ईडी के विरोध के बावजूद धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने स्वीकार की सीबीआई की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ 

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई उस राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जो केंद्र सरकार उसके नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कर रही है.

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मुंबई (महाराष्ट्र) :

मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने पुष्पक बुलियन्स प्राइवेट लिमिटेड और कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी के एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर एक ‘क्लोजर रिपोर्ट' को स्वीकार कर लिया है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसका विरोध किया था।.

संबंधित मामले की जांच कर रही ईडी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के रिश्तेदार श्रीधर पाटणकर के नियंत्रण वाली एक फर्म की संपत्तियों को कुर्क किया था.

अदालत ने कहा कि तथ्य केवल यह है कि ईडी का मामला धन शोधन निवारण अधिनियम न्यायालय के पास लंबित था, जिसने इसका संज्ञान लिया है, और सीबीआई को आरोप पत्र प्रस्तुत करने के लिए बाध्य नहीं करेगी, क्योंकि उसे कोई सबूत नहीं मिला था.

विशेष न्यायाधीश ए. सैयद ने 29 जून को जांच एजेंसी की ‘क्लोजर रिपोर्ट' को स्वीकार कर लिया. विस्तृत आदेश शुक्रवार को उपलब्ध हुआ था.

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ईडी ने 2017 में पुष्पक बुलियन, बैंक अधिकारियों और कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें दावा किया गया था कि नोटबंदी के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की झावेरी बाजार शाखा में पीहू गोल्ड और सतनाम ज्वेल्स के चालू खातों में क्रमश: 47.75 करोड़ रुपये और 37.15 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे.

उसने आरोप लगाया था कि राशि को बाद में उसी शाखा में पुष्पक बुलियन के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था. केंद्र सरकार द्वारा 500 रुपये और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर किये जाने के तीन दिन बाद 11 नवंबर 2016 को बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के लिखित निर्देश पर यह कपटपूर्ण लेनदेन हुआ था.

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ईडी ने आरोप लगाया कि नकदी सीधे पीहू गोल्ड और सतनाम ज्वेल्स के खातों में जमा की गई थी. उसने दावा किया कि आरोपियों ने व्यापक स्तर पर धनशोधन किया है.

ईडी ने मार्च 2022 में नोटबंदी से जुड़े इस मामले में कथित तौर पर श्रीधर पाटणकर के स्वामित्व वाली एक फर्म की 6.45 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई उस राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जो केंद्र सरकार उसके नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कर रही है. ईडी मामले के आधार पर सीबीआई ने भी समानांतर जांच शुरू की थी.

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