दुश्मन की खैर नहीं! भारत के इस 'छुपा रुस्तम' हथियार से समंदर में मचेगी खलबली, नौसेना की बढ़ी ताकत

हेवी वेट टॉरपीडो लंबी दूरी तक मार करने वाले, ज्यादा ताकतवर हथियार होते हैं, जिन्हें आमतौर पर पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत वायर‑गाइडेड तकनीक है, जिससे लॉन्च के बाद भी इसे नियंत्रित किया जा सकता है.

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  • भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने देश का पहला प्रोडक्शन‑ग्रेड वायर‑गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो विकसित किया है.
  • यह टॉरपीडो भारतीय नौसेना के लिए DRDO की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी के सहयोग से बनाया गया है.
  • टॉरपीडो में फाइबर ऑप्टिक वायर‑गाइडेंस और एकॉस्टिक होमिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं.
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नई दिल्ली:

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला प्रोडक्शन‑ग्रेड वायर‑गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो तैयार किया है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है. इस टॉरपीडो का निर्माण विशाखापत्तनम स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी (NSTL) के सहयोग से किया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी और सीधे युद्ध उपयोग के लिए तैयार सिस्टम है. यह टॉरपीडो पानी के भीतर चलने वाला अत्याधुनिक हथियार है, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम है.

हेवी वेट टॉरपीडो लंबी दूरी तक मार करने वाले, ज्यादा ताकतवर हथियार होते हैं, जिन्हें आमतौर पर पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत वायर‑गाइडेड तकनीक है, जिससे लॉन्च के बाद भी इसे नियंत्रित किया जा सकता है और जरूरत के अनुसार इसकी दिशा बदली जा सकती है. इसे ट्रेनिंग और युद्ध, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है, जिससे नौसेना के अभियानों में लचीलापन बढ़ेगा. इस टॉरपीडो को NSTL ने डिज़ाइन किया है जबकि इसका उत्पादन BDL ने डेवलपमेंट‑कम‑प्रोडक्शन पार्टनर के रूप में किया, जिसमें कई MSME और उद्योगों की भी भागीदारी रही, जिससे देश का रक्षा इकोसिस्टम मजबूत हुआ है.

यह टॉरपीडो फाइबर ऑप्टिक वायर‑गाइडेंस, एक्टिव और पैसिव एकॉस्टिक होमिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है, जो दुश्मन की आवाज पहचानकर उसे ट्रैक करता है, लक्ष्य खोजने के बाद हमला करता है और जरूरत पड़ने पर दोबारा वार भी कर सकता है. इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के कारण यह कम आवाज करता है, जिससे यह छिपकर हमला करने में सक्षम है. माना जा रहा है कि इसकी मारक क्षमता करीब 40 किलोमीटर तक है, इसकी गति लगभग 40 नॉट्स है और यह 400 मीटर से अधिक गहराई में भी काम कर सकता है. अगर कंट्रोल वायर टूट भी जाए तो यह अपने लक्ष्य पर स्वतः हमला करने में सक्षम है और दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक चालों से भी बच सकता है. कुल मिलाकर यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक अहम कदम है, जिससे भारत की नौसैनिक और एंटी‑सबमरीन वॉरफेयर क्षमता को बड़ी मजबूती मिलेगी.

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