- यूरेशिया ग्रुप के चीफ इयान ब्रेमर के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस वर्ष के पहले छह महीनों में संभव है.
- 2026 में अमेरिकी टैरिफ का भारत के लिए जोखिम कम होने की संभावना है और यह शीर्ष मुद्दों में नहीं रहेगा.
- भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अगस्त के बाद ठंडी पड़ गई क्योंकि अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाए थे.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता संभवतः इस साल के पहले छह महीनों में हो जाएगा, ये बात यूरेशिया ग्रुप के प्रमुख इयान ब्रेमर ने कही है. उन्होंने भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी के बारे में संकेत देते हुए कहा कि 2026 में भारत के लिए यह शीर्ष जोखिमों की सूची में भी शामिल नहीं होगा. इयान ब्रेमर ने कहा कि भले ही अमेरिकी टैरिफ 2025 में एक बड़ी खबर थी, वहीं 2026 में इसकी अहमियत कम हो जाएगी.
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एनडीटीवी के एडिटर-इन-चीफ और सीईओ राहुल कंवल के साथ एक खास इंटरव्यू में ब्रेमर से बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते की समय-सीमा के बारे में सवाल पूछा गया. जवाब में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस साल के पहले छह महीनों में हो जाएगा.
कब होगा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता?
बता दें कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर महीनों से बातचीत चल रही थी. लेकिन पिछले साल अगस्त में दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई भारी गिरावट के बाद से यह काफी धीमी हो गई है. वाशिंगटन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ इसलिए लगा दिया था, क्यों कि वह रूस से लगातार तेल खरीद रहा था. इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में गिरावट देखी जा रही है.
पीएम मोदी ने ट्रंप से आखिरी बार 11 दिसंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद बात की थी. दिसंबर के आखिर में अमेरिकी उप व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर की भारत यात्रा के बाद, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत अमेरिका के साथ बातचीत के उन्नत चरण पर है.
ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
मंगलवार सुबह राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं, लेकिन "वे मुझसे खुश नहीं हैं क्योंकि आप जानते हैं कि रूस से तेल का व्यापार न करने की वजह से उन्हें भारी टैरिफ देना पड़ रहा है, लेकिन अब उन्होंने इसे काफी हद तक कम कर दिया है.
बिजनेस डील को लेकर अनिश्चितता और अनुमानित समयसीमा की कमी नए वित्तीय वर्ष से पहले भारत के निर्यातकों पर दबाव बढ़ा रहा है. चमड़ा, रसायन, जूते, रत्न और आभूषण, वस्त्र और झींगा जैसे घरेलू निर्यात क्षेत्र अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. आने वाले दिनों में कुछ राहत की उम्मीद की जा रही है.














