- भारतीय सेना ने इंडिया एआई समिट में 12 स्वदेशी एआई एप्लीकेशन पेश किए जो रक्षा और नागरिक सुरक्षा में उपयोगी हैं
- सैम यूएन वेब प्लेटफॉर्म मिशन प्लानिंग और आपदा प्रबंधन के लिए रियल टाइम नक्शा आधारित जानकारी देता है
- प्रक्षेपण हाइब्रिड सैन्य मौसम प्रणाली भूस्खलन, बाढ़ तथा हिमस्खलन की पूर्व चेतावनी पहले दे सकती है
बीते दिनों देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने एक कार्यक्रम में कहा था कि भारतीय सेना न सिर्फ हथियार, बल्कि तकनीक के मामले में भी आगे बढ़ रही है. आधुनिक तकनीकें जैसे एआई और क्वांटम तकनीक जैसी चीजों के प्रयोग पर भी जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में भारतीय सेना देश को डेटा आधारित और AI से सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. यह कदम तकनीकी आत्मनिर्भरता और सुरक्षित डिजिटल क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है.
इंडिया AI समिट में भारतीय सेना ने कई स्वदेशी AI एप्लिकेशन पेश किए हैं. इनका उपयोग रक्षा के साथ-साथ शिक्षा, आपदा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, परिवहन सुरक्षा और डिजिटल ढांचे की सुरक्षा में भी किया जा सकता है. सेना ने इस समिट में 12 स्वदेशी एआई एप्लीकेशन पेश किए हैं.
एआई एग्जामिनर
यह एक AI आधारित ऑटोमैटिक मूल्यांकन प्रणाली है. इसे किसी भी लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा जा सकता है. यह परीक्षा तैयार करने, उत्तरों की जांच करने, अंक देने और प्रशिक्षुओं को फीडबैक देने का काम करती है.
सैम यूएन: मिशन प्लानिंग में करेगा मदद
SAM-UN (Situational Awareness Module for UN). यह एक स्वदेशी वेब प्लेटफॉर्म है जो नक्शे पर आधारित जानकारी, रिपोर्टिंग और AI से किए गया विश्लेषण को एक साथ जोड़ता है. इससे अधिकारियों को मिशन की योजना, निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए रियल-टाइम जानकारी मिलती है. यह आपदा प्रबंधन केंद्र और स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम में भी उपयोगी है.
एकम: सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म
यह एक सुरक्षित और स्वदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म है. इसमें AI चैट, दस्तावेज और प्रेजेंटेशन बनाना, बहुभाषी अनुवाद, सारांश बनाना और मल्टीमीडिया टूल जैसी सुविधाएँ मौजूद होंगी. यह डेटा की सुरक्षा और पूरी तरह स्वदेशी नियंत्रण सुनिश्चित करता है.
प्रक्षेपण: मौसम और आपदा की भविष्यवाणी
यह भारत की पहली हाइब्रिड सैन्य मौसम प्रणाली है. यह 3 से 7 दिन पहले भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन की चेतावनी दे सकती है. इसे राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सहयोग से विकसित किया गया है. यह आपदा प्रबंधन एजेंसियों और सीमावर्ती इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है.
सुरक्षा के लिए फेस रिकग्निशन: एक्सफेस
यह AI आधारित चेहरा पहचान प्रणाली है. जैसे स्मार्टफोन्स में चेहरा पहचानने वाला सिस्टम होता है, ये भी कुछ वैसा ही है. लेकिन ये उससे काफी उन्नत सिस्टम है. इससे तस्वीर और वीडियो के जरिए तेजी से पहचान और सत्यापन किया जा सकता है. यह सुरक्षा, एयरपोर्ट और लापता लोगों की पहचान में काम आती है.
नभ दृष्टि: मोबाइल से रियल-टाइम रिपोर्टिंग
यह मोबाइल आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम है. यह स्थान, तस्वीर और समय की जानकारी लेकर AI के जरिए तुरंत उस जगह को एक दृश्य रूप में दिखाता है. इससे आपदा रिपोर्टिंग और आपातकालीन खोज अभियान में मदद मिलती है.
ड्राइवर फटिग डिटेक्शन
यह एक पोर्टेबल AI डिवाइस है जो ड्राइवर की नींद या थकान को तुरंत पहचानकर चेतावनी देता है. यह अंधेरे और कठिन रास्तों में भी सही काम करता है. इससे गाड़ी चलाते समय एक्सीडेंट की संभावना काफी कम हो जाती है.
AI-in-a-Box (Portable Edge AI Platform)
यह एक छोटा लेकिन शक्तिशाली कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है जो दूरदराज या सुरक्षित क्षेत्रों में बिना इंटरनेट के AI मॉडल चला सकता है. अब तक हमने देखा है कि AI को काम करने के लिए किसी नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत होती है. लेकिन इस सिस्टम ने वो दिक्कत दूर कर दी है. यह दूर-दराज के अस्पतालों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में उपयोगी साबित होगा.
व्हीकल ट्रैकिंग और लॉजिस्टिक्स
यह AI आधारित वाहन निगरानी प्रणाली है. इसमें GPS और रियल-टाइम डैशबोर्ड के जरिए वाहनों की निगरानी, लॉजिस्टिक्स और रूट योजना बनाई जा सकती है.
डीपफेक डिटेक्शन और साइबर सुरक्षा
यह AI प्रणाली नकली या बदले हुए वीडियो की पहचान करती है. इससे गलत जानकारी और दुष्प्रचार को रोका जा सकता है.
मोबाइल सिक्योरिटी सिस्टम
यह AI आधारित मोबाइल सुरक्षा प्रणाली है. यह संदिग्ध गतिविधियों, वायरस और डेटा चोरी के खतरे की पहचान करती है. यह बैंकिंग और संस्थागत साइबर सुरक्षा में भी उपयोगी है. साथ ही ऐसा कोई फोन जिसमें संवेदनशील डेटा है, ये उसे बचाने का काम करती है.
मशीन लर्निंग बेस्ड वेब एप्लीकेशन फायरवॉल
जैसा कि नाम से जाहिर है, यह एक तरह कि दीवार यानी वॉल है. इसे पार करना बहुत हेव मुश्किल होता है, इसीलिए इसे फायरवॉल कहा जाता है. यह एक AI आधारित सुरक्षा दीवार है जो वेबसाइटों पर साइबर हमलों जैसे SQL इंजेक्शन, स्क्रिप्टिंग और बॉट हमलों को तुरंत पहचानकर रोकती है. यह बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सुरक्षा करता है.
इंडिया AI समिट में पेश की गई ये पहल दिखाती हैं कि भारतीय सेना एक सुरक्षित, नेटवर्क आधारित और AI से सशक्त व्यवस्था की ओर बढ़ रही है. ये सभी स्वदेशी तकनीकें रक्षा के साथ-साथ नागरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं.














