क्या महिला आरक्षण बिल कराने के लिए क्या सरकार के पास दो तिहाई बहुमत है?

Women Reservation Amendment Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर बहस जारी है. इस बीच सरकार ने इसे लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. हालांकि, संसद के निचले सदन में नंबर गेम में सरकार बैकफुट पर है.

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संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल का क्या होगा?
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  • लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर बहस, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन
  • संसद के निचले सदन में सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं, फंसेगा पेच
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने इस बिल पर विपक्ष के सांसदों से भी मांगा है सहयोग
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नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपने भाषण के दौरान विपक्षी दलों से अपील की थी कि वो इस बिल का समर्थन करें ताकि महिलाओं को उनका हक मिल पाए. लेकिन सत्ता पक्ष के लिए सबसे बड़ा सवाल और मुश्किल ये है कि इस बिल को पास कराने के लिए उसके पास सदन में दो तिहाई बहुमत नहीं है. चूंकि ये संविधान संशोधन बिल है तो इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. सरकार नंबर गेम में काफी पीछे है. 

समझिए सरकार को कितने नंबर की जरूरत 

सरकार को सदन में महिला आरक्षण संशोधन बिल को पास कराने के लिए कुल दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. लोकसभा में मौजूद सांसदों के वोटिंग का दो तिहाई वोट इस बिल के पक्ष में पड़ना जरूरी है. अगर एनडीए अपनी पूरी ताकत झोंक दे तो उसके पक्ष में 310 सांसदों का समर्थन आ सकता है. वहीं, विपक्ष के पास करीब 200 सांसदों की संख्या है. इसका ये मतलब हुआ कि सरकार दो तिहाई बहुमत से काफी पीछे है. 

क्या है गणित समझिए 

अगर मान लें कि सदन में मौजूद सांसदों में से एनडीए के 310 सांसद हैं और विपक्ष को 200 सांसद, तो कुल नंबर होता है 510. ऐसे में दो तिहाई बहुमत के लिए एनडीए को कुल 340 सांसदों की जरूरत होगी. यानी सरकार के पास जरूरी नंबर नहीं हो पाएगा. विपक्ष के एक नेता ने दावा किया कि ऐसे में सरकार बिल को वापस ले सकती है. 

सरकार ने जारी कर दिया है नोटिफिकेशन 

केंद्र सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर जारी बहस के दौरान ही इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया. दरअसल, किसी भी कानून में बदलाव के लिए ये आवश्यक होता है कि उसे नोटिफाई किया जाए. अब सरकार जो संशोधन लाई है उसका असल में उद्देश्य ये है कि महिलाओं को आरक्षण 2011 की जनगणना के तहत ही परिसीमन किया जाए. ऐसे में 2029 से महिला आरक्षण बिल लागू हो सकता है. अगर मौजूदा जनगणना के बाद आरक्षण को लागू किया जाएगा तो इसमें परिसीमन में लंबा समय लग सकता है. ऐसे में आरक्षण 2034 तक टल सकता है. 

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