डॉक्टर फोन पर स्टाफ को देती रही निर्देश, डिलिवरी के बाद मां-बच्चे की मौत, अयोध्या में लापरवाही की हदें पार!

अयोध्या में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है, जहां डॉक्टर ने फोन पर स्टाफ को निर्देश देकर डिलीवरी कराई. इस गंभीर लापरवाही के कारण प्रसूता और नवजात शिशु दोनों की जान चली गई.

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  • कोर्ट ने इस गाने को महिलाओं के प्रति अपमानजनक, अश्लील और अभद्र बताया
  • हनी सिंह पहले भी अभद्रता और विवादित बयानों के कारण आलोचना का सामना कर चुके हैं और माफी भी मांग चुके हैं
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मौत हो गई. महिला के परिवार के सदस्यों ने बताया कि प्रसव के दौरान डॉक्टर अस्पताल में नहीं था और उसने फोन पर ही सारे दिशानिर्देश कर्मचारियों को दिये. फैजाबाद शहर में मंगलवार देर रात हुई घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अस्पताल को सील कर दिया और जांच शुरू कर दी.

बेनीगंज के सुरेश यादव ने बताया कि उनकी पत्नी सोनी यादव को प्रसव पीड़ा होने पर मां परमेश्वरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. उन्होंने कहा कि इलाज कर रही डॉक्टर अंजलि श्रीवास्तव ने शुरू में उन्हें बताया था कि उनकी हालत सामान्य है. परिवार के अनुसार, प्रसव के समय डॉक्टर मौजूद नहीं थी और प्रसव प्रक्रिया एक महिला कर्मचारी द्वारा की गई. सुरेश यादव ने कहा कि प्रसव के दौरान उस महिला कर्मचारी को डॉक्टर फोन पर निर्देश दे रही थी.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘लगभग आधे घंटे के बाद, कर्मचारियों ने बच्चे को सौंप दिया और कहा कि वह सांस नहीं ले रहा है. जब हम नवजात को पास के एक डॉक्टर के पास ले गए, तो उसे मृत घोषित कर दिया गया. जब हम लौटे, तो हमें बताया गया कि मेरी पत्नी की हालत खराब हो गई है. फिर उसे दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे भी मृत घोषित कर दिया गया.'

परिवार ने अस्पताल पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रसव के दौरान कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था. शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने सुविधा का निरीक्षण किया. श्रीवास्तव ने कहा कि निरीक्षण के दौरान कोई भी डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल कर्मी मौजूद नहीं था और खुद को अस्पताल प्रबंधक होने का दावा कर रहे महेश सिंह नामक एक व्यक्ति को ऑपरेशन की देखरेख करते हुए पाया गया.

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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा, ‘वहां ऐसी तीन और महिलाएं थीं जिनका आपरेशन के जरिये प्रसव कराया गया था. उनकी देखभाल प्रबंधक पर छोड़ दी गई थी.' उन्होंने कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड अधूरे थे, डॉक्टर की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी और चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन भी असंतोषजनक पाया गया था. उन्होंने कहा, 'अस्पताल को सील कर दिया गया है और भर्ती मरीजों को जिला महिला अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है. आगे की जांच चल रही है और लापरवाही साबित होने पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी.'

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