ड्राइवर की झपकी पर 3 सेंकड में लग जाएगा ब्रेक, भारतीय रेलवे का खास AI सिस्टम, जानिए इसके बारे में

भारतीय रेलवे ट्रेनों में खास AI सिस्टम लगा रहा है. यह सिस्टम लोको पायलट के हर मूवमेंट को ट्रैक करेगा. अगर कोई लोको पायलट झपकी लेता है तो महज तीन सेकंड में अपने आप ब्रेक लगाएगा.

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  • भारतीय रेलवे ने लोको पायलट की नींद लगने पर ट्रेन को स्वचालित रूप से रोकने के लिए आई-गेज तकनीक विकसित की है
  • आई-गेज सिस्टम में लगाये गए इन्फ्रारेड कैमरे लोको पायलट की आंखों और चेहरे की हरकतों को लगातार मॉनिटर करते हैं
  • यदि लोको पायलट की आंखें तीन सेकंड से अधिक बंद रहती हैं तो सिस्टम पहले तेज ऑडियो अलार्म बजाता है
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ट्रेन हादसों को रोकने के लिए भारतीय रेलवे अब खास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा ले रही है. रेलवे एक ऐसे सिस्टम को डेवलेप कर रहा है, जो लोको पायलट को नींद आ जाने पर अपने आप इमरजेंसी ब्रेक लगा देगा. इस तकनीक को 'आई-गेज' (i-GAZE) कहते हैं. दुनिया के कई देशों में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल पहले से हो रहा है. आखिर ये आई-गेज तकनीक है क्या और यह कैसे काम करती है? आइए समझते हैं.

क्या है आई-गेज तकनीक?

यह एक ड्राइवर स्टेट मॉनिटरिंग सिस्टम है जो AI और बायो-मेट्रिक्स का इस्तेमाल करता है. सिस्टम में लगे कैमरे 24 घंटे लगातार लोको पायलट पर नजर रखते हैं. लोको पायलट के चेहरे के हाव-भाव, खासतौर आंखों की पुतलियों और पलकों की हरकत को ट्रैक किया जाता है.

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

जिन ट्रेनों में यह सिस्टम लगाया जाता है उनके इंजन के केबिन में लोको पायलट के ठीक सामने  छोटे-छोटे इंफ्रारेड यानी IR कैमरे लगे होते हैं. यह कैमरे काफी एडवांस होते हैं. इनमें लगे सेंसर अंधेरे में भी ड्राइवर की आंखों की पुतलियों को आसानी से देख सकते हैं. आई गेज सिस्टम लगातार लोकोपायलट की पलकों के झपकने और आंखों के खुले रहने के समय को स्कैन करता रहता है. अगर लोको पायलट की आंखें थकान या नींद के कारण 3 सेकंड से ज्यादा समय तक बंद रहती हैं, तो AI इसे खतरे का संकेत मानता है. झपकी लगते ही केबिन में एक बहुत तेज ऑडियो अलार्म बजता है ताकि लोको पायलट तुरंत जाग जाए.

अगर अलार्म के बावजूद लोको पायलट कोई एक्शन नहीं करता, तो यह आई गेज सिस्टम खुद ब्रेकिंग यूनिट को कमांड भेजता है और ट्रेन में ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाता है.

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इसकी और क्या खासियत?

यह एआई सिस्टम ट्रेन हादसों से तो सुरक्षा करता ही है, साथ ही इसकी और भी कई खासियतें हैं. यह सिस्टम लोको पायलट की रियल टाइम मॉनिटरिंग करता है, इससे यह पता लगा सकता है कि वह कितना थका हुआ है और क्या वो ट्रेन चलाने की स्थिति में है. यह सिस्टम 'कवच' प्रणाली का ही एक हिस्सा है, जो उसे और भी मजबूत बनाता है. एक ओर जहां कवच ट्रेन को बाहरी सुरक्षा देता है तो यह ट्रेन की आंतरिक सुरक्षा पुख्ता करता है. इस सिस्टम के शुरू होने के बाद भारत चीन, जापान और यूरोपीय देशों की कतार में खड़ा हो गया है जो रेल सुरक्षा के लिए प्रेडिक्टिव एआई का इस्तेमाल करते हैं. आई-गेज तकनीक का लक्ष्य उन रेल हादसों को रोकना है जो रात के समय लंबी ड्यूटी या थकान के कारण लोको पायलट को नींद आने से होते हैं.

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