बिहार चुनाव से पहले आयोग की बड़ी कार्रवाई, 334 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को लिस्ट से हटाया

केंद्रीय चुनाव आयोग ने जून में 345 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया था. नियम-शर्तों का पालन न करने पर इनमें से 334 दलों को सूची से हटा दिया गया है.

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  • केंद्रीय चुनाव आयोग ने 334 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को शर्तें पूरी न करने पर पंजीकृत सूची से हटा दिया है.
  • देश में अब 6 राष्ट्रीय दल, 67 क्षेत्रीय पार्टियां और 2,520 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल बचे हैं.
  • चुनाव आयोग ने बताया कि सूची से बाहर किए गए दलों को अब कई तरह के लाभ नहीं मिल सकेंगे.
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भारतीय निर्वाचन आयोग ने 334 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पंजीकृत सूची से बाहर कर दिया है. चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब सिर्फ 6 राष्ट्रीय दल, 67 क्षेत्रीय पार्टियां और 2,520 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल देश में बचे हैं.

6 राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, बसपा, सीपीआई(एम) और नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) शामिल हैं. समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल जैसे 67 प्रमुख दल चुनाव आयोग की सूची में क्षेत्रीय दलों के तौर पर रजिस्टर्ड हैं.

चुनाव आयोग ने शनिवार को बयान में कहा कि सूची से बाहर किए गए राजनीतिक दलों को आयकर अधिनियम-1961, चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश-1968 के संबंधित प्रावधानों के अलावा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम- 1951 की धारा 29बी और धारा 29सी के के तहत कोई भी लाभ नहीं मिलेगा. 

केंद्रीय चुनाव आयोग ने जून 2025 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 345 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया था. इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने इन दलों की जांच की, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए और व्यक्तिगत सुनवाई के जरिए अपनी बात रखने का मौका दिया.

अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर, 345 में से 334 दलों ने शर्तों का पालन नहीं किया. आयोग ने सभी तथ्यों और अधिकारियों की सिफारिशों पर विचार करने के बाद इन 334 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सूची से हटा दिया है.

चुनाव आयोग ने बताया कि अब कुल 2,854 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से 2,520 दल रह गए हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने सूची से बाहर किए गए राजनीतिक दलों को अपील के लिए 30 दिन का समय दिया है.

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चुनाव आयोग ने बयान में कहा कि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन भारत निर्वाचन आयोग के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 की धारा 29ए के तहत किया जाता है. राजनीतिक दलों के पंजीकरण को लेकर नियम है कि यदि कोई पार्टी लगातार 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ती तो उसका नाम रजिस्ट्रेशन सूची से हटा दिया जाता है. 

इसके अलावा, धारा 29ए के तहत रजिस्ट्रेशन के समय राजनीतिक दलों को अपना नाम, पता, पदाधिकारियों की सूची जैसी जानकारियां देनी होती हैं. इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर तुरंत आयोग को सूचित करना होता है.
 

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