सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सबको हैरान कर दिया. बिहार की एक महिला अधिकारी के खिलाफ रिश्वत लेने के मामले में सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि घूस के नोट चूहों ने नष्ट कर दिए. इस पर शीर्ष अदालत ने न सिर्फ आश्चर्य जताया, बल्कि सजा पर रोक लगाते हुए आरोपी महिला को जमानत भी दे दी.
यह मामला अरुणा कुमारी से जुड़ा है, जो बिहार में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) के पद पर कार्यरत थीं. उन पर ₹10,000 की रिश्वत मांगने का आरोप था और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
ट्रायल कोर्ट से बरी, हाईकोर्ट ने पलटा फैसला
इस केस में ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट ने फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया. हाई कोर्ट ने अलग‑अलग धाराओं में चार साल और तीन साल की सजा सुनाई थी.
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हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि जब्त की गई रिश्वत की रकम अदालत में पेश नहीं की जा सकी, क्योंकि कथित तौर पर नोट 'चूहों द्वारा नष्ट' हो गए. हालांकि, मालखाना रजिस्टर में रिश्वत की रकम जमा होने का रिकॉर्ड मौजूद था. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ नोटों का न होना केस को कमजोर नहीं करता.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, 'हमें यह जानकर हैरानी हुई कि बरामद नोट चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए. यह राज्य के लिए बड़ा राजस्व नुकसान है और इस तरह के स्पष्टीकरण भरोसेमंद नहीं लगते.'
कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि इस तर्क पर गंभीर सवाल उठते हैं और इसकी गहन जांच जरूरी है.
फिलहाल सजा पर रोक, जमानत मंज़ूर
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों को देखते हुए अरुणा कुमारी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि मामले की विस्तार से अंतिम सुनवाई बाद में की जाएगी. यह मामला न सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, बल्कि सबूतों के रखरखाव और पुलिस‑प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं.














