- दिल्ली के द्वारका में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर से 23 साल के साहिल धनेश्रा की मौके पर मौत हो गई
- साहिल की मां इन्ना माकन ने बताया कि आरोपी नाबालिग ड्राइवर के खिलाफ पहले से कई ओवरस्पीडिंग चालान थे
- 2023 और 2024 में नाबालिगों के कारण देशभर में लगभग बारह हजार सड़क दुर्घटनाएं हुईं
राजधानी दिल्ली के द्वारका में 3 फरवरी को एक सड़क हादसे ने एक मां से उनका इकलौता बेटा छीन लिया. हादसा इतना जोरदार था कि उसके शव के चीथड़े उड़ चुके थे. जिस बाइक पर वो सवार था, उसके टुकड़े-टुकड़े हो चुके थे. और ये सब हुआ रीलबाजी के शौक में. एक रईसजादा अपने बहन के साथ तेज रफ्तार कार से रील बना रहा था. तभी उसने 23 साल के साहिल धनेश्रा को टक्कर मार दी.
साहिल की मां इन्ना माकन सिंगल मदर थीं. उन्होंने 23 साल तक साहिल को अकेले पाला था और वही उनका इकलौता सहारा था. मां इन्ना माकन ने NDTV से बातचीत में बताया कि जिस स्कॉर्पियो से साहिल की बाइक को टक्कर लगी, उस पर पहले से 13 चालान थे, वह भी ओवरस्पीडिंग के. उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी को अंतरिम जमानत भी मिल गई है.
ये दर्दनाक हादसा दिल्ली के द्वारका में 3 फरवरी की सुबह 11:57 बजे हुआ था. आरोपी अपनी बहन के साथ स्कॉर्पियो लेकर रील बनाने घर निकला था. तेज रफ्तार में वह रील बना रहा था. इसी दौरान साहिल अपनी R15 बाइक से ऑफिस जा रहा था. तभी उस तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने साहिल को टक्कर मार दी. साहिल की मौके पर ही मौत पर हो गई. आरोपी नाबालिग है और बोर्ड एग्जाम के लिए उसे जमानत मिल गई है.
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मां बोलीं- ये क्रिमिनल एक्ट है
साहिल की मां इन्ना माकन ने बताया कि टक्कर के बाद लड़का गाड़ी कंट्रोल नहीं कर पाया. उसने एक कैब ड्राइवर और कैब को भी टक्कर मारी. ये टक्कर भी इतनी जोरदार थी कि गाड़ी पीछे से पूरी तरह पिचक गई.
उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं है, बल्कि 'क्रिमिनल एक्ट' है. ये बच्चे सोचते हैं कि इनके मां-बाप के पैसा है तो ये सड़क पर कुछ भी कर सकते हैं. स्टंट, रील, फन-वीडियो और उन्हें कोई सजा नहीं मिलेगी. यह आपराधिक मानसिकता है. इस लड़के पर ओवरस्पीडिंग के पहले भी कई चालान हैं. इसके बावजूद उसके पिता ने उसे नहीं रोका.
उन्होंने कहा कि उस लड़के के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था. उन्होंने कहा कि उसके पास लाइसेंस नहीं था. क्या उसके पिता को ये बात नहीं पता थी? अगर इतना बड़ा हादसा हुआ है. मेरे बच्चे की जान गई है तो इस केस के जरिए एक मिसाल बननी चाहिए, ताकि किसी और माता-पिता को मेरे जैसा दर्द न झेलना पड़े.
कितने सड़क हादसे?
साहिल की मां इन्ना माकन ने कहा कि वह हमेशा से चाहती थी कि उनका बेटा इस देश में न रहे. वो यहां के हालात और टॉर्चर देखकर शुरू से ही उसे कहती थी कि बेटा यहां से चले जाना.
एक स्टडी है जो बताती है कि सड़क पर ड्राइविंग के लिहाज से भारत दुनिया का 5वां सबसे खतरनाक मुल्क है. अमेरिकी कंपनी Zutobi ने कई पैमानों पर रोड सेफ्टी पर एक स्टडी की थी और बताया था कि कौन सा देश ड्राइविंग के लिए सबसे सेफ है.
ये स्टडी 53 देशों पर हुई थी. इसमें दावा किया गया था कि दुनियाभर में साउथ अफ्रीका की सड़कें सबसे खतरनाक हैं. भारत इस मामले में 5वें नंबर पर है.
इतना ही नहीं, सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि सड़क दुर्घटनाएं मौतों का सबसे बड़ा कारण है. सबसे ज्यादा मौतें 15 से 49 साल की उम्र के लोगों की होती है. रिपोर्ट बताती है कि 2023 में देशभर में 4.80 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं. इनमें 1.73 लाख लोगों की मौत हो गई थी. 2022 की तुलना में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.2% की बढ़ोतरी हुई थी.
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नाबालिग कितने खतरनाक?
आज के समय में आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें ड्राइवर नाबालिग निकलता है. साहिल वाले केस में भी आरोपी नाबालिग है. इसके बावजूद वह गाड़ी चला रहा था.
पिछले साल मार्च में सरकार ने संसद में उन सड़क दुर्घटनाओं का डेटा दिया था, जिनकी वजह नाबालिग थे. यानी, ऐसे सड़क हादसे जिनमें नाबालिग गाड़ी चला रहे थे. सरकार ने बताया था कि 2023 और 2024 में देशभर में 11,890 सड़क दुर्घटनाओं में नाबालिग शामिल थे. हालांकि, इसमें सरकार ने ये नहीं बताया था कि नाबालिग ड्राइवरों की वजह से हुई दुर्घटनाओं में कितनी मौतें हुई थीं?
अगर सरकारी आंकड़ों से हिसाब लगाया जाए तो हर दिन 16 सड़क दुर्घटनाएं सिर्फ नाबालिगों की वजह से हो रही हैं.
इन आंकड़ों के मुताबिक, नाबालिगों की वजह से सबसे ज्यादा 2,063 दुर्घटनाएं तमिलनाडु में हुई थीं. दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश रहा, जहां 1,138 दुर्घटनाएं हुईं. वहीं, महाराष्ट्र में नाबालिगों के कारण 1,067 दुर्घटनाएं हुई थीं. इनके अलावा, उत्तर प्रदेश में 935, आंध्र प्रदेश में 766, कर्नाटक में 751, गुजरात में 727 और केरल में 645 दुर्घटनाएं हुई थीं. राजधानी दिल्ली में नाबालिगों की वजह से 231 दुर्घटनाएं हुई थीं.
कानून क्या कहता है?
कानूनन 18 साल से कम उम्र के लोगों का गाड़ी चलाना मना है. 18 साल की उम्र के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस बनता है.
मोटर व्हीकल एक्ट कहता है कि अगर नाबालिग कोई अपराध करता है तो ऐसे मामलों में उसके माता-पिता या गार्जियन को दोषी ठहराया जाएगा. मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199(A) में नाबालिगों से जुड़े अपराध का प्रावधान किया गया है.














