GMT से नहीं महाकाल स्टैंडर्ड टाइम से अपनी घड़ी मिलाएगी दुनिया, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया प्रस्ताव

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन को समय गणना का प्राचीन केंद्र बताते हुए'GMT की जगह 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' (MST) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने GMT की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (MST) शुरू करने का सुझाव दिया है
  • प्रधान के अनुसार उज्जैन समय की गणना का असली केंद्र है, यह भूमध्य रेखा और कर्क रेखा के संगम स्थल पर स्थित है
  • उन्होंने बताया कि आधुनिक AI उपकरण भी समय की गणना के लिए उज्जैन क्षेत्र को अधिक सटीक मानते हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाइम यानी GMT की जगह 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' शुरू करने की वकालत की है. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि समय की गणना का असली केंद्र उज्जैन है, न कि पश्चिम. उन्होंने आधुनिक AI उपकरणों का हवाला देते हुए कहा कि अब GMT की जगह 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम'यानी MST स्थापित करने का समय आ गया है, क्योंकि मध्य प्रदेश का उज्जैन समय की गणना का मूल केंद्र रहा है.

'उज्जैन से होती समय की गणना'

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "उज्जैन वह स्थान है जहां भूमध्य रेखा और कर्क रेखा मिलती हैं और जहां प्राचीन काल में विश्व के समय की गणना की जाती थी. इसलिए अब वह समय आ गया है जब हम तार्किक रूप से 'ग्रीनविच मीन टाइम' (GMT) की जगह 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' (MST) को स्थापित करें. यहां तक कि आधुनिक AI उपकरण भी यह मानते हैं कि समय की गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र ही है."

उन्होंने आगे कहा, 'उज्जैन में विज्ञान केंद्र और तारामंडल को मजबूत बनाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाएगा. उज्जैन एक ऐसा स्थान है जहां आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच की दूरी मिट जाती है और एक नए नजरिया का उदय होता है.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आध्यात्मिकता के बिना विज्ञान अधूरा है और इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने उज्जैन और महाकाल मंदिर का जिक्र किया.

महाकाल मंदिर से जुड़ी एक वैज्ञानिक परंपरा का जिक्र करते हुए प्रधान ने कहा कि वैशाख माह के पहले दिन से ही भगवान शिव पर मिट्टी के पात्र से निरंतर जल अर्पित करने की प्रथा केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं है, बल्कि यह ग्रीष्म ऋतु की चुनौतियों और पर्यावरण प्रबंधन का एक वैज्ञानिक समाधान भी है. प्रधान ने कहा, 'यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे समाज के पास सदियों से समय की गणना की वैज्ञानिक समझ रही है और वह प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों के अनुरूप अपनी जीवनशैली को ढालता आया है. पर्यावरण के प्रति दायित्व और एक संतुलित जीवन-प्रवाह सदैव से ही भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल में रहे हैं.

यह भी पढ़ें: महिला आरक्षण से पहले क्यों कर रहे जनगणना की मांग? अखिलेश यादव ने बीजेपी को निशाने पर लेते हुए बताया

Advertisement

क्या होता है ग्रीनविच मीन टाइम GMT?

ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) दुनिया की वह 'घड़ी' है जिससे पूरी दुनिया अपना समय मिलाती है. लंदन के पास 'ग्रीनविच' नाम की एक जगह है, जहां से गुजरने वाली काल्पनिक रेखा को जीरो डिग्री (0°) माना गया है. जैसे हम गिनती 0 से शुरू करते हैं, वैसे ही दुनिया के समय की गिनती इसी जगह से शुरू होती है. अगर हम इस रेखा से पूर्व की ओर जाते हैं तो समय बढ़ता है और पश्चिम की ओर जाते हैं तो समय घटता है. इसी लाइन की वजह से भारत का समय GMT से 5:30 घंटे आगे रहता है.

यह भी पढ़ें: TMC के पापों का घड़ा भर चुका है... कूच बिहार में ममता सरकार पर जमकर बरसे PM मोदी

Advertisement
Featured Video Of The Day
US Iran War | 'धमकियों से डरने वाले नहीं...' Trump की धमकी पर ईरान का पलटवार | BREAKING NEWS