- कांग्रेस पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलने को लेकर निर्णय नहीं ले पा रही है और सही उम्मीदवार चुनने में असमंजस है
- कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब में सबसे लोकप्रिय और नेता के रूप में उभरे हैं
- कांग्रेस संगठन में कई राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों में बड़े बदलाव किए जाने की योजना बनाई जा रही है
कांग्रेस में पंजाब को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है, जबकि अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव की समिति ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप दी है. यही नहीं इस रिपोर्ट के जमा करने के बाद राहुल गांधी ने पंजाब के पांच नेताओं से मुलाकात भी कर ली है. अटकलें तभी से लग रही थीं कि एक दो दिनों में फैसला हो जाएगा, लेकिन कई दिन निकल गए हैं मामला अटका हुआ है.
दो सवालों के जवाब नहीं ढूंढ पा रही कांग्रेस
कांग्रेस में दिल्ली और पंजाब के कई नेताओं से बातचीत करके यह पता चल रहा है कि कांग्रेस आलाकमान यह नहीं तय कर पा रही है कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलना चाहिए या नहीं,और यदि बदलना है तो किसे बनाया जाए? कांग्रेस आलाकमान इन दोनों सवालों का उत्तर नहीं ढूंढ पा रही है. कांग्रेस यदि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग को हटाती तो क्या एक और जट सिख लेकर आना पड़ेगा या फिर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को फिर कमान सौंपी जाएगी.
पंजाब में कांग्रेस चेहरों में चन्नी सबसे आगे
कांग्रेस के अपने आंतरिक सर्वे में चरणजीत सिंह चन्नी सबसे आगे चल रहे हैं. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बाद अभी चन्नी ही सबसे लोकप्रिय नेता हैं. इसकी वजह ये भी है कि वो पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. मगर यहां पर यह दलील दी जाती है कि चन्नी पिछली बार भी मुख्यमंत्री थे मगर अगले चुनाव में कांग्रेस तो हारी ही, वो भी अपनी सीट हार गए थे. इसके जवाब में चन्नी समर्थक नेताओं का कहना है कि सीट तो सिद्धू और पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौल भट्टल भी हार गई थीं. उस वक्त नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने चन्नी की खिलाफत की थी और उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर सफल नहीं होने दिया था.
कांग्रेसी ये भी कहते हैं कि आलाकमान अंबिका सोनी को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था मगर उनके इनकार करने के बाद ही चन्नी को लाया गया था. कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी की वही स्थिति आज भी है जो 2022 में थी. तब चन्नी, सिद्धू और सुनील जाखड़ थे. वहीं अब चन्नी, राजा वाडिंग, रंधावा और वाजबा हैं. कांग्रेस आलाकमान के पास पंजाब के तीनों खित्ते मालवा,माझा और दोआब के बीच संतुलन भी रखना है. पंजाब की 117 में से 69 सीट मालवा से आती हैं. तो माना जाता है कि मुख्यमंत्री का चेहरा भी वहीं से आना चाहिए. इन्हीं सब दुविधा की वजह से कांग्रेस आलाकमान अभी तक पंजाब के बारे में कोई फैसला नहीं ले पाए हैं. वैसे पंजाब में विजय इंदर सिंगला के नाम की भी बहुत चर्चा है. ये संगरूर से सांसद रह चुके हैं और 10 जनपथ के करीबी बताए जाते हैं.
कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव करने की तैयारी
पंजाब के अलावा कांग्रेस आलाकमान को संगठन में बड़े बदलाव करने हैं. खासकर कई राज्यों के प्रभारी नियुक्त होने हैं जैसे असम के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह इस्तीफा दे चुके है. तमिलनाडु के प्रभारी गिरीश चोडनकर गोवा कांग्रेस के अध्यक्ष बन चुके हैं. हरियाणा के प्रभारी बी के हरिप्रसाद कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष बन चुके हैं. महाराष्ट्र के प्रभारी रमेश चेन्निथला केरल में मंत्री बन चुके हैं. इन सभी जगह नए चेहरों को लाना होगा.
जहां तक प्रदेश अध्यक्षों की बात है यदि पंजाब में अध्यक्ष बदले जाते हैं तो राजस्थान में भी बदलाव होगा क्योंकि गोविंद सिंह डोटासरा का कार्यकाल पूरा हो चुका है. छत्तीसगढ़ में भी प्रदेश अध्यक्ष बदलने की बात है, बिहार चुनाव में कांग्रेस की हालत देखने के बाद वहां भी नया अध्यक्ष बनाने की बात चल रही है. वहीं उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नया अध्यक्ष नियुक्त करने की बात हो रही है. इसी तरह गुजरात में भी अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं उसके लिए वहां भी नए अध्यक्ष के नाम पर चर्चा चल रही है. हिमाचल में भी अगले साल चुनाव है जिस तरह वहां से स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे आए हैं वहां भी नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात चल रही है.
कांग्रेस पार्टी में बड़े पैमाने पर सचिवों में बदलाव होने वाले हैं. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी महासचिवों के साथ बैठक करके उनसे सचिवों के कामकाज का फीडबैक लिया है.कांग्रेस में फिलहाल 60 सचिव हैं, जिनमें से अधिकांश की छुट्टी तय है.
कुल मिलाकर कहा जाए तो राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे पूरे कांग्रेस संगठन में बुनियादी बदलाव करने जा रहे हैं. क्योंकि अगले दो सालों में 16 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं जाहिर है कांग्रेस को इसके लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी.
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