10 मिनट में डिलीवरी, इंसान हैं हम.... हैदराबाद में 25 साल के डिलीवरी बॉय की मौत पर गिग वर्कर्स का फूटा गुस्सा

हैदराबाद में एक ई कॉमर्स कंपनी के लिए काम करने वाले 25 वर्षीय डिलीवरी बॉय अभिषेक की सड़क हादसे में मौत हो गई. घटना के लिए यूनियनों ने "10 मिनट डिलीवरी" मॉडल को जिम्मेदार ठहराते हुए सुरक्षा और मुआवजे की मांग की है.

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  • हैदराबाद में 25 वर्षीय बीबीए छात्र और डिलीवरी पार्टनर अभिषेक की बाइक दुर्घटना में मौत हो गई
  • अभिषेक मेहदीपट्टनम के पास बाइक फिसलने के बाद पीछे से आ रही प्राइवेट बस की चपेट में आ गया
  • पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और गिग वर्कर्स को हेलमेट पहनने और सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील की है
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हैदराबाद:

हैदराबाद की सड़कों पर हुई एक दर्दनाक घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तेज़ डिलीवरी की दौड़ में इंसानी जान की कीमत कम हो गई है? 25 साल का अभिषेक, जो अपने परिवार का सहारा बनने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ डिलीवरी बॉय का काम कर रहा था, एक ऑर्डर समय पर पहुंचाने की जल्दबाज़ी में अपनी जान गंवा बैठा. उसकी बाइक फिसली, और पीछे से आ रही एक प्राइवेट बस ने उसे कुचल दिया. 

एक क्विक ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले 25 वर्षीय डिलीवरी पार्टनर की सोमवार देर रात मेहदीपट्टनम के पास सड़क हादसे में मौत हो गई. मृतक की पहचान के. अभिषेक के रूप में हुई है, जो शेखपेट का निवासी और बीबीए का अंतिम वर्ष का छात्र था. वह अपने परिवार का खर्च उठाने के लिए डिलीवरी का काम करता था.

कैसे हुआ हादसा?

मेहदीपट्टनम पुलिस के मुताबिक, अभिषेक टोलिचौकी की ओर एक ऑर्डर डिलीवर करने जा रहा था. इसी दौरान उसकी बाइक फिसल गई और पीछे से आ रही एक प्राइवेट ट्रैवल बस ने उसे कुचल दिया. मौके पर ही उसकी मौत हो गई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्ट में सामने आया है कि अभिषेक डिलीवरी पूरी करने की जल्दबाज़ी में था. पुलिस ने सभी गिग वर्कर्स से अपील की है कि वे हेलमेट पहनें और सुरक्षा को प्राथमिकता दें.

यूनियन ने मुआवजे की मांग की

इस घटना के बाद से गिग वर्कर यूनियन में आक्रोश देखने को मिल रहा है. तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने इस हादसे को "10 मिनट डिलीवरी मॉडल" का सीधा नतीजा बताया है. यूनियन के संस्थापक-प्रमुख शेख सलाउद्दीन ने NDTV से कहा कि  10 मिनट की डिलीवरी हमेशा समय पर शुरू होती है. 100 करोड़ के स्पीड प्रोजेक्ट समय पर शुरू होते हैं. लेकिन जब एक वर्कर सड़क पर मरता है, तो इंश्योरेंस और मुआवजा समय पर क्यों नहीं शुरू होता? वर्कर इंसान हैं, एल्गोरिद्म नहीं. यूनियन ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए तेलंगाना के श्रम मंत्री को पत्र लिखा है. जिसमें मांग की गयी है कि मांग की है कि

  • अभिषेक के परिवार को ₹5 लाख का एक्स-ग्रेशिया भुगतान किया जाए. 
  • सभी गिग वर्कर्स के लिए Workmen's Compensation Act लागू किया जाए. 
  • 10 मिनट डिलीवरी" जैसे खतरनाक टारगेट्स को तुरंत हटाया जाए. 

अभिषेक का पोस्टमार्टम उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल में हुआ और शव परिवार को सौंप दिया गया.  पुलिस अब बाइक की स्पीड और हादसे की सटीक परिस्थितियों की जांच कर रही है. 

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