ओवैसी की पार्टी के चार विधायकों ने थामा राजद का दामन, क्या होगा इसका असर बिहार की सियासत पर?

बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को तगड़ा झटका लगा है. बिहार में अभी तक AIMIM पार्टी के पांच विधायक थे. अब इन पांच में से चार विधायकों ने राजद में शामिल होने का फैसला लिया है. AIMIM विधायकों के इस फैसले के बाद बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी हो गई है

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AIMIM के चार विधायकों के राजद में मिलने से अब विधानसभा में राजद सबसे बड़ी पार्टी हो गई है.
पटना:

बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस- ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को तगड़ा झटका लगा है. बिहार में अभी तक AIMIM पार्टी के पांच विधायक थे. अब इन पांच में से चार विधायकों ने राजद में शामिल होने का फैसला लिया है. AIMIM विधायकों के इस फैसले के बाद बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी हो गई है. जिन विधायकों ने राजद का दामन थामा है उनमें कोचाधामन के मुहम्मद इजहार अस्फी, जोकीहाट के शाहनबाज आलम, बायसी के रुकनुद्दीन अहमद और बहादुरगंज के अंजार नइमी हैं. एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने ओवैसी का साथ नहीं छोड़ा है. अब वो बिहार में AIMIM के इकलौते विधायक रह गए हैं.

बहरहाल, इस सियासी छटनाक्रम ने बिहार के सियासी आंकड़ों को बदल दिया है. इन चार विधायकों के आरजेडी में शामिल होने के बाद अब विधानसभा में आरजेडी विधायकों की संख्या 80 हो गयी है. लाजिमी है कि अब बिहार में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है. पहले 77 विधायकों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी थी अब आरजेडी सबसे सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है. इस तरह बिहार विधानसभा में अब राजद के 80, बीजेपी के 77 और नीतीश कुमार के 43 विधायक हो गए हैं.

बहरहाल , सियासी गलियारों में जो सवाल घूम रहा है वो यह है कि क्या सियासी आंकड़ों के बदलने से राज्य में सियासी समीकरण भी बदल जाएगा?  

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भाजपा के अधिकांश नेता मानते हैं कि एआईएमआईएम के चार विधायकों के टूट के पीछे मुख्य मंत्री नीतीश कुमार का हाथ है. ये बात जगजाहिर है कि नीतीश कुमार के भाजपा के साथ संबंध उतने मधुर नहीं रहे. बहरहाल इस उलटफेर के बाद यह तो तय हो गया कि अब भाजपा फिर से नम्बर दो के पोजिशन पर चली गई और राजद राज्य में नम्बर एक पर आ गई.

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बहरहाल, भाजपा अपना नम्बर वन पोजिशन बनाए रखने के लिए कोशिश जारी रखे हुए है. सूत्र कहते हैं कि भाजपा विधानसभा अध्यक्ष के जरिए राजद के कुछ सदस्यों को पिछले साल हुए हंगामा के जाँच के लिए बनी विधान सभा समिति की रिपोर्ट के आधार पर अयोग्य करार करवा सकती हैं. फिलहाल तो इतना जरूर कहा जा सकता है कि बिहार में अभी शह और मात का खेल जारी रहेगा.  

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AIMIM के चार विधायकों के राजद में शामिल होने से सीमांचल की राजनीति में भी बदलाव देखने को मिलेगी. पिछले चुनाव में ओवैसी की पार्टी की वजह से मुस्लिम बहुल सीमांचल में अल्पसंख्यक वोट में जबरदस्त बिखराव देखने को मिला था. और वोटों के इस विभाजन से भाजपा काफी खुश थी. लेकिन बदले हुए माहौल में अब राजद इन विधायकों के बदौलत एक बार फिर सीमांचल में अपनी पकड़ मज़बूत करने में कामयाब रहेगी जो भाजपा के लिए झटका ही साबित होगा.

यहां ये बताना जरूरी है कि पिछले चुनावों में AIMIM ने बिहार में औऱ वो भी मुस्लिम-बहुल सीमांचल में पहली बार अपनी दमदार मौजूदगी का एहसास करवाया था. सीमांचल के 24 सीटों पर महागठबंधन के जीतने की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन इन 24 में पांच सीटों पर AIMIM ने कब्जा जमा कर महागठबंधन को अच्छा खासा झटका दिया था. इसके अलावा कई सीटें ऐसी भी थी, जहां AIMIM के चलते RJD नीत महागठबंधन को बड़ा घाटा हुआ था और करीब 11 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था.

हालांकि, इस टूट का असर नीतीश सरकार पर फिलहाल नहीं पड़ेगा. राज्य में सरकार बनाने के लिए 122 का जादुई आंकड़ा चाहिए. अभी NDA के पास 127 विधायक हैं. बीजेपी के 77 और जदयु के 45 विधायक मिलकर ही 122 हो जाते हैं. जीतनराम मांझी की पार्टी HAM के 4 और एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन है, अगर वह वापस भी ले लेते हैं तो भी सरकार पूरी तरह सुरक्षित है.

शायद इसी परिस्थिति को भांपते हुए आज एक संवादादता सम्मेलन में राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा,” इन विधायकों के आने से महागठबंधन और मजबूत होगा. सरकार बनाने के लिए 122 की जरूरत है. महागठबंधन के 116 हो गए. छह विधायक कम हैं, लेकिन हम लोग सत्ता के भूखे नहीं हैं.”

बहरहाल, आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का क्या रूख़ होगा.... अभी कहना मुश्किल होगा. लेकिन इतना जरूर है कि जोड़-तोड़ की इस राजनीति में तेजस्वी यादव निस्संदेह मजबूत हुए हैं. लेकिन लोगों की नज़र इस पटकथा के लेखक नीतीश कुमार पर टिकी हुई है जो पिछले कुछ दिनों से भाजपा के साथ खुश नजर नहीं आ रहे हैं.

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