पैदल सेना और तोपखाने के बाद अब भारतीय सेना के बख्तरबंद रेजिमेंट भी अपनी अलग ड्रोन यूनिट बनाने जा रहे हैं. इन्हें शौर्य स्क्वाड्रन का नाम दिया गया है. इसका मकसद युद्धों में टैंकों की क्षमता बढ़ाना है. यह कदम पैदल सेना केअश्नि प्लाटून) और तोपखाने के शक्तिबाण रेजिमेंट बनाने के बाद उठाया गया है.
क्या है शौर्य स्क्वाड्रन?
शौर्य स्क्वाड्रन एक कंपनी स्तर की ड्रोन यूनिट है. उसे सीधे टैंकों के साथ फ्रंटलाइन पर काम करना है. एक आर्मर्ड कंपनी में करीब 10-12 टैंक और 100 से ज्यादा सैनिक होते हैं. इस स्तर पर ड्रोन होने से कमांडरों को तुरंत जानकारी और हमला करने की ताकत मिलेगी. वैसे हर स्क्वाड्रन में तीन तरह के ड्रोन होंगे. पहला निगरानी ड्रोन दूसरा हमला करने वाले ड्रोन और तीसरा कामिकाज़े ड्रोन . इनका काम होगा दूर तक देखना, गहराई में वार करना और लगातार निगरानी रखना. हर शौर्य स्क्वाड्रन में करीब 20-25 प्रशिक्षित जवान होंगे.
अभी क्यों जरूरत पड़ी?
सेना ने यह फैसला हाल के युद्धों से सबक लेकर लिया है. बीते दिनों अमेरिका -ईरान , रूस-यूक्रेन युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और गाजा संघर्ष जैसे युद्धों से समझ में आया कि अब सिर्फ टैंक, तोप और पैदल सेना से युद्ध नहीं जीता जा सकता. हर लड़ाई में ड्रोन अब बहुत जरूरी हो गए हैं. वे अब गेम चेंजर बन चुके हैं. जिसने मार्डन वॉर फेयर की दिशा ही बदल दी है. लिहाजाअब सेना ने तय किया है कि वह सिर्फ टैंक या आर्मर्ड व्हीकल पर निर्भर नही रहेंगे बल्कि ड्रोन से लैस होकर अपनी मारक क्षमता को और घातक बनायेंगे .
टैंक और ड्रोन की जोड़ी
ड्रोन और टैंक के बीच तालमेल से कमांडरों को दुश्मन की हर जानकारी तुरंत मिलेगी. उसकी लोकेशन, मूवमेंट और हथियारों की बेहतर ख़बर होगी. इससे ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित और असरदार होंगे. ड्रोन टैंकों से पहले आगे जाकर खतरे भी पहचानेंगे. सेना के सूत्रों के मुताबिक ये स्क्वाड्रन निगरानी और हमले दोनों काम करेंगे.
फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन भी शामिल होंगे.
ये दुश्मन के टैंक और सप्लाई सिस्टम पर हमला कर सकते हैं. हालांकि, यह योजना अभी शुरुआती चरण में है. इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा. सेना के सदर्न कमांड के व्हाइट टाइगर डिवीजन ने पहला शौर्य स्क्वाड्रन तैयार किया है . हाल ही में इसे झांसी के बाबीना फायरिंग रेंज में अमोग ज्वाला सैन्य अभ्यास के दौरान परखा गया. सेना के अनुसार शौर्य स्क्वाड्रन ने रियल टाइम निगरानी और सटीक हमले की क्षमता दिखाई है . फिलहाल भारतीय सेना के पास अभी 67 आर्मर्ड यूनिट हैं. इनमें करीब 5000 टैंक शामिल हैं. इनमें T-90 भीष्मा, T-72 अजेय और अर्जुन Mk1A टैंक शामिल हैं.इसके आने से अब टैंकों ताकत कई गुना बढ़ जाएगी .














