पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक, सबसे संयम की अपील : राज्यसभा में बोले जयशंकर

मिडिल ईस्ट के गहराते संकट पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हमारा मानना है कि सभी मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और विचार-विमर्श किया जाना चाहिए.

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संसद में विदेश मंत्री एस जयशंकर
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  • विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में मिडिल ईस्ट के गहराते संकट और बिगड़ते हालात की जानकारी दी है
  • सरकार ने 20 फरवरी को सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए बातचीत की अपील की थी
  • 28 फरवरी को ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुआ जिसमें कई लोग मारे गए और बुनियादी ढांचे को नुकसान
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज संसद में मिडिल ईस्ट के गहराते संकट पर बयान दिया. इस दौरान विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया के बिगड़ते और चिंताजनक हालात को देखते हुए सबसे संयम की बरतने की अपील की है. विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच, डॉ. एस जयशंकर ने कहा, "हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी. हमारा मानना ​​है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाना चाहिए."

विदेश मंत्री जयशंकर ने क्या कहा

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जंग शुरू हुई. इस युद्ध में कई लोग मारे गए हैं. इसके कारण आधारभूत ढांचे को भी नुकसान पहुंचा. सरकार ने इस बारे में अपनी चिंता जताई थी. हमने आम नागरिकों की सेफ्टी को लेकर चिंता जताई थी. सीसीएस की बैठक हुई थी और खाड़ी देशों में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की. पीएम मोदी मौजूदा स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति खराब हो रही है. सामान्य जीवन और आर्थिक हालात इन इलाकों में खराब हुए हैं. हमने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक रास्ते के हल का आह्वान किया है.

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जयशंकर ने ये भी कहा कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतें हमारी प्राथमिकता है. ऊर्जा की कीमतों पर हमारी नजर है.  भारत शांति के पक्ष में है, बातचीत हो और इसका कूटनीतिक समाधान निकले. भारतीय समुदाय की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. हमारे राष्ट्रीय हित ऊर्जा के लिए कारोबार ही हमारी प्राथमिकता है.

मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति जरूरी

विदेश मंत्री ने कहा कि मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति जरूरी है. एक करोड़ भारतीय लोग खाड़ी देश में रहते हैं, ईरान में भी कई हजार भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं छात्र भी वहां पढ़ाई करते हैं. सरकार मिडिल ईस्ट की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. हम ईरान में रह रहे भारतीय लोगों को भी जानकारी दे रहे हैं. जो ईरान में रह रहे हैं उनको भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने को कहा गया है. स्थिति को देखते हुए हमने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय लोगों के लिए कई एडवाइजरी जारी की थी. ईरान में रहने वाले सभी लोगों को तुरंत वहां से निकलने की सलाह दी गई थी.

फंसे लोगों को निकालने की पूरी कोशिशें

ईरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह से संचालित हो रहा है. हम इन इलाकों में रह रहे सभी भारतीय समुदाय के लोगों को सहयोग के लिए तत्पर हैं. खाड़ी देश में सभी दूतावास लगातार एक्टिव है. हमारे राजनयिक तेहरान, यूएई, दुबई, बहरीन से भारतीय लोगों को निकालने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं. हमने कई कमर्शियल फ्लाइट संचालित की हैं ताकि भारतीय लोगों को वापस लाया जाए. 67 हजार भारतीय वापस लौट चुके हैं. पूरी कोशिश की जा रही है जो भी खाड़ी देश में फंसे हुए हैं उनको लाने की पूरी कोशिश चल रही है.

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कई देशों से हुई पीएम मोदी की बातचीत

पीएम मोदी ने यूएई, कतर, अमीरात, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और ओमान और इजरायल के पीएम से बात की है. मैं भी लगातार इन देशों के विदेश मंत्री से बात कर रहा हूं. हम अपने कूटनीतिक रास्तों के जरिए भी बात कर रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अराघची से भी बात की है. हम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ईरान का युद्धपोत कोच्चि में डॉक है. ईरान ने हमसे आग्रह किया है. लोआन कोच्चि में डॉक है, सभी क्रू भारत में हैं.

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