पंजाब से दिल्ली और गोवा से गुजरात तक, AAP में टूट से BJP के दोनों हाथों में लड्डू

बीजेपी नेताओं के अनुसार आप के 7 सांसदों के पाला बदलने का पंजाब, दिल्ली, गोवा और गुजरात के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी असर होगा. राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़ कर 113 हो रही है और एनडीए 150 के नजदीक पहुंच रहा है. इससे मोदी सरकार को महत्वपूर्ण बिलों को ऊपरी सदन में पारित कराने में आसानी हो जाएगी.

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आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के पाला बदल कर बीजेपी में शामिल होने के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली और गोवा से लेकर गुजरात तक राजनीति गर्म है. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार बीजेपी ने दरअसल एक तीर से कई निशाने साधे हैं. अब नजर इस बात पर भी है क्या राज्यसभा सांसद टूटने के बाद आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद और पंजाब तथा दिल्ली के विधायक भी टूटेंगे?

आम आदमी पार्टी को यह चिंता लंबे समय से सता रही है. यही कारण है कि पार्टी के नेता बार-बार आरोप लगा रहे थे कि बीजेपी ऑपरेशन लोटस को अंजाम देकर आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहती है. शुक्रवार के घटनाक्रम के दूरगामी परिणामों से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि बीजेपी की नजरें पंजाब के साथ ही गुजरात और गोवा के विधानसभा चुनावों पर भी है.

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बंगाल पर थी निगाहें, दिल्ली में हो गया खेला

जहां एक ओर सभी राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान पश्चिम बंगाल की ओर था, वहीं बीजेपी ने अपने चिरपरिचित गुरिल्ला युद्धशैली का परिचय देते हुए अगले चुनाव की तैयारियों को अंजाम दिया है. एक ऐसे समय जब गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता में 27 अप्रैल तक डेरा डाल कर वहां की चुनावी तैयारियों की कमान अपने हाथ में ले चुके हैं, उनके मार्गदर्शन में बीजेपी की तीसरी पीढ़ी के नेताओं ने राजधानी दिल्ली में एक ऐसे घटनाक्रम को अंजाम दिया जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी.

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राघव के आने की खबर से खुश नहीं थी स्वाति मालीवाल

सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने आम आदमी पार्टी में इस बड़ी सेंध की तैयारी काफी पहले ही शुरू कर दी थी. स्वाति मालीवाल लंबे समय से बीजेपी नेतृत्व के संपर्क में थीं. दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुल कर बीजेपी का साथ भी दिया था. वहीं राघव चड्ढा पर भी बीजेपी की नजरें थीं क्योंकि उनके हाव-भाव और सार्वजनिक व्यवहार से यह संकेत मिल रहा था कि वे आम आदमी पार्टी के नेतृत्व से खुश नहीं हैं. हालांकि राघव की बीजेपी से करीबी स्वाति मालीवाल को रास नहीं आ रही थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि शायद राघव को अधिक महत्व मिलेगा. परंतु राज्यसभा संसदीय दल में टूट के लिए जरूरी सात सांसदों की संख्या पूरी करने के लिए उन्हें आपस में तालमेल रखने को कहा गया. 

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संदीप पाठक का आना क्यों है खास

बीजेपी के लिए सबसे बड़ा कैच संदीप पाठक का है. वे संगठन महासचिव के अतिमहत्वपूर्ण पद पर हैं. पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने राघव चड्ढा के साथ मिल कर करीब-करीब सारे टिकट बांटे थे. पंजाब के हर विधायक से उनका सीधा संपर्क है. वे इस बात से नाराज थे कि पंजाब में उनकी भूमिका सीमित कर सारे सूत्र मनीष सिसोदिया के हाथों में दे दिए गए थे. अन्य चार सांसदों में से अशोक मित्तल ईडी के छापों के बाद दबाव में आ गए थे. जबकि विक्रमजीत सहनी सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री मोदी के प्रशंसक रहे हैं. हरभजन सिंह खुल कर कह चुके थे कि वे अयोध्या में राम मंदिर कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. बतौर राज्यसभा सांसद उन्होंने राजनीति के बजाए खेलों से जुड़े मुद्दों को तरजीह दी. वहीं अरबपति कारोबारी राजिंदर गुप्ता खुद को राजनीति से दूर रखे हुए थे. उन्होंने पार्टी के विरोध के बावजूद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का समर्थन किया था.

