अल फलाह ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन रखे लालकिला ब्लास्ट से जुड़े संदिग्ध डॉक्टर, ED चार्जशीट में खुला राज

Al Falah University Case: ईडी की चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि अल फलाह ने मेडिकल इंस्पेक्टर को बेवकूफ बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीजों को भर्ती किया, ताकि उनको ऐसा लगे कि बहुत मरीज और जरूरी सुविधाएं हैं. जिससे कि कॉलेज की डिग्री की मान्यता बनी रहे.

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अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में बड़ा खुलासा.
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  • ED ने फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में 260 पेज की चार्जशीट दाखिल की है जिसमें कई खुलासे हुए हैं
  • यूनिवर्सिटी ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन लाल किला ब्लास्ट से जुड़े संदिग्ध डॉक्टरों को भर्ती किया था
  • अल फलाह ने मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीज भर्ती कर मेडिकल इंस्पेक्टर को गुमराह करने की कोशिश की थी
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नई दिल्ली:

फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 260 पेज की चार्जशीट दाखिल की है. जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इसमें डॉक्टर्स की भर्ती मामले में भी बड़ा खुलासा किया है. ईडी ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने बिना पुलिस वेरिफिकेशन के ही नवंबर 2025 के 'लाल किला ब्लास्ट' से जुड़े संदिग्ध डॉक्टरों की भर्ती की थी. इनको रखने से पहले अल फलाह ने पुलिस वेरिफिकेशन ही नहीं करवाई थी. बता दें कि इन तीन डॉक्टरों में से दो को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा डॉक्टर वही सुसाइड बॉम्बर था, जिसने धमाके को अंजाम दिया था.

ये भी पढ़ें- ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन के खिलाफ दायर की चार्जशीट

अल फलाह ने भर्ती किए फर्जी मरीज  

चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि अल फलाह ने मेडिकल इंस्पेक्टर को बेवकूफ बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीजों को भर्ती किया, ताकि उनको ऐसा लगे कि बहुत मरीज और जरूरी सुविधाएं हैं. जिससे कि कॉलेज की डिग्री की मान्यता बनी रहे.

ED ने यूनिवर्सिटी के 61 साल के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ PMLA के तहत दिल्ली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. ईडी ने इस मामले में पहले ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी से जुड़े फंड्स को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और इनके असली स्रोत को छुपाया गया.

फर्जी मान्यता का दावा करके करोड़ों वसूले

एजेंसी का आरोप है कि ट्रस्ट ने फर्जी मान्यता का दावा करके छात्रों और अभिभावकों से फीस वसूली और करोड़ों रुपए की कमाई की, जिसे बाद में परिवार से जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया. इससे कम से कम 415 करोड़ रुपए की गैरकानूनी कमाई हुई, जो छात्रों से धोखाधड़ी करके इकट्ठा की गई.

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यह मामला पिछले साल नवंबर में जवाद अहमद सिद्दीकी की गिरफ्तारी के बाद और तेज हुआ था. ईडी ने कई जगहों पर छापेमारी की थी और नकदी तथा दस्तावेज जब्त किए थे. अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट में सुनवाई शुरू होगी, जहां आरोपियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा.

ईडी को मिले मनी लॉन्ड्रिंग के कई सबूत

ईडी ने अब तक यूनिवर्सिटी के 54 एकड़ कैंपस पर बनी इमारतों और अन्य संपत्तियों को 140 करोड़ रुपए की वैल्यू पर अटैच कर लिया है. जांच के दौरान बैंक ट्रांजेक्शंस, अकाउंट बुक्स, दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड्स की गहन पड़ताल की गई जिसमें फंड्स की गड़बड़ी और लेयरिंग (पैसे को कई परतों में घुमाना) के सबूत मिले.

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इनपुट- भाषा के साथ
 

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