वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी के 'एटम बम' का संसद में अमित शाह ने दिया जवाब

SIR चुनाव पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जवाब दिया. अमित शाह ने राहुल गांधी के उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस ने आरोप लगाया था कि हरियाणा में एक ही घर से 501 वोट पड़े.

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  • शाह ने लोकसभा में राहुल गांधी के हरियाणा के एक घर से 501 वोट मिलने के आरोप का चुनाव आयोग के हवाले से जवाब दिया
  • अमित शाह ने बताया कि जिस घर की बात की गई वह एक एकड़ का पुश्तैनी प्लॉट है जिसमें कई परिवार एक साथ रहते हैं
  • शाह ने बताया कि घर के अलग-अलग परिवारों के घरों का अलग नंबर न होने के कारण सभी वोट एक ही नंबर पर दर्ज हैं
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नई दिल्ली: SIR चुनाव पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जवाब दिया. अमित शाह ने राहुल गांधी के उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें नेता प्रतिपक्ष ने एटम बम बताते हुए आरोप लगाया था कि हरियाणा में एक ही घर से 501 वोट पड़े. अमित शाह ने चुनाव आयोग के हवाले से बताया कि जिस घर की राहुल गांधी बात कर रहे हैं वह बहुत बड़ा घर है, और वहां बहुत सारे परिवार रहते हैं.

राहुल गांधी का 'परमाणु बम' और शाह का जवाब

अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत में 5 नवंबर 2025 को राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप को तंज कसते हुए परमाणु बम बताया. अमित शाह ने कहा , "विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 5 नवंबर 2025 को एक परमाणु बम फोड़ा था. परमाणु बम के अंदर उन्होंने कहा कि हरियाणा में एक ही घर में 501 वोट पड़े. बाद में चुनाव आयोग ने साफ किया कि जिस हाउस 265 की बात राहुल गांधी कर रहे हैं, वह कोई छोटा मकान नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घर एक एकड़ का पुश्तैनी प्लॉट है, जिसमें अनेक परिवार एक साथ निवास कर रहे हैं. चूंकि हर परिवार के घर का अलग नंबर नहीं दिया गया है, इसलिए सभी जगह हाउस नंबर 501 एक ही है. उन्होंने यह भी बताया कि एक परिवार की तो तीन पीढ़ियां साथ में थीं, जो एक ही नंबर पर दर्ज हैं. शाह ने विपक्ष को याद दिलाया कि जब पुराने नंबर से हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चुनी गई थी, तब से ही ये नंबर इसी तरह चला आ रहा है .अमित शाह ने जोर देकर कहा, "ये न कोई फर्जी गढ़ है न कोई फर्जी वोटर. वोट चोरी का नैरेटिव के लिए है." 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मतदाता पंजीकरण पर स्पष्टीकरण

गृह मंत्री ने मतदाता पंजीकरण की कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए 1995 के एक ऐतिहासिक न्यायिक निर्णय का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, "1995 में लालबाबू हुसैन बनाम मतदाता रजिस्ट्रेशन ऑफिसर का जजमेंट आया. उसमें अदालत ने साफ कहा कि जहां मतदाता का नाम दर्ज किया जाना है, वहां रिटर्निंग ऑफिसर ये सुनिश्चित कर सकता है कि आवेदक भारत का नागरिक है या नहीं." शाह ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उनका या सरकार का नहीं है, बल्कि भारत की सर्वोच्च अदालत का है और हम सब इससे बंधे हुए हैं.

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