- जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों ने तीन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों को एक ऑपरेशन में ढेर किया था
- ऑपरेशन में जर्मन शेफर्ड डॉग टायसन की भूमिका अहम रही, जिसने आतंकियों की लोकेशन का पता लगाया था
- टायसन को आतंकियों की गोली लगी, फिर भी उसने डटकर मुकाबला किया और घायल होकर भी मदद जारी रखी
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों ने एक ऑपरेशन में तीन आतंकियों को ढेर कर दिया. तीनों आतंकी पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे. इस ऑपरेशन में एक जर्मन शेफर्ड डॉग की भूमिका अहम रही. बताया जा रहा है कि आतंकियों की लोकेशन का पता इसी डॉग ने लगाया था. और तो और आतंकियों की पहली गोली भी इसी डॉग ने खाई. डॉग का नाम 'टायसन' है.
आंतकियों ने टायसन को पैर में गोली लगी थी. घायल होने के बावजूद टायसन डटा रहा. टायसन ने ही आतंकियों के सटीक ठिकाने का पता लगाया था, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने उनका एनकाउंटर कर दिया. गोली लगने से घायल हुए टायसन को इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर उधमपुर के अस्पताल ले जाया गया है.
टायसन, भारतीय सेना की 2 पैरा स्पेशल फोर्सेस का डॉग है. आतंकियों के ठिकाने की ओर वही सबसे पहले बढ़ा था. तभी आतंकियों की एक गोली उसके पैर में आकर लग गई. इससे वह घायल हो गया.
2024 में ही 'फैंटम' को खोया था
दुनियाभर के देशों की सेना में डॉग्स होते हैं, जो इस तरह के खतरनाक ऑपरेशन में शामिल रहते हैं. 4 महीने पहले ऐसे ही एक एंटी-टेरर ऑपरेशन में भारतीय सेना का खोजी कुत्ता 'फैंटम' शहीद हो गया था. 28 अक्टूबर 2024 को जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में गोलीबारी के दौरान फैंटम को गोली लग गई थी और उसकी मौत हो गई थी.
2023 में फीमेल लेब्राडोर की गई थी जान
सितंबर 2023 में जम्मू के राजौरी जिले में एक ऑपरेशन के दौरान फीमेल लेब्राडोर 'केंट' की जान चली गई थी. केंट को आतंकियों की गोली लग गई थी. राजौरी में जब सेना आतंकियों का पीछा कर रही थी, तब केंट ही इस ऑपरेशन को लीड कर रही थी. तभी आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. केंट ने अपने हैंडलर को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी.
तत्कालीन नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था, 'हमारी केंट ने अपने अपने हैंडलर को बचाने के लिए अपनी जान दे दी. उसने पहले आगे बढ़कर आतंकी पर हमला किया.' इस ऑपरेशन में दो आतंकी मारे गए थे. केंट का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था.
जूम: ऑपरेशन में घायल, फिर हो गई थी मौत
अक्टूबर 2022 की रात को दक्षिणी कश्मीर के तंगपावा इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी. रात में ही सेना ने ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन में जर्मन शेफर्ड डॉग 'जूम' भी साथ था. एक घर में आतंकी छिपे थे. जूम घर के अंदर गया और आतंकियों पर हमला कर दिया. इस दौरान उसे दो गोलियां लगीं लेकिन वह डटा रहा. ढाई साल का जूम सेना की 15 कॉर्प्स की असॉल्ट यूनिट से 10 महीने पहले ही जुड़ा था. गोली लगने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसका इलाज किया लेकिन बचाया नहीं जा सका. 26 जनवरी 2023 को जूम को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
'एक्सल' को भी किया गया था सम्मानित
जुलाई 2022 में सुरक्षा बलों ने बारामूला के क्रेरी के वानीगम बाला इलाके में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था. इस ऑपरेशन में जर्मन शेफर्ड 'एक्सल' भी साथ था. 29 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के साथ आतंकवाद विरोधी अभियान में उसे तैनात किया गया था. एक घर में आतंकी छिपे थे. एक्सल जैसे ही अंदर गया, वैसे ही आतंकियों ने उस पर गोली चला दी. इससे एक्सल की मौत हो गई. इस ऑपरेशन में लश्कर का एक आतंकी मारा गया था. 15 अगस्त 2022 को एक्सल को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.














