घाटकोपर इलाके में डीजी ऑफिस ने नहीं दी थी होर्डिंग लगाने की इजाजत : पत्र में बोले कमिश्नर रीवेंद्र शिसवे

इस मामले में जीआरपी कमिश्नर रीवेंद्र शिसवे द्वारा डीजी ऑफिस को दिए गए पत्र में एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया गया है कि किस तरह से घाटकोपर इलाके में जीआरपी की जमीन पर होर्डिंग को लेकर डीजी ऑफिस द्वारा इजाजत नहीं दी गई थी.

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घाटकोपर हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी. (फाइल फोटो)

मुंबई में 14 मई को आई धूल भरी आंधी-तूफान में होर्डिंग गिरने के कारण 16 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 74 अन्य लोग घायल हो गए थे. इस मामले में जीआरपी कमिश्नर रीवेंद्र शिसवे द्वारा डीजी ऑफिस को दिए गए पत्र में एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया गया है कि किस तरह से घाटकोपर इलाके में जीआरपी की जमीन पर होर्डिंग को लेकर डीजी ऑफिस द्वारा इजाजत नहीं दी गई थी. हालांकि, इसके बाद भी इलाके में होर्डिंग को खड़ा किया गया था. 

पत्र में इस बात का खुलासा किया गया है कि कि किस तरह से केसर खालिद ने पहले पत्र लिखकर यह बताया था कि इससे पुलिस वेलफेयर फंड को फायदा मिलेगा, जिसके जवाब में डीजी दफ्तर की ओर से कहा गया था कि पुलिस वेलफेयर फंड में राशि जमा करने के तरीकों पर विचार किया जा सकता है और फिलहाल होर्डिंग लगाए जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. 

लेकिन इसके बाद ego media group द्वारा जीआरपी को प्रस्ताव दिया गया जिसमें अधिक राशि देने की बात कही गई. आरोप है कि इसके बाद 2022 के नवंबर महीने में तत्कालीन जीआरपी कमिश्नर केसर ख़ालिद द्वारा होर्डिंग लगाने की इजाजत दे दी गई और इसके बाद सरकारी आदेश के बाद दिसंबर महीने में तमाम अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए थे.

शिसवे की कथित विफलताएं

शिसवे के पदभार संभालने के बाद, होर्डिंग का निर्माण शुरू हुआ था. निर्माण शुरू होने और गिरने के बीच, शिसवे को चार शिकायतें की गईं, जिनमें कहा गया कि होर्डिंग अवैध है और यह गिर सकता है. एक शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से पुणे में एक समान होर्डिंग का उल्लेख किया था जो गिर गया था, जिससे पांच लोगों की मृत्यु हो गई थी. अपने बयान में, शिसवे ने दावा किया कि ये शिकायतें उनके पास कभी नहीं पहुंचीं.

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