केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हरियाणा पुलिस के मोस्ट वांटेड भगोड़े आरोपी आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह को दुबई से भारत वापस ले आया है. यह कार्रवाई 1 मई 2026 को पूरी की गई, जिसमें विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने भी अहम भूमिका निभाई.
जानकारी के मुताबिक, आरोपी आलोक कुमार हरियाणा पुलिस के एक गंभीर मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था. उस पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने जैसे संगीन आरोप हैं. जांच में सामने आया कि आरोपी एक संगठित गिरोह का अहम सदस्य था, जो फर्जी कागजात और गलत जानकारी के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने का काम करता था.
इतना ही नहीं, आरोपी ऐसे लोगों की भी मदद करता था जिनका आपराधिक रिकॉर्ड था. वह उन्हें फर्जी पहचान और पते के जरिए पासपोर्ट दिलवाता था, जिससे वे आसानी से देश से बाहर जा सकें. इस पूरे नेटवर्क में उसकी भूमिका काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि वह इन अवैध गतिविधियों को कोऑर्डिनेट करने और लोगों की इमिग्रेशन प्रोसेस मैनेज करने का काम भी करता था.
हरियाणा पुलिस के अनुरोध पर CBI ने इंटरपोल के जरिए आरोपी के खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया था. INTERPOL की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई, जिसके बाद UAE की एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद भारत की तरफ से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद UAE सरकार ने आरोपी को भारत भेजने की मंजूरी दे दी. आलोक कुमार को 1 मई को मुंबई एयरपोर्ट पर लाया गया, जहां हरियाणा पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया.अब उससे पूछताछ की जा रही है और उम्मीद है कि इस फर्जी पासपोर्ट रैकेट से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
CBI, जो भारत में इंटरपोल की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के तौर पर काम करती है, देश की सभी जांच एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे मामलों में कार्रवाई करती है। इस पूरे ऑपरेशन में विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के बेहतर तालमेल की वजह से यह सफलता मिली है. अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में ऐसे संयुक्त प्रयासों से 150 से ज्यादा वांछित अपराधियों को विदेशों से भारत वापस लाया जा चुका है.














