- ओम बिरला ने Corporate Laws Amendment Bill, 2026 की समीक्षा के लिए JPC गठित करने का निर्णय लिया
- वित्त मंत्री सीतारमण ने बिल लोकसभा में पेश कर उसे ज्वाइंट कमिटी को भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे सदन ने स्वीकारा
- Companies Act, 2013 और Limited Liability Partnership Act, 2008 में संशोधन कर व्यापार को सरल बनाने का प्रयास
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026 की विस्तृत समीक्षा और बिल के प्रारूप पर राजनीतिक सहमति बनाने के लिए ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी गठित करने का फैसला किया है. इस कमिटी में लोकसभा और राज्यसभा , दोनों सदनों के सांसद शामिल होंगे. सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोक सभा में Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026 पेश करने के बाद उसे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने सर्वसहमति से स्वीकार कर लिया.
इस विधेयक में Companies Act, 2013 और Limited Liability Partnership Act, 2008 में संशोधन का प्रस्ताव है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इन दोनों अहम कानूनों में प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य हैं:
- (i) अधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाकर (decriminalising) और कुछ अन्य प्रावधानों में संशोधन करके कंपनियों के लिए व्यापार (ease of doing business) और जीवनयापन (ease of living) को और अधिक बेहतर बनाना;
- (ii) एकल व्यक्ति वाली कंपनियों (One Person Companies), लघु कंपनियों, स्टार्ट-अप कंपनियों और उत्पादक कंपनियों के लिए अनुपालन (ease of compliance) को आसान बनाना;
- (iii) कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को और कारगर बनाना;
- (iv) तेजी से विकसित हो रहे कॉर्पोरेट परिदृश्य और बदलती व्यावसायिक प्रथाओं के आलोक में नई अवधारणाओं को मान्यता देना; और
- (v) मौजूदा कानूनों में से अस्पष्टताओं को हटाना शामिल हैं
Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026 के ज़रिये सरकार ने मौजूदा कंपनी अधिनियम (Companies Act) और एलएलपी अधिनियम (Limited Liability Partnership Act, 2008) में प्रोसीज़रल डिफ़ॉल्ट के मामलों से निपटने के लिए मौजूदा क्रिमिनल प्रोविजन्स को decriminalize कर उनकी जगह सिविल पेनल्टीज़ लगाने का प्रस्ताव शामिल किया है. साथ ही, नए बिल में कंपनियों के मर्जर की प्रक्रिया को फ़ास्ट-ट्रैक करने और कंपनियों की सालाना बैठक और Extraordinary General Meetings वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित करने की अनुमति देना भी शामिल है.













