ऑनलाइन नफरत भरे कंटेंट से इंजीनियरिंग छात्र का ब्रेनवॉश, महाराष्ट्र ATS की जांच में कई खुलासा

मुंबई में ATS ने 21 वर्षीय छात्र अयान शेख को टेलीग्राम पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ग्रुप्स में सक्रिय पाए जाने पर हिरासत में लिया है. जांच में पता चला कि अयान धार्मिक आधार पर नफरत फैलाने वाले पोस्ट और वीडियो साझा करता था, जिससे कट्टर विचारधारा को बढ़ावा मिलता था.

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हेट-क्राइम ब्रेनवॉश मॉडल का खुलासा (AI इमेज)
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  • महाराष्ट्र ATS ने इंजीनियरिंग छात्र एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स से जुड़े आतंकवादी प्रचार में शामिल पाया
  • जांच में पता चला कि अयान शेख जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े भड़काऊ पोस्टर, वीडियो और बयान साझा करता था
  • छात्र ने माना कि शुरू में जिज्ञासा में कंटेंट देखा, लेकिन धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव में आने लगा
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मुंबई:

मुंबई में महाराष्ट्र एंटी टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) की जांच में 21 साल के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग छात्र अयान यूसुफ शेख को लेकर चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है. जांच एजेंसी का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर चल रहे कुछ बैन और एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था, जहां कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ी भड़काऊ बयान, पोस्‍टर और वीडियो साझा किये जा रहे थे. फिलहाल अयान शेख ATS की हिरासत में है और उसे 9 मार्च तक कस्टडी में रखा गया है.

हेट-क्राइम ब्रेनवॉश मॉडल

ATS सूत्रों के मुताबिक, पिछले 8 से 10 महीनों के दौरान शेख कई एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों में सक्रिय था. इन चैनलों में अलग-अलग देशों के लोग शामिल बताए जा रहे हैं और कुछ सदस्य कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़े बताए गए हैं, जो फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे. जांच एजेंसी का कहना है कि इन चैनलों में मौजूद कुछ लोगों के तार पहले भी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ऑनलाइन प्रचार से जुड़े पाए गए हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि इन ग्रुप्स में अक्सर ऐसे पोस्ट और वीडियो साझा किए जाते थे, जिनमें दुनिया भर में मुसलमानों पर कथित अत्याचार की बात कही जाती थी. सूत्रों के मुताबिक, इन पोस्टों का मकसद धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों में गुस्सा और नाराजगी पैदा करना था. अधिकारियों का कहना है कि यह एक तरह का “हेट-क्राइम ब्रेनवॉश मॉडल” होता है, जिसमें भावनात्मक सामग्री के जरिए लोगों को धीरे-धीरे कट्टर विचारधारा की ओर धकेला जाता है.

कश्‍मीर, उग्रवादी और मुसलमानों को लेकर चर्चा 

पूछताछ के दौरान अयान शेख ने कथित तौर पर बताया कि वह इन चैनलों को एक ऐसे मंच के तौर पर देखता था जहां “मुसलमानों के साथ हो रहे अन्याय” पर चर्चा होती थी और यह समझने की कोशिश की जाती थी कि समुदाय की रक्षा कैसे की जाए. ATS सूत्रो के मुताबिक़ , जिन सामग्रियों से वह जुड़ा हुआ था उनमें कश्मीर से जुड़े राजनीतिक संघर्ष, पुराने उग्रवादियों के ऑडियो संदेश, और भारत, म्यांमार, यूरोप, अमेरिका तथा फिलिस्तीन जैसे इलाकों में मुसलमानों पर कथित अत्याचार से जुड़े वीडियो और पोस्ट शामिल थे. सूत्रों के अनुसार, इन ग्रुप्स में सदस्य अक्सर यह भी चर्चा करते थे कि अगर कहीं किसी समुदाय के खिलाफ कथित अपराध होता है तो उसके जवाब में क्या किया जाना चाहिए और किस तरह की सजा दी जानी चाहिए. अधिकारियों का कहना है कि इन चर्चाओं में अयान शेख भी सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देता था और कई बार सख्त टिप्पणियां भी करता था. कुछ पोस्टों में यह दावा किया जाता था कि जैश-ए-मोहम्मद दुनिया भर में मुसलमानों की रक्षा के लिए काम कर रहा है, जिससे उस विचारधारा को मजबूत करने की कोशिश की जाती थी.

धीरे-धीरे फंसता चला गया 

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान शेख ने यह भी बताया कि शुरुआत में उसे ऐसे कंटेंट छोटे-छोटे हिस्सों में मिलते थे. कभी एक वीडियो, तो कभी कोई मोटिवेशनल पोस्ट. धीरे-धीरे वह इन एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स में सक्रिय होने लगा और वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी करने लगा. इसी दौरान उसे ऐसी विचारधारा से जुड़ी सामग्री दिखाई गई जिसमें हिंसा को कथित तौर पर समुदाय की रक्षा का जरिया बताया जाता था. सूत्रों के मुताबिक, शेख ने यह भी स्वीकार किया कि उसने इस तरह की कुछ सामग्री अपने दोस्तों के साथ ग्रुप चैट में साझा की थी. शुरुआत में उसने यह जिज्ञासा के चलते किया, लेकिन बाद में लगातार ऐसे कंटेंट देखने के कारण उसका प्रभाव उस पर बढ़ता गया. कई बार उसने अपने दोस्तों को भी इस विचारधारा को समझाने की कोशिश की. हालांकि, अब उसे महसूस हो रहा है कि इस प्रक्रिया में वह अनजाने में ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बन गया जिसे जांच एजेंसियां चरमपंथी मानती हैं.

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अयान शेख के वकील ने उठाए ये सवाल

वहीं, दूसरी तरफ अयान शेख के वकील इब्राहिम हरबत ने ATS के आरोपों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जिन टेलीग्राम चैनलों की बात की जा रही है, वे केवल चर्चा के मंच थे और उन्हें किसी आतंकी गतिविधि से जोड़ना गलत है. हरबत के मुताबिक, सोशल मीडिया पर धर्म, कानून, सजा और सामाजिक मुद्दों पर बहस होना आम बात है और इसका मतलब यह नहीं कि कोई व्यक्ति आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शेख के घर की तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई, केवल इंजीनियरिंग से जुड़े किताबें और प्रोजेक्ट नोट्स मिले हैं. वकील ने यह सवाल भी उठाया कि जांच एजेंसी किस आधार पर यह कह रही है कि कुछ सदस्य पाकिस्तान से जुड़े हैं या फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे. उनका कहना है कि इंटरनेट पर लोग अक्सर छद्म नामों का इस्तेमाल करते हैं और केवल उसी आधार पर किसी को आतंकी संगठन से जोड़ना उचित नहीं है.

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फिलहाल ATS इस मामले में आगे की जांच कर रही है और टेलीग्राम चैनलों के जरिए फैलाई जा रही कथित प्रचार सामग्री और उसमें शामिल लोगों की भूमिका को खंगाला जा रहा है.

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