- सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है
- सर्वोच्च अदालत ने हरीश राणा के माता-पिता की सराहना की है
- शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हरीश के माता-पिता ने उसे उसके मुश्किल वक्त में भी नहीं छोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 13 साल से बिस्तर पर अचेत पड़े हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है. हरीश के माता पिता ने अपने इसको लेकर सर्वोच्च अदालत में याचिका दाखिल की थी. इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरीश के माता-पिता की भी सराहना की. कोर्ट ने कहा कि किसी से प्यार करने का मतलब है सबसे बुरे समय में भी उनकी देखभाल करना.
'आपने बेटे को मुश्किल वक्त में भी नहीं छोड़ा'
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने ये फैसला सुनाया. जस्टिस पारदीवाला ने अपना ओपिनियन लिखते हुए हरीश के माता-पिता की सराहना की. उन्होंने कहा कि हरीश के माता-पिता का उनके बेटे के प्रति प्यार सराहना के लायक है. कोर्ट ने कहा कि हरीश के परिवार ने कभी अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा. परिवार ने हरीश के सबसे मुश्किल दिनों में भी उसके साथ मजबूती के साथ खड़ा रहा.
एम्स को दिया आदेश
कोर्ट ने इसके बाद हरीश राणा की इच्छामृत्यु के लिए निर्देश भी दिए. कोर्ट ने एम्स दिल्ली को हरीश राणा को पैलिएटिव केयर में एडमिशन करने के लिए आदेश दिया. ताकि हरीश का Clinically Administered Nutrition (CAN) हटाया जा सके.
छत से गिर गए थे हरीश
गौरतलब है कि हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे. स्कूल के दिनों से ही उन्हें बॉडीबिल्डिंग का जुनून था. वह अपनी फिटनेस और भविष्य को लेकर काफी गंभीर थे. लेकिन 20 अगस्त 2013 की उस तारीख ने सब कुछ बदल दिया. हरीश अपने पीजी (PG) की चौथी मंजिल से अचानक नीचे गिर गए.
पढ़ें, सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार जिस हरीश राणा को दी इच्छामृत्यु की इजाजत, क्या है उसकी कहानी?














