हजारों छात्रों के सपने साकार हुए... अदाणी पब्लिक स्कूल, मुंद्रा के 25 साल पूरे होने पर डॉ. प्रीति अदाणी का प्रेरणादायक संबोधन

मुंद्रा स्थित अदाणी पब्लिक स्कूल (एपीएस) ने युवाओं के सपनों को आकार देने के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस अवसर पर आयोजित रजत जयंती समारोह में विद्यार्थी, पूर्व छात्र, अभिभावक और शिक्षक एक साथ आए.

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  • अदाणी पब्लिक स्कूल मुंद्रा ने अपने 25 वर्ष पूरे होने पर सिल्वर जुबली समारोह का भव्य आयोजन किया गया
  • डॉ. प्रीति अदाणी ने विद्यालय को एक छोटे सपने से विकसित होकर सशक्त पहचान बनाने वाली निरंतर चलती विरासत बताया
  • कच्छ में स्कूल के नए इनडोर खेल परिसर और अत्याधुनिक सभागार का उद्घाटन कर बच्चों के विकास को बल दिया गया
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मुंद्रा:

अदाणी पब्लिक स्कूल (APS), मुंद्रा ने अपने 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिल्वर जुबली समारोह का आयोजन किया. इस अवसर पर स्कूल परिवार, पूर्व प्रिंसिपल, टीचर्स, छात्र-छात्राएं, अभिभावक, अतिथि और एलुमनाई बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विद्यालय की 25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों और योगदान को याद किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि 25 वर्ष केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि एक निरंतर चलती हुई विरासत है. उन्होंने अपने भावुक संबोधन में विद्यालय को अपने 'पहले बच्चे' के समान बताया, जो एक छोटे से सपने से शुरू होकर आज एक सशक्त पहचान बन चुका है.

इस अवसर पर कच्छ में एक इनडोर खेल परिसर और अत्याधुनिक सभागार का भी उद्घाटन किया गया, जो सर्वांगीण विकास पर स्कूल के फोकस को और मजबूत करता है. समारोह का नेतृत्व अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने किया, जो अदाणी समूह की सामाजिक कल्याण और विकास शाखा है. स्कूल बनाने का सपना 2001 में साकार हुआ था. 

कोई भी सपना छोटा या असंभव नहीं होता

डॉ. प्रीति अदाणी ने बताया, "साल 2001 में यह संस्थान एक साधारण विचार के रूप में शुरू हुआ जो आज 100 से अधिक शिक्षकों और 2400 से ज्यादा छात्रों का एक सशक्त परिवार बन चुका है. मैं मेडिसिन फील्‍ड से हूं तो इसलिए टीचिंग मेरा मूल क्षेत्र नहीं था, लेकिन यह एक विश्वास और साहस का कदम था, जिसने मुझे एक नई दिशा दी." अपने संबोधन में उन्होंने तीन महत्वपूर्ण सीखें भी साझा कीं. उन्‍होंने कहा, "पहली, 'कोई भी सपना छोटा या असंभव नहीं होता, बस उसे पूरा करने का साहस होना चाहिए.' दूसरा 'धैर्य और दृढ़ता के साथ हर चुनौती का सामना करना चाहिए.' तीसरा, 'किसी भी बड़ी सफलता के पीछे सामूहिक प्रयास होता है.' उन्‍होंने कहा कि किसी चीज़ का निर्माण करना एक उपलब्धि है, लेकिन उसे बढ़ते, विकसित होते और अपनी स्वयं की पहचान व शक्ति प्राप्त करते देखना, यह एक अद्भुत सौभाग्य वाली बात है और आज इस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बनना, मैं स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली मानती हूं."

बाधाओं को देख रुके नहीं...

स्‍कूल निर्माण के दौरान आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने बताया, "स्‍कूल का काम तेजी से चल रहा था... और फिर एक दिन, धरती कांप उठी. एक भयंकर भूकंप ने सब कुछ बदल दिया. भय वास्तविक था. अनिश्चितता चारों ओर थी. रुक जाना, प्रतीक्षा करना या विलंब करना आसान होता. लेकिन हमने ऐसा नहीं किया. हम न रुके, न धीमे पड़े. श्री ए नाथ, केतनभाई, जीवनभाई गढ़ावी, निरंजनभाई की छोटी‑सी टीम के साथ हमने कदम आगे बढ़ाए. हमने सभी बाधाओं के विरुद्ध लड़ने का साहस जुटाया. हमारे आर्किटेक्‍ट पीके दास और डीएवी और सीबीएसई अधिकारियों से हमें भरपूर सहयोग मिला. हमने तेज़ी से कार्य करने और और भी तेज़ गति से आगे बढ़ने का निर्णय लिया."

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हजारों छात्रों के सपनों को साकार किया 

डॉ. प्रीति अदाणी ने 2001 के भूकंप के कठिन समय को याद करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्कूल निर्माण कार्य को रोका नहीं गया और टीम ने साहस के साथ आगे बढ़ते हुए इस सपने को साकार किया. समारोह में विद्यालय के पूर्व और वर्तमान नेतृत्व के योगदान को भी सराहा गया. संस्थापक प्राचार्य अलका लोक्रे, पूर्व प्राचार्य रश्मिकांत मकवाना, केजे. जोसे, वर्तमान निदेशक अमी शाह और प्राचार्य हेमंत शर्मा के कार्यों की विशेष प्रशंसा की गई. डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, "आज एपीएस मुंद्रा केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जिसने हजारों छात्रों के सपनों को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है. स्कूल के पूर्व छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों (सरकारी सेवाओं, शिक्षा, नौसेना, व्यवसाय, खेल और कला) में अपनी पहचान बना रहे हैं."

यह सिर्फ उत्सव नहीं, एक सांस लेती कहानी

स्‍कूल में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं के पैरेंट्स का आभार व्यक्त करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, "यह केवल एक उत्सव नहीं है, यह एक कहानी है. एक जीवंत और सांस लेती कहानी. इस विद्यालय की कहानी हर उस सपने की कहानी जो इसके द्वार से भीतर आया, उस हर संघर्ष की कहानी जिन्हें यहां शक्ति मिली और हर सफलताओं की कहानी जिनका जन्म चुपचाप इसकी गलियारों में हुआ. एक बच्चे के पालन‑पोषण के लिए पूरे गांव की आवश्यकता होती है. कोई भी महान संस्था कभी अकेले व्यक्ति द्वारा नहीं बनती. आज जिन मील के पत्थरों का हम उत्सव मना रहे हैं, उनमें अनेक हृदयों और हाथों का परिश्रम, विश्वास और योगदान निहित है. इसलिए याद रखिए, विजय सदैव सामूहिक होती है. उन लोगों के साथ चलिए जो आपकी दृष्टि में विश्वास रखते हैं और उन्हें आपकी यात्रा में अपनी भूमिका निभाने के लिए स्थान दीजिए."

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समारोह का समापन भविष्य के लिए नई उम्मीदों और संकल्प के साथ हुआ, जिसमें अगले 25 वर्षों को और अधिक गौरवशाली बनाने का लक्ष्य रखा गया.

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