10 साल पहले नहीं था बैंक खाता, अब कर रहे UPI पेमेंट... मेक्रों ने बताया कैसे बदल रहा भारत

मैक्रों ने कहा कि महज एक दशक पहले मुंबई का एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता भी नहीं खोल सकता था क्योंकि उसके पास स्थायी पता और कागजात नहीं थे.

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  • इमैनुएल मैक्रों ने दिल्ली के इंडिया इम्पैक्ट समिट में भारत के डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की प्रशंसा की
  • मैक्रों ने बताया कि 10 साल पहले एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता भी नहीं खोल सकता था लेकिन आज डिजिटल भुगतान करता है
  • भारत ने 1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल पहचान और हर महीने 20 बिलियन से अधिक ऑनलाइन लेनदेन का सिस्टम बनाया
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नई दिल्ली:

दिल्ली के भारत मंडपम में चल रही इंडिया इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन सत्र में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल बैंकिंग सिस्टम और यूपीआई की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ में AI क्रांति का नेतृत्व कर रहा है और उसकी डिजिटल उपलब्धियां दुनिया के लिए मिसाल हैं. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि आज से 10 साल पहले जहां लोगों के बैंक अकाउंट नहीं थे वहीं अब वो मोबाइल से डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं.

'हर कोई कर रहा डिजिटल पेमेंट'

मैक्रों ने कहा कि महज एक दशक पहले मुंबई का एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता भी नहीं खोल सकता था क्योंकि उसके पास स्थायी पता और कागजात नहीं थे. लेकिन आज वही स्ट्रीट वेंडर अपने फोन पर तुरंत, फ्री और देश के किसी भी व्यक्ति से डिजिटल भुगतान स्वीकार करता है. यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की कहानी नहीं, यह सभ्यता की कहानी है.'

UPI की तारीफ की

मैक्रों ने अपने संबोधन में भारत के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम की तारीफ करते हुए कहा, 'भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी और देश ने नहीं बनाया है। 1.4 बिलियन लोगों के लिए एक डिजिटल आइडेंटिटी। एक पेमेंट सिस्टम जो अब हर महीने 20 बिलियन ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करता है। इसके अलावा ऐसा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है जिसके तहत 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ ID जारी किए गए। यह समिट इसी बारे में है। हम एक नए दौर की शुरुआत में है।

'AI से कैसे बदल रहा भारत?'

मैक्रों ने कहा कि भारत AI के जरिए बदल रहा है. इसके तीन आयाम हैं- मॉडल, इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट. भारत हर साल लाखों AI इंजीनियरों को ट्रेन करता है. 500,000 इंजीनियरों के साथ, भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी डेवलपर कम्युनिटी है. यहीं पर भारतीय मॉडल सच में एक क्रांतिकारी है, जो देश में सभी के लिए समाधान देता है. ये AI मॉडल 200 मिलियन भारतीय किसानों को उनकी अपनी भाषा में सलाह देने से लेकर 400 मिलियन तीर्थयात्रियों को यात्रा सलाह देने का काम कर रहे हैं.

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