- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने प्रोजेक्ट-17ए के तहत चौथी स्टेल्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरी नौसेना को सौंप दी है
- महेंद्रगिरी एक बहु-क्षमता वाला स्टेल्थ फ्रिगेट है जो हवा, सतह और समुद्र के भीतर दुश्मनों से मुकाबला कर सकता है
- इस युद्धपोत की लंबाई 149 मीटर, चौड़ाई 17.8 मीटर और अधिकतम गति लगभग 52 किलोमीटर प्रति घंटा है
मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने प्रोजेक्ट‑17ए के तहत तैयार की गई चौथी स्टेल्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरी भारतीय नौसेना को सौंप दी. अब कमीशन होने के बाद यह अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना में INS महेंद्रगिरी के नाम से शामिल किया जाएगा. महेंद्रगिरी एक बहु‑क्षमता वाला स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो युद्ध के दौरान हवा, सतह और समुद्र के भीतर मौजूद दुश्मनों से एकसाथ मुकाबला करने में सक्षम है.
स्टेल्थ तकनीक और ताकत का शानदार संगम है महेंद्रगिरी
महेंद्रगिरी हमला करने के साथ‑साथ खुद का बचाव करने में भी पूरी तरह सक्षम है. स्टेल्थ तकनीक से लैस होने के कारण यह दुश्मन के रडार पर बेहद छोटे लक्ष्य के रूप में दिखाई देता है. एमडीएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) ने इसे कंपनी और देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि यह भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र में एक अहम मील का पत्थर है और एमडीएल के लिए गर्व का क्षण भी है. इस युद्धपोत की लंबाई 149 मीटर और चौड़ाई 17.8 मीटर है. इसकी अधिकतम गति 28 नॉट यानी लगभग 52 किलोमीटर प्रति घंटा है.
45 दिनों तक समंदर में रहने में सक्षम, स्वदेशी ताकत का प्रतीक
इसमें 215 नौसैनिकों का क्रू तैनात रहेगा, जबकि महिला अग्निवीरों के रहने के लिए अलग व्यवस्था की गई है. इस जहाज का वजन 6670 टन है और यह एक बार में करीब 45 दिनों तक समुद्र में रह सकता है. महेंद्रगिरी प्रोजेक्ट‑17ए के तहत एमडीएल में बनाया गया आखिरी जहाज है. इस परियोजना के तहत वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो और भारतीय नौसेना की टीमों समेत कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया है. यह आधुनिक तकनीक से लैस फ्रिगेट भारत की बढ़ती समुद्री ताकत को दर्शाता है.
ब्रह्मोस और बराक मिसाइलों से लैस, युद्ध में बेहद घातक
इस युद्धपोत को खास तौर पर खतरनाक बनाती हैं इसकी हथियार प्रणालियां. इसमें दूर तक मार करने वाली आठ ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं. इसके अलावा सतह से सतह पर मार करने वाली बराक मिसाइल प्रणाली भी मौजूद है. पनडुब्बियों से निपटने के लिए इसमें टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं, जो इसे उन्नत युद्ध क्षमता से लैस बनाते हैं. महेंद्रगिरी पूरी तरह स्वदेशी निर्माण का उदाहरण है. एमडीएल ने भरोसा जताया है कि यह जहाज समुद्र में शानदार प्रदर्शन करेगा और भारतीय नौसेना की ताकत को और मजबूत करेगा.