बीजेपी नेताओं के अनुसार आगे की रणनीति स्पष्ट है. बीजेपी राघव चड्ढा और संदीप पाठक का इस्तेमाल पंजाब में आम आदमी पार्टी को कमजोर करने में करेगी. राघव चड्ढा एक जमाने में पंजाब के सुपर सीएम कहे जाते थे. पंजाब और गोवा में अगले साल फरवरी में चुनाव होने हैं. यानी चुनाव में मुश्किल से सात-आठ महीने बचे हैं. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायकों में भगदड मचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. वैसे विधायक दल में टूट असंभव है क्योंकि इसके लिए 61 विधायक चाहिए जो किसी भी हालत में मुमकिन नहीं दिखते. इसी तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 22 विधायक हैं. तोड़ने के लिए 15 विधायकों की जरूरत होगी.

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पंजाब पर BJP की निगाहें

बीजेपी का कहना है कि फिलहाल कोशिश पंजाब में पार्टी का जनाधार बढ़ाने की है. बीजेपी के पास अभी केवल 2 विधायक हैं. उसे पिछले विधानसभा चुनाव में केवल साढ़े छह प्रतिशत वोट मिले थे. 2024 लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत बढ़ कर साढ़े अठारह हो गया था लेकिन वह कोई सीट नहीं जीत सकी थी. बीजेपी ने तय किया है कि इस बार भी वह अकेले ही चुनाव लड़ेगी. पार्टी नेताओं ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन करने से साफ इनकार किया है. पार्टी की रणनीति यह है कि राघव चड्ढा को शहरी और रवनीत बिट्टू को ग्रामीण क्षेत्रों में चेहरे के तौर पर पेश किया जाए. बीजेपी चड्ढा और संदीप पाठक के जरिए आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायकों पर डोरे डालेगी और चुनाव के समय उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश भी करेगी. यही कारण है कि पंजाब और दिल्ली से जुड़े इन सात राज्य सभा सांसदों के पाला बदलने से बीजेपी को पंजाब में बड़ा बूस्ट मिला है.

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गुजरात निकाय चुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका

गुजरात में स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए कल होने वाले मतदान से ठीक पहले आम आदमी पार्टी को लगा यह झटका महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 15 नगर निगम, 84 नगरपालिकाओं और 34 जिला पंचायतों के लिए होने वाले चुनावों में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला है. आम आदमी पार्टी इसे 2027 का सेमीफाइनल कह रही है. चुनाव में अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत सिंह मान ने चुनाव प्रचार भी किया. 2021 में सूरत नगर निगम में आप ने 27 सीटें जीत कर सबको चौंका दिया था. वह अपना प्रदर्शन दोहराने की कोशिश में है. दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में उसकी बढ़ती ताकत बीजेपी के लिए परेशानी का सबब है. वहीं गोवा में पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दो सीटें जीतीं थीं और उसे 6.77 प्रतिशत वोट मिले थे. आप ने दक्षिण गोवा में ईसाई बहुल और तटीय क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाई है. पिछले लोक सभा चुनाव में आप ने कांग्रेस का समर्थन किया और इंडिया गठबंधन ने दक्षिण गोवा लोक सभा सीट जीती थी.

बीजेपी नेताओं के अनुसार आप के 7 सांसदों के पाला बदलने का पंजाब, दिल्ली, गोवा और गुजरात के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी असर होगा. राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़ कर 113 हो रही है और एनडीए 150 के नजदीक पहुंच रहा है. इससे मोदी सरकार को महत्वपूर्ण बिलों को ऊपरी सदन में पारित कराने में आसानी हो जाएगी. इस तरह बीजेपी के लिए यह एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. यह जरूर है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बीजेपी को सफाई देने की जरूरत होगी क्योंकि उस पर वॉशिंग मशीन के रूप में भ्रष्टाचार के दाग धोने का आरोप लगाया जाता है. साथ ही, बीजेपी पर विपक्षी पार्टियों को तोड़ कर लोकतंत्र को कमजोर करने और जनादेश का अपमान करने का भी आरोप लगाया जा रहा है.

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