"इसे परिभाषित कर पाना मुश्किल": भारत-अमेरिका संबंधों पर एस जयशंकर

एस जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका का रिश्ता (India US Relationship) हर तरह से अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा है. यही वजह है कि आज हम इसे परिभाषित करने की कोशिश भी नहीं करते हैं.

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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने आज कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों (India US Relationship) पर कोई लिमिट लगाना मुश्किल है. दोनों देश अब एक-दूसरे को डिजायरेवल, सर्वोत्तम और कंफर्टेबल साझेदार के रूप में देखते हैं. एस जयशंकर ने ये बात वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में कही. उन्होंने कहा कि अक्सर उनसे पूछा जाता है कि भारत-अमेरिका का रिश्ता कहां जा रहा है? इस बारे में उनकी क्या राय है. जयशंकर ने कहा कि इसका जवाब यह है कि वास्तव में आज दोनों देशों के रिश्तों पर कोई लिमिट लगाना मुश्किल है. दोनों के रिश्तों को परिभाषित करना, यहां तक ​​कि अपेक्षाओं को व्यक्त करने के लिए भी लिमिट नहीं लगाई जा सकती. 

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'भारत-US संबंध अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा'

एस जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका का रिश्ता हर तरह से अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा है. यही वजह है कि आज हम इसे परिभाषित करने की कोशिश भी नहीं करते हैं. दोनों का रिश्ता इससे बहुत ऊपर है. बता दें कि भारत के विदेश मंत्री इस दिनों अमेरिका दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों, अमेरिकी व्यापारिक नेताओं और थिंक टैंक विशेषज्ञों के साथ बैठकें कीं. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका को एक साथ काम करने की  बहुत जरूरत है. अनेरिका के बारे में अच्छा सोचने वाले साझेदारों का होना वाशिंगटन के हित में है.

'भारत-US एक दूसरे के कंफर्टेबल साझेदार'

एस जयशंकर ने कहा कि हम नए डोमेन ढूंढते रहते हैं. एक दूसरे के साथ हम जितना काम करते हैं उससे ज्यादा पाते हैं. हम एक साथ काम करने, एक साथ खोज करने और एक साथ हासिल करने में सक्षम हैं. एस जयशंकर ने कहा कि बदलती हुई दुनिया में भारत और अमेरिका उस स्थिति में आ गए हैं, जहां दोनों देश वास्तव में एक-दूसरे को बहुत डिजायरेवल, सर्वोत्तम और कंफर्टेबल साझेदार के रूप में देखते हैं.  इसलिए दोनों देशों के रिश्ते की केमिस्ट्री और सहजता से वह संभावनाएं तलाशने के लिए आशावान रहते हैं. 

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