- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने I-PAC और निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी को लेकर मोर्चा खोल दिया है
- आई-पैक के ठिकानों पर ईडी की रेड को लेकर टीएमसी और बीजेपी के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है
- इसे लेकर कोलकाता में ममता और ईडी के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर हो चुकी हैं, मामला हाईकोर्ट भी पहुंच गया है
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त भूचाल की सी स्थिति है. मुद्दा है पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म I-PAC और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे सीधे तौर पर अपनी पार्टी की चुनावी रणनीति पर हमला करार देकर सड़कों पर उतर आई हैं. शुक्रवार को उन्होंने कोलकाता में करीब 10 किलोमीटर लंबा मार्च निकाला, जिसे आगामी चुनाव से पहले सड़कों पर टीएमसी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन ये पूरा विवाद आखिर है क्या, आइए बताते हैं.
ममता ने भारी भीड़ के साथ निकाला मार्च
पहले ताजा अपडेट जान लीजिए. टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में भारी भीड़ के साथ मार्च किया. इस दौरान उनकी सरकार के सीनियर मंत्री और पार्टी के बड़े पदाधिकारी, सांसद, विधायक, एक्टर, बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री के कई जाने-माने चेहरे और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. मार्च के दौरान बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बदले के लिए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया.
बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने कोलकाता में बड़ा मार्च निकाला. Photo Credit: PTI
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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस विवाद की शुरुआत गुरुवार को उस वक्त हुई, जब ईडी की टीमों ने कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोलकाता में आई-पैक के साल्ट लेक स्थित ऑफिस और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर एकसाथ छापेमारी की.
छापेमारी के दौरान उस वक्त अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गईं. पहले वह प्रतीक जैन के घर गईं, फिर प्रशासनिक अमले के साथ आई-पैक ऑफिस पहुंची. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ममता कुछ फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज के साथ उन जगहों से निकलीं. इस मामले में ईडी और टीएमसी ने एकदूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.
आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर गुरुवार को ईडी ने छापेमारी की थी. Photo Credit: IANS
TMC: चुनावी रणनीति चुराने के लिए छापा
टीएमसी का आरोप है कि ईडी का उद्देश्य भ्रष्टाचार की जांच नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार की गई उनकी 'गोपनीय राजनीतिक रणनीति' और डेटा को चुराना है. ममता ने कहा कि ईडी के अधिकारी सुबह 6 बजे परिसर में दाखिल हुए. मैं करीब 11.45 बजे वहां पहुंची, तब तक कई चीजें चोरी हो चुकी होंगी. उन्होंने केंद्र पर सभी एजेंसियों को कब्जाने और बीजेपी पर कई राज्यों की सत्ता पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया.
BJP: अफसरों को धमकाया, कागज छीन ले गईं ममता
बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी पर ईडी की जांच में बाधा डालने और ईडी अधिकारियों से दस्तावेज छीनने का आरोप लगाया. बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बंगाल पुलिस अधिकारियों के साथ आई पैक के कैंपस में जबरन घुसीं और ईडी के जांच अधिकारियों को धमकाया और कागजात छीनकर साथ ले गईं. प्रसाद ने कहा कि वह शायद कोई संवेदनशील चीज बचाने की कोशिश कर रही थीं, जो उन्हें और उनकी पार्टी को फंसा सकती है. इसके अलावा और क्या अनुमान लगाया जा सकता है? उन्हें किस बात का डर था?
कोलकाता में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी के खिलाफ प्रदर्शन किया.
प्रतीक जैन कौन हैं?
अब ये जानिए कि प्रतीक जैन आखिर है कौन, जिनके लिए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और सरकारी एजेंसियों के खिलाफ इतना बड़ा मोर्चा खोल दिया है.
होम मिनिस्ट्री ने ईडी से रिपोर्ट तलब की
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में 8 जनवरी को हुई घटनाओं के बारे में ईडी से डिटेल्ड रिपोर्ट तलब की है. ये घटनाएं केंद्रीय एजेंसी के कोलकाता ऑफिस और आई-पैक के सह संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर की गई रेड और सर्च ऑपरेशन से जुड़ी हैं. जानकारी के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में पहले ही अपने मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंप दी थी. अब केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी अलग से रिपोर्ट सौंपी जाएगी. दोनों जगहों पर छापे और तलाशी अभियान के दौरान ईडी अधिकारियों को एस्कॉर्ट करने वाली सीआरपीएफ ने भी गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.
प्रतीक जैन और आई-पैक पर छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं. Photo Credit: IANS
हाईकोर्ट में इतनी भीड़ की सुनवाई टालनी पड़ी
आई-पैक के ऑफिस और प्रतीक जैन के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी से संबंधित याचिकाओं पर शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट रूम में भारी भीड़ घुस आई. जस्टिस शुभ्रा घोष की बार-बार की अपील के बाद भी लोग नहीं हटे तो सुनवाई 14 जनवरी तक टाल दी गई. हाईकोर्ट में गुरुवार के उस नाटकीय घटनाक्रम को लेकर ईडी और तृणमूल की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई होनी है.
तृणमूल ने अपनी रिट याचिका में ईडी को तलाशी के दौरान जब्त किए गए डेटा के कथित “दुरुपयोग और प्रसार” से रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध किया है. वहीं ईडी ने तृणमूल पर जांच में दखल देने का आरोप लगाते हुए गुरुवार के घटनाक्रम की सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया है. ईडी ने अपनी याचिका में ममता बनर्जी और राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया है. वहीं तृणमूल ने केंद्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर की है.
दिल्ली में टीएमसी सांसदों का विरोध प्रदर्शन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के 8 सांसदों ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा. सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने पार्टी सांसदों के साथ गलत बर्ताव का आरोप लगाया और इसे वर्दी में घमंड करार दिया. प्रदर्शन के दौरान तृणमूल सांसदों ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियों को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है.
बहरहाल, पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की सियासत गरमा चुकी है. तृणमूल नेताओं का कहना है कि ममता का ये मार्च टीएमसी के राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है, जो संकेत है कि ममता अब सियासी लड़ाई को सड़कों पर लाना चाहती हैं. वहीं केंद्र सरकार और बीजेपी ने ईडी के छापे को भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की कार्रवाई बताकर ममता को घेरने में जुट गई है.













