- भारतीय वायुसेना ने भारी वजन उठाने वाले हेलीकॉप्टरों की जरूरत को देखते हुए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी किया
- वायुसेना ड्राई लीज मॉडल पर तीन भारी हेलीकॉप्टर दो वर्षों के लिए लेना चाहती है, बाद में खरीद विकल्प होगा
- हेलीकॉप्टर को 20 टन वजन उठाने, 230 KM/H न्यूनतम गति और 5500M से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए
इंडियन एयरफोर्स को नए भारी हेलीकॉप्टरों की जरूरत है. इसी जरूरत को देखते हुए वायुसेना ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (RFI) जारी की है. मौजूदा ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार वायुसेना अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है और इसके लिए ऐसे हेलीकॉप्टर चाहती है जो ज्यादा वजन को उठा सकें और कम समय में ऑपरेशन के लिए तैयार हो सकें. जिसके लिए एयरफोर्स की तरफ से शुरुआत में तीन भारी हेलीकॉप्टर लिए जाएंगे, जिन्हें दो वर्षों के लिए लीज पर लिया जाएगा. बाद में इन्हें खरीदने का विकल्प भी मौजूद रहेगा.
वायुसेना इन हेलीकॉप्टरों को ड्राई लीज मॉडल पर लेना चाहती है. ड्राई लीज में हेलीकॉप्टर वेंडर से लिया जाता है, लेकिन उसे उड़ाने और ऑपरेट करने की पूरी जिम्मेदारी वायुसेना की होती है. इसके उलट वेट लीज में कंपनी का सपोर्ट भी शामिल होता है, जिससे हेलीकॉप्टर जल्दी मिल जाते हैं.
हेलीकॉप्टर के लिए पैमाने
एयरफोर्स को जिस हेलीकॉप्टर की जरूरत है, वह 20 टन तक वजन उठाने लायक होना चाहिए. इसे भारी हथियार और वाहन ले जाने में सक्षम होना होगा. हेलीकॉप्टर की न्यूनतम गति 230 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए और साथ ही यह 5500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भर सके. इसके अलावा हेलीकॉप्टर हिमालयी व पहाड़ी इलाकों में प्रभावी ढंग से काम कर सके. इसमें 45 सैनिकों को बैठाने या फिर 20 घायल सैनिकों को ले जाने की क्षमता होनी चाहिए.
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हर मौसम में ऑपरेशन
हेलीकॉप्टर को हर मौसम में उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए। साथ ही लो विजिबिलिटी की स्थिति में भी यह पूरी तरह कारगर रहे. सुरक्षा के लिहाज से हेलीकॉप्टर में रडार वार्निंग रिसीवर और मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम होना जरूरी होगा, ताकि दुश्मन के खतरे को पहले ही पहचाना जा सके. इसके अलावा इसमें काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम लगाया जाएगा, जो हमलों से बचाव में भी मददगार होगा. इसके सभी सिस्टम आपस में जुड़े होंगे, जिससे खतरे की स्थिति में तुरंत एक्टिव हुआ जा सकें. हेलीकॉप्टर में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम भी अनिवार्य होगा.
भारी लोड ले जाने की क्षमता
हेलीकॉप्टर अंदर और बाहर दोनों तरीकों से लोड ले जाने में काबिल होना चाहिए. यह करीब 10 टन वजन बाहर लटका कर ले जा सके. हेलीकॉप्टर की 95 प्रतिशत उपलब्धता जरूरी होगी और हर महीने तय घंटों तक उड़ान भरना जरूरी होगा. डील फाइनल होने के बाद 3 से 6 महीने के भीतर डिलीवरी दी जानी चाहिए. इससे साफ है कि वायुसेना को इन हेलीकॉप्टरों की जरूरत तुरंत है.
कहां होगा इस्तेमाल
इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल सीमा पर सप्लाई पहुंचाने, भारी सामान और वाहन ले जाने, आपदा राहत कार्यों, घायल सैनिकों को बाहर निकालने और कठिन इलाकों में सैनिकों की तैनाती के लिए किया जाएगा.
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क्यों है जरूरत
एयरफोर्स के पुराने हेलीकॉप्टर अब सीमित होते जा रहे हैं और नई ऑपरेशनल जरूरतों के लिए ज्यादा ताकत वाले प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है. इसी वजह से 20 टन क्षमता वाले हेलीकॉप्टर की मांग की गई है.
कौन हैं दावेदार
इस दौड़ में दो बड़े नाम शामिल हैं वो है बोइंग CH‑47 चिनूक और Mi‑26. Mi‑26 पहले भारत में इस्तेमाल हो चुका है, जिससे उसे अनुभव का फायदा मिलता है. वहीं चिनूक को भरोसेमंद माना जाता है और यह आधुनिक मानकों पर खरा उतरता है.
आगे क्या होगा
कंपनियां वायुसेना को अपनी जानकारी देंगी. इसके बाद RFP जारी किया जाएगा और फिर यह तय होगा कि किस हेलीकॉप्टर को चुना जाएगा. वैसे वायुसेना के पास पहले से कुछ हेवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर मौजूद हैं, लेकिन बढ़ती ऑपरेशनल जरूरतों को देखते हुए ऐसे नए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है. नई चुनौतियों का सामना करने के लिए वायुसेना को जल्द से जल्द भारी वजन उठाने में सक्षम हेलीकॉप्टर चाहिए.














