- बंगाल चुनाव के एग्जिट पोल में बीजेपी की सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है
- ममता बनर्जी की हार से तृणमूल कांग्रेस में बिखराव और नेताओं के बीजेपी में शामिल होने का खतरा बढ़ जाएगा
- ममता बनर्जी की जीत विपक्षी दलों के लिए मजबूती का संकेत होगी और वे देश में प्रमुख विपक्षी चेहरा बनेंगी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे तो 4 मई को आएंगे. लेकिन इससे पहले कई एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आए हैं, जिनमें बंगाल में बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है. अगर ये एग्जिट पोल सही साबित होते हैं, तो ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका होगा. ममता बनर्जी देश में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा है. अगरममता की हार पूरे विपक्ष की हार मानी जाएगी. तेजस्वी और अखिलेश यादव ने भी ममता के लिए प्रचार किया था. इसके अलावा केजरीवाल ने भी बंगाल में ममता का प्रचार किया. अगर ममता हारीं तो सबकी हार मानी जाएगी.
पार्टी को बचाना ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस पार्टी को बचाना ममता बनर्जी की बड़ी चुनौती होगी. हार से टीएमसी में बिखराव का खतरा बढ़ेगा. अगर ऐसा हुआ तो TMC के बड़े नेता बीजेपी में जा सकते हैं. उदाहरण के लिए 2011 में ममता ने लेफ्ट को हराया था. हार के बाद लेफ्ट के कई नेता TMC में आए थे. पार्टी में नए-पुराने नेताओं में टकराव का डर बढ़ जाएगा. चुनावी रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका थी. ऐसे में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सवाल उठेंगे. पार्टी लीडरशिप पर अभिषेक के दावे का असर होगा. इसलिए ममता बनर्जी आसानी से मैदान नहीं छोड़ेंगी. अगर सत्ता गई तो वो स्ट्रीट फाइटर मोड में लौटेंगी. बंगाल में हिंसा और टकराव बढ़ सकता है.
कमबैक से बढ़ेगा कद?
वहीं अगर ममता बनर्जी चुनाव जीत जाती हैं, तो वो विपक्ष का सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरेंगी. यह माना जाएगा कि तमाम कोशिशों के बाद भी BJP ममता का किला नहीं ढहा पाई. देश में मैसेज जाएगा कि भले ही देश में कई जगह बीजेपी जीत गई, बिहार में भी पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बन गया, बीजेपी ने अखिलेश, तेजस्वी, केजरीवाल को हरा दिया लेकिन पश्चिम बंगाल में बीजेपी ममता को नहीं हिला पाई. विपक्षी गठबंधन में उन्हें किंगमेकर की तरह देखा जाएगा. जीत के बाद ममता के चेहरे पर विपक्ष एकजुट हो सकता है. ममता की जीत देश में क्षेत्रीय दलों की मजबूती का संकेत होगा. संदेश जाएगा कि अकेली पार्टी भी BJP से लड़ सकती है. सपा, RJD और DMK जैसी पार्टियों का मनोबल बढ़ेगा.
हाल ही में ममता ने दिल्ली को लेकर भी संकेत दिया है. ममता ने कहा था कि मुझे कुर्सी नहीं चाहिए, मैं ऐसे ही केंद्र से लड़ूंगी. बंगाल में जीत, उनकी केंद्र की राजनीति के लिए लॉन्चपैड होगी. केंद्र में मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा गुट तैयार होगा.
क्या बंगाल होगा 'भगवामय'
अगर बीजेपी बंगाल जीत जाती है, तो यह इतिहास में पहला मौका होगा जब बंगाल भगवामय होगा. BJP की जीत भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ होगी. बंगाल में जीत, 2014 की जीत जैसी बड़ी उपलब्धी होगी. यह PM मोदी की लोकप्रियता और कद बढ़ने का सीधा संकेत माना जाएगा. बंगाल को वामपंथ और TMC का किला माना जाता रहा है. जीत हुई तो पहली बार बंगाल दक्षिणपंथी विचारधारा चुनेगा. ममता बनर्जी ने हमेशा से बीजेपी को बाहरी बताया है. यह जीत संकेत देगी कि बंगाल ने BJP को स्वीकार कर लिया है. हिंदी पट्टी के बाद बंगाल हिंदुत्व की राजनीति का नया केंद्र बनेगा. संदेश जाएगा कि अगर बीजेपी बंगाल जीत सकती है तो दक्षिण भी दूर नहीं.
बंपर वोटिंग क्या बताती है?
- उत्तर प्रदेश में 2012 के चुनाव में 13.40% वोटिंग बढ़ी. चुनाव नतीजे आए तो BSP की सत्ता चली गई और SP को सत्ता मिली.
- 2011 के पश्चिम बंगाल चुनाव में कुल वोटिंग में 2.36% का इजाफा हुआ. CPM की सत्ता गई और TMC को सत्ता मिल गई.
- 1982 में पश्चिम बंगाल के ही चुनाव में वोट 20.60% का इजाफा हुआ और CPM की सत्ता बरकरार.
- 2018 में मध्य प्रदेश के चुनाव में वोटिंग में 3.17% का इजाफा हुआ. BJP की सत्ता चली गई. कांग्रेस को सत्ता मिल गई.
- 2008 में त्रिपुरा चुनाव में 12.51% वोटिंग ज्यादा हुई. CPM की सत्ता बरकरार रही.
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बंगाल में बंपर वोटिंग का क्या मतलब है?
| वर्ष | राज्य | कुल वोटिंग (%) | पिछली बार से वोटिंग में बदलाव | चुनावी नतीजा |
|---|---|---|---|---|
| 2011 | पश्चिम बंगाल | 84.33% | +2.36% | CPM गई, TMC आई |
| 1982 | पश्चिम बंगाल | 76.80% | +20.60% | CPM की सत्ता बरकरार |
| 2016 | असम | 84.49% | +8.57% | कांग्रेस गई, BJP आई |
| 2013 | राजस्थान | 75.40% | +9.15% | कांग्रेस गई, BJP आई |
| 2018 | मध्य प्रदेश | 75.20% | +3.17% | BJP गई, कांग्रेस आई |
| 2003 | मध्य प्रदेश | 67.30% | +7.08% | कांग्रेस गई, BJP आई |
| 2012 | उत्तर प्रदेश | 59.40% | +13.40% | BSP गई, SP आई |
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