगाह पर होता है. यहां भारत अपनी पारंपरिक नौकायन संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा. दूसरा आयोजन है सेल 250,  जो अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित होगा, जहां दुनिया भर के प्रसिद्ध टॉल शिप भाग लेते हैं.

इस अभियान में भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के 200 से अधिक प्रशिक्षु शामिल होंगे. उन्हें लंबी दूरी की समुद्री यात्रा और पारंपरिक नौकायन का अनुभव मिलेगा. साथ मे उन्हें मौसम की समझ, हवा और लहरों के अनुसार, जहाज संचालन और खुले समुद्र में जीवन से जुड़ी जरूरी बातें सिखाई जाएंगी. ऐसी लंबी यात्राएं प्रशिक्षुओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व और टीमवर्क को मजबूत करती हैं

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INS सुदर्शिनी की यात्रा का मकसद जानें

आईएनएस सुदर्शिनी जिन देशों के बंदरगाहों पर पहुंचेगा, वहां संबंधित नौसेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण, प्रोफेशनल बातचीत और सहयोग गतिविधियां होंगी. साथ ही, यह यात्रा कल्चरल डिप्लोमेसी का भी एक माध्यम है, जिसके जरिए भारत अपनी संस्कृति, अनुशासन और मित्रता का संदेश दुनिया तक पहुंचाएगा.

आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का दूसरा सेल ट्रेनिंग शिप है और अब तक 1,40,000 नॉटिकल माइल से अधिक की यात्रा कर चुका है. लोकायन 26 के जरिए यह जहाज एक बार फिर भारत को एक जिम्मेदार और सक्षम समुद्री राष्ट्र के रूप में विश्व मंच पर स्थापित करेगा.

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