Constitution Day 2025
नई दिल्ली:
संविधान दिवस की वर्षगांठ पर संसद के सेंट्रल हॉल में समारोह आयोजित किया गया. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, स्पीकर ओम बिरला, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी उपस्थित थे. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया समेत नौ भाषाओं में संविधान का अनुवादित संस्करण जारी किया.
राष्ट्रपति के संबोधन की बड़ी बातें...
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, आज के दिन 26 नवंबर 1949 में संविधान सभा के सदस्यों ने भारत संविधान के निर्माण का कार्य संपन्न किया था। आज के दिन उस पर हम भारत के लोगों ने अपने संविधान को अपनाया था। स्वाधीनता के बाद संविधान सभा ने भारत की अंतरिम संसद के रूप में भी कर्तव्य का निर्वाहन किया. बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर हमारे संविधान के प्रमुख निर्माता में से थे. बाबा साहब के 125 वीं जयंती के वर्ष में यानी 26 नवंबर 2015 में प्रतिवर्ष संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया..ये निर्णय अत्यंत सार्थक निर्णय लिया गया.
- राष्ट्रपति ने कहा, हमारा संविधान हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है, ये औपनिवेशिक पहचान को त्याग करके राष्ट्रवादी भावना के साथ आगे बढ़ने का मार्गदर्शक ग्रंथ है. दंड के स्थान पर न्याय की भावना पर आधारित भारतीय न्याय संहिता को लागू किया गया है. ऐसे अनेक प्रगतिशील चीजों को सार्थक विमर्श के बाद पारित करने के लिए मैं संसद सदस्यों की सराहना करती हूं.
- राष्ट्रपति ने कहा, आज के दिन पूरा देश भारतीय लोकतंत्र के आधार हमारे संविधान और उसके निर्माताओं के प्रति आदर व्यक्त कर रहा है. हम सामूहिक स्तर पर संविधान में आस्था व्यक्त करते हैं. युवाओं को संवैधानिक आदर्शों से अवगत किया जाता है. संविधान सभा में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता.हंसल मेहता ने कहा था कि हम सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय का सपना पूरा करेंगे.
- भारतीय संसद विश्व के अनेक लोकतंत्र के लिए उदाहरण है. मुझे ये कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता होती है कि हमारी संसद ने कई अच्छे उदाहरण पेश किया है. संविधान निर्माताओं की आशाओं पर खरा उतरने के लिए मैं सभी सांसदों को बधाई देती हूं. हमारे संविधान की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता हमारी संविधान का मूल है.
- भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तेज गति से आगे बढ़ रहा है.भारत में लगभग 25 करोड़ लोगों के गरीबी की सीमा रेखा से बाहर आने से आर्थिक न्याय के पैमाने पर विश्व की सबसे बड़ी सफलता अर्जित की है.
उप राष्ट्रपति के संबोधन की 5 बड़ी बातें....
- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा, हमारे संविधान का ड्राफ्ट,लंबी बहस के बाद हमारे महान नेताओं ने संविधान सभा में अपनाया. यह आज़ादी के लिए लड़ने वाले हमारे लाखों देशवासियों की मिली-जुली समझ, त्याग और सपनों को दिखाता है. हमारा संविधान समझ और अनुभव, त्याग, उम्मीदों और आकांक्षाओं से बना है. हमारे संविधान की आत्मा ने साबित कर दिया है कि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा.
- राधाकृष्णन ने कहा, यह संविधान देश के विकास, न्याय, एकता, बंधुता की मिसाल है. संविधान की भावना है कि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा.
- हम आज दुनिया की सबसे चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और जल्द ही तीसरी पायदान हासिल करेंगे. पूरी दुनिया हमारी ओर देख रही है. करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं.
- 100 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़े गए हैं. हमने असंभव को संभव कर दिखाया है. इस साल हम सरदार वल्लभ भाई पटेल, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और वंदेभारत के 150 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं.
- लोकतंत्र हमारे यहां प्राचीन काल से रही है. बिहार के वैशाली जिले में भी प्राचीन काल में ऐसा था. जम्मू-कश्मीर में 2024 में चुनाव के दौरान मतदान प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जो हमारी लोकतंत्र की मजबूती को दिखाता है.
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