- भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी अरिदमन आज नौसेना में शामिल हो रही है, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस है.
- यह पनडुब्बी करीब 90% स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसमें परमाणु रिएक्टर लगा है जो लगातार ऊर्जा प्रदान करता है.
- अरिदमन में आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं और यह 3500 किलोमीटर तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल से लैस है.
समंदर के अंदर देश की अदृश्य ताकत बढ़ गई है. तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आज से देश की नौसेना में शामिल हो रही है. ये अरहिंत क्लास की तीसरी पनडुब्बी है और नाम है अरिदमन यानी जो दुश्मन का नाश करे. इसके सामने दुश्मन का टिकना मुश्किल है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है "शब्द नही शक्ति है अरिदमन". जाहिर सी बात है कि राजनाथ सिंह के इस पोस्ट से भारत के प्रतिद्वंद्वी चीन और पाकिस्तान की नींद उड़नी तय है. चार महीने से ये पनडुब्बी विशाखापट्टनम यार्ड में नौसेना में शामिल होने को तैयार है.
यह पनडुब्बी भारत की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल प्रोगाम का हिस्सा है. यह परमाणु पनडुब्बी किसी भी देश के लिए बड़ी सैन्य और तकनीकी उपलब्धि मानी जाती है क्योंकि इसको बनाना बहुत मुश्किल होता है.
90 फीसदी स्वदेशी तकनीक
अरिदमन पनडुब्बी परमाणु हमला करने में सक्षम है. हालांकि भारत की नीति साफ है कि वो कभी पहले परमाणु हमला नहीं करेगा. ये पनडुब्बी 90 फीसदी स्वदेशी तकनीक से बनी है. इसमें परमाणु रिएक्टर भी लगा है जो इसे लगातार ऊर्जा सप्लाई करता है. यही वजह है कि इसे फ्यूल लेने के लिए सतह पर नहीं आना पड़ता. ये पनडुब्बी चुपचाप समंदर के अंदर घात लगाए बैठी रहती है और किसी को कानों कान खबर तक नहीं होती. पानी के अंदर इसे ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है.
यह पनडुब्बी न्यूक्लियर वॉरहेड लगी मिसाइलों को भी लॉन्च कर सकती है, जो समंदर से निकलकर आसमान या फिर जमीन पर अपने लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है. इस पनडुब्बी का निर्माण सेना के गोपनीय कार्यक्रम का हिस्सा है, लिहाजा इसके बारे में बहुत कम जानकारी होती है.
3500 किमी दूर बैठे दुश्मन को करेगी तबाह
इस परमाणु पनडुब्बी का वजन करीब 7000 टन है, जो दिल्ली क्लास के डिस्ट्रॉयर से थोड़ा ज्यादा है. इसका डिजाइन ज्यादा आधुनिक है. पानी के अंदर इसकी रफ्तार 45 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है. अरिहंत और अरिघात पनडुब्बी से 1000 टन भारी अरिदमन ज्यादा घातक भी है. इसकी मिसाइल आक्रमण क्षमता दोगुनी है और रेंज भी ज्यादा है, जहां अरिहंत और अरिघात में 4 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब है वहीं अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं. यह 750 से डेढ़ हजार किलोमीटर तक मार करने वाली 24 सागरिका K15 बैलिस्टिक मिसाइल से लैस है तो लंबी दूरी तक मार करने वाली 8 बैलिस्टिक K4 मिसाइलें भी इसमें लगी हैं. K4 मिसाइल की रेंज है 3500 किलोमीटर है. भविष्य में इसे K5 मिसाइलों से भी लैस किया जाएगा, जिसकी रेंज करीब 6000 किलोमीटर तक होगी.
नौसेना की ताकत में करेगी इजाफा
इससे पहले, आईएनएस अरिहंत 2016 में तो आईएनएस अरिघात 2024 में कमीशन हुई थी. यह दोनों परमाणु पनडुब्बियां स्ट्रैटिजिक फोर्सेज कमांड के तहत काम करती हैं. साफ है कि अरिदमन के आने से नौसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा और समंदर के अंदर से हमला करने की क्षमता बढ़ जाएगी. दुनिया में गिनती के ही देश है जिनके पास अपने ही देश में बनी परमाणु पनडुब्बियां हैं और भारत उनमें से एक है.














