4 साल से एक्टिव था मॉड्यूल, ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स को उड़ाने का था प्लान... लाल किला ब्लास्ट में बड़े खुलासे

लाल किला ब्लास्ट की जांच में पता चला कि 4 साल से सक्रिय ‘व्हाइट कॉलर’ मॉड्यूल वैश्विक कॉफी चेन समेत बड़े भारतीय शहरों में हमलों की योजना बना रहा था. जैश से संबंधों की जांच जारी है. J&K पुलिस की समय पर सूचना से कई हमले टल गए.

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  • दिल्ली लाल किले के कार ब्लास्ट की जांच में 4 वर्षों से सक्रिय संगठित आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है.
  • यह मॉड्यूल भारत के कई बड़े शहरों में वैश्विक कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमले की योजना बना रहा था.
  • जांच में पकड़े गए डॉक्टरों का यह व्हाइट कॉलर मॉड्यूल दिल्ली और अन्य शहरों में हमले करने की रणनीति बना रहा था.
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दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अब एक कहीं बड़ी और संगठित आतंकी साजिश का पर्दाफाश कर रही है. शुरुआती सुरागों ने संकेत दिया था कि यह एक अकेली वारदात नहीं, बल्कि एक चार साल से सक्रिय मॉड्यूल की सुनियोजित गतिविधि का हिस्सा था.

वैश्विक कॉफी चेन को निशाना बनाने की थी तैयारी

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों का मॉड्यूल दिल्ली और भारत के कई बड़े शहरों में एक वैश्विक कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमले की योजना बना रहा था.

चार वर्षों से सक्रिय 'व्हाइट कॉलर' मॉड्यूल

जांच में पकड़े गए तीन डॉक्टरों सहित यह मॉड्यूल करीब चार वर्षों से गुप्त रूप से सक्रिय था और संगठन के भीतर अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहा था.

बड़े भारतीय शहरों में हमलों की योजना

मॉड्यूल ने दिल्ली सहित प्रमुख भारतीय शहरों में उच्च-प्रभाव वाले हमले करने की रणनीति बनाई थी, ताकि व्यापक ध्यान आकर्षित किया जा सके. यह बात जांच के दौरान सामने आई.

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जैश से जुड़े तार और रेड फ़ोर्ट ब्लास्ट का लिंक

जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के मॉड्यूल से संबंधों की जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि रेड फ़ोर्ट कार ब्लास्ट उन योजनाओं का हिस्सा था. जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा अक्टूबर 2025 में मिले इनपुट के बाद की गई जांचों में बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुए, जो मॉड्यूल की व्यापक मंशा को दर्शाते हैं.

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J-K पुलिस की सतर्कता से टले कई हमले

जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस की समय रहते मिली जानकारी और त्वरित कार्रवाई से नवंबर-दिसंबर में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कई संभावित हमले टल गए.

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डॉक्टर, यूनिवर्सिटी और 2,900 किलो विस्फोटक

बता दें किजांच एजेंसियों ने पाया कि यह मॉड्यूल मेडिकल पेशेवरों और छात्रों से बना था, जिसे 'व्हाइट-कॉलर टेररिस्ट' कहा गया. मॉड्यूल ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का उपयोग विस्फोटक इकट्ठा करने और IED बनाने के लिए किया. करीब 2,900 किलो विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए. कुछ सदस्य तुर्की में ट्रेनिंग और हैंडलर्स के संपर्क में भी थे.

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