नोए़डा में कालिंदी कुंज बॉर्डर पर 684 करोड़ से बनेगी 31 मंजिला इमारत, बड़े इवेंट के लिए दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा

Noida News: नोएडा-दिल्ली के कालिंदी कुंज बॉर्डर पर नोएडा अथॉरिटी ने हैबिटेट सेंटर का रास्ता साफ कर दिया है. इससे किसी बड़ी आयोजन के लिए दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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Habitat Centre in Noida (Symbolic Photo)
नोएडा:

नोएडा अथॉरिटी ने 684 करोड़ रुपये के हैबिटेट सेंटर प्रोजेक्ट का रास्ता साफ कर दिया है. उसने एजेंसी के चुनाव के लिए टेंडर मांगे हैं. 31 मंजिला इमारत का निर्माण कार्य पहले छह साल पहले शुरू होना था, लेकिन फिर कोरोना काल में ये अटक गया. नोएडा में हैबिटेट सेंटर बनने से सम्मेलन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक खास जगह बनाना है, इसके लिए दिल्ली न जाना पड़े. शहर की बढ़ती आबादी के साथ यहां भी इवेंट लगातार बढ़ रहे हैं. नोएडा एयरपोर्ट शुरू होने के बाद अब यहां देसी-विदेशी कंपनियों को आयोजनों का बड़ा मौका मिलेगा.

नोएडा प्राधिकरण ने बुधवार को सेक्टर 94 में लंबित हैबिटेट सेंटर प्रोजेक्ट के लिए एजेंसी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है. पहले फंडिंग और अन्य समस्याओं के कारण ये प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका. अथॉरिटी ने एक ईओआई जारी किया है. 

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर कालिंदी कुंज के पास 684 करोड़ रुपये की ये परियोजना बनाई जानी है. कोरोना काल के कारण और फंडिंग की वजह से इसमें देरी हुई. दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की तरह नोएडा में सेक्टर 94 में 97 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में हैबिटेट सेंटर की परियोजना का खाका बनाया है. इसमें ऑडिटोरियम, आर्ट गैलरी, ओपन एयर थिएटर और फूड कोर्ट होगा, जो ओखला पक्षी विहार मेट्रो स्टेशन से जुड़ा होगा. यहां पार्किंग सुविधा भी रहेगी.

शहर में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और कला प्रदर्शनी, थिएटर, सेमिनार और पैनल चर्चा के लिए यह बड़ा मंच बनेगा. इसी के हैबिटेट सेंटर बनाया जा रहा है. यह परियोजना डिजाइन, निर्माण, फंडिंग, संचालन और हस्तांतरण के तहत पीपीपी मॉडल पर आगे बढ़ेगी. मास्टर प्लान 2031 में सेक्टर 94 में नोएडा हैबिटेट सेंटर के विकास का ब्योरा दिया गया है. एजेंसी इस योजना के प्रावधानों के अनुसार इसका विकास करेगी.

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एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मंजिला इमारत का निर्माण कार्य 2020 में शुरू होना था, तब कई एजेंसियों ने परियोजना के लिए आवेदन किया था. लेकिन बाद में कोई भी कंपनी इसके लिए पात्र नहीं पाई गई. 2021 में नोएडा ने उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड (UPRNL) को टेंडर की जिम्मेदारी सौंपी थी. अगस्त 2022 तक धीमी प्रगति हुई. इसके बाद टेंडर रद्द कर दिया गया, क्योंकि कंपनी ने अनुबंध एक तीसरी पार्टी को आगे ठेका दे दिया था.

नए ईओआई डॉक्यूमेंट के अनुसार, आवेदकों की सिंगल कंपनी होनी चाहिए, क्योंकि कंसोर्टियम (समूह) की अनुमति नहीं है. एजेंसी का पिछले पांच सालों में न्यूनतम औसत सालाना कारोबार 1500 करोड़ और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2000 करोड़ होना चाहिए. प्री बिड बैठक 21 अप्रैल को होनी है, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 15 मई 2026 है.

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