- सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दी है, जो भारत का पहला मामला है.
- हरीश राणा 13 वर्षों से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे और एम्स में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे.
- सोशल मीडिया पर हरीश का एक 22 सेकंड का वीडियो वायरल हुआ है जिसमें ब्रह्मकुमारी की एक दीदी टीका लगाती हैं.
Harish Rana Video: ‘सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ...ठीक है…' भारत में इच्छामृत्यु के पहले केस वाले हरीश राणा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो रही हैं. दरअसल हरीश को अब दुनिया से विदा किया जा रहा है. 13 साल से जिंदा लाश बनकर जी रहे हरीश को गाजियाबाद से एम्स लाया जा चुका है. जहां अब उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटा दिया जाएगा. इस बीच हरीश राणा का एक वीडियो सामने आया है. जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वायरल वीडियो में ब्रह्मकुमारी की एक दीदी हरीश के माथे पर टीका लगाते नजर आ रही है. इस दौरान वो यह कहती सुनाई पड़ रही है- ‘सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ...ठीक है…'
22 सेकेंड का वीडियो, हरीश की आंखें करती है कुछ इशारा
सोशल मीडिया पर सामने आए इस 22 सेकेंड के वीडियो ने हर किसी की आखें नम कर दी है. इस वीडियो में ब्रह्मकुमारी परिवार की एक दीदी लवली हरीश के माथे पर टीका लगाती है. वायरल वीडियो में यह नजर आता है कि लवली के स्पर्श से हरीश की आखें कुछ इशारा करती है. होठ भी कंपकपाता है. गले से कुछ निगलने जैसा नजर आता है. हरीश की विदाई का यह मार्मिक वीडियो देख लोग भावुक हो रहे हैं.
11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की इजाजत दी
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश राणा की इच्छामृत्यु की इजाजत दी है. उनका परिवार ब्रह्मकुमारी समाज से जुड़ा है. जब हरीश को उनके गाजियाबाद स्थित घर से एम्स के लिए ले जाया गया तो माता-पिता, भाई सहित वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम थी. पिता अशोक ने परिवार के सभी सदस्यों से माफी मांगी. बोले- न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ा है.
एक हादसे ने बदल दी हरीश की जिंदगी
बता दें कि हरीश राणा एक होनहार इंजीनियरिंग छात्र था. एक भयानक हादसे के बाद वह ऐसी हालत में पहुंचा जहां वह न बोल सकता था, न चल सकता था और न ही अपने आसपास की दुनिया को समझ पा रहा था. डॉक्टरों की भाषा में इसे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट कहा जाता है. 13 साल तक मशीनों और मेडिकल सपोर्ट के सहारे जिंदा रहे हरीश को अब सुप्रीम कोर्ट की इजाजत पर इच्छामृत्यु दी जाएगी. यह भारत में इच्छामृत्यु का पहला केस है.
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