और घातक होने वाला है सेना का K9 वज्र, दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर भारत ने बना लिया दुश्मन के खिलाफ खास प्लान

K9 Vajra Cannon Indian Army: के-9 वज्र एक आधुनिक तोप है. इसे दुनिया की ताकतवर तोपों में गिना जाता हैं.यह दक्षिण कोरिया के के9 थंडर का भारतीय रूप है.इसे भारत में के9 वज्र-टी कहा जाता है.यह 155 एमएम की तोप है. इसकी मारक क्षमता करीब 50 किलोमीटर तक है.

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  • भारतीय सेना की के-9 वज्र तोप को और आधुनिक बनाने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ तकनीक साझा करने की योजना है
  • के-9 वज्र तोप 155 एमएम की सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी है जिसकी मारक क्षमता लगभग पचास किलोमीटर तक है
  • इस तोप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम और ड्रोन पहचान तकनीक जोड़ी जाएगी
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नई दिल्ली:

भारतीय सेना की तोप के- 9 वज्र को और खतरनाक बनाने की तैयारी चल रही है.इसमें दक्षिण कोरिया का सहयोग लिया जाना है. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के दौरान इस पर बात हुई है. विदेश मंत्रालय (सचिव) पूर्व पी कुमारन ने कहा कि है कि दक्षिण कोरिया भारत को के9 वज्र और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम दे चुका है. अब तक इसकी सप्लाई दो चरणों में पूरी हो चुकी है. अब तीसरे चरण पर बातचीत चल रही है.इस बार सिर्फ खरीद पर ध्यान नहीं है बल्कि तकनीक के ट्रांसफर पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

क्यों नाम दिया K-9 वज्र?

फिलहाल यह तोप पाकिस्तान और चीन से लगी सरहदों तक तैनात है. के-9 वज्र एक आधुनिक तोप है. इसे दुनिया की ताकतवर तोपों में गिना जाता हैं.यह दक्षिण कोरिया के के9 थंडर का भारतीय रूप है.इसे भारत में के9 वज्र-टी कहा जाता है.यह 155 एमएम की तोप है. इसकी मारक क्षमता करीब 50 किलोमीटर तक है.इसका वजन 50 टन है.यह तेजी से फायर कर सकती है. यह 15 संकेड में तीन गोले दाग सकती हैं. खास बात ये है कि ये सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टेलेरी गन हैं.इसका मतलब है इन तोपों को किसी ट्रक या किसी दूसरी तरह से खींचने की जरूरत नहीं होती  हैं. इसमें टैंक की तरह व्हील लगे होते हैं. यह खुद ही रेगिस्तान से लेकर पहाड़ी इलाके में दौड़ लगा सकते हैं.

तोप की खासियत क्या है?

इस तोप की खासियत इसकी तेज मूवमेंट है.यह फायर करने के बाद तुरंत जगह बदल सकती है.इससे दुश्मन के लिए इसे निशाना बनाना मुश्किल होता है.अब इस तोप को और आधुनिक बनाया जा रहा है. इनमें ऐसी नई तकनीक लगाई जाएगी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से काम करेगी.इस अपग्रेड में रिमोट कंट्रोल वेपन सिस्टम शामिल होगा, जो अपने आप ड्रोन को पहचान सकता है. उसका पीछा कर सकता है.जरूरत पड़ने पर उसे निशाना बना सकता है.इसके साथ ही इनमें जैमर और खास सेंसर भी जोड़े जाएंगे, जिससे ये दुश्मन के ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से बेहतर तरीके से निपट सकें.

भारत में कौन बनाता है के-9 वज्र?

इसे भारत में लार्सन एंड टुब्रो कंपनी बनाती है. इसका निर्माण गुजरात के हजीरा प्लांट में होता है.इसमें दक्षिण कोरिया की तकनीक का इस्तेमाल होता है.100 से ज्यादा वज्र तोपें सेना को पहले ही मिल चुकी हैं. पहले इसे रेगिस्तान के लिए तैयार किया गया था,लेकिन अब इसे लद्दाख जैसे ऊंचे और ठंडे इलाकों में भी तैनात किया गया है.यह माइनस 20 डिग्री तापमान में भी इसने अच्छा प्रदर्शन किया है.खासकर चीन से लगी पहाड़ी क्षेत्रों में  इस तरह के तोप काफी असरदार साबित हुई हैं.खबर है कि सेना के-9 की तादाद भी 100 से बढ़ाकर 200 करने जा रही है ताकि सीमा पार से मिलने वाली चुनौतियों का वह बखूबी सामना कर सके.

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इसके अलावा भारत और दक्षिण कोरिया नई तकनीक पर भी काम कर रहे हैं.दोनों देश मिलकर नया रक्षा सिस्टम विकसित करना चाहते हैं. इसमें को-डेवलपमेंट और को-डिजाइन शामिल हैं.यानी दोनों देश मिलकर नई तकनीक तैयार करेंगे.साथ ही एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल सिस्टम पर भी चर्चा हो रही है.एयर डिफेंस को और मजबूत करने की योजना है.टेलीकॉम और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ेगा.कुल मिलाकर यह साझेदारी भारत की रक्षा ताकत को नई ऊंचाई दे सकती है.आने वाले समय में सेना को और आधुनिक हथियार मिलेंगे.

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