- असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद पार्टी में मची हलचल
- बताया जा रहा है कि भूपेन की पार्टी में अनदेखी हो रही थी, इससे वो नाराज थे
- भूपेन को मनाने के लिए जितेंद्र सिंह उनके मिलने पहुंचे थे, लेकिन मामला सुलझा नहीं है
असम में बीजेपी को हैट्रिक लगाने से रोकने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने बीते साल पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे और सांसद गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. कुछ हफ्तों पहले प्रियंका गांधी को असम की स्क्रीनिंग कमिटी का प्रमुख नियुक्त किया और उनके साथ कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और छतीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पर्यवेक्षक बनाया. कुल मिलाकर कांग्रेस ने संदेश दिया कि वो हिमंत बिस्वा सरमा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए पूरी ताकत झोंकने वाली है. प्रियंका गांधी इसी हफ्ते असम के पहले दौरे पर जाने वाली थीं. लेकिन उससे ठीक पहले असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे कर पार्टी को बड़ा झटका दिया.
भूपेन ने इस्तीफा वापस नहीं लिया
आनन फानन में कांग्रेस आलाकमान दिल्ली से गुवाहाटी तक हरकत में आ गया. राहुल गांधी ने बोरा से फोन पर कहा की और प्रभारी जितेंद्र सिंह ने घर जा कर उन्हें मनाया और दावा किया कि बोरा ने इस्तीफा वापस ले लिया है. लेकिन भूपेन बोरा ने अंतिम फैसले के लिए एक दिन का समय मांगा है. सस्पेंस के बीच उनके करीबी सूत्रों का मानना है कि बोरा इस्तीफा वापस नहीं लेंगे! बोरा ने अपने इस्तीफे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया है लेकिन यह जरूर कहा कि 'इस्तीफे की वजह सबको मालूम है, इसकी शुरुआत बेहाली से हुई'.
प्रियंका गांधी के साथ भूपेन बोरा
भूपेन ने खूब की मेहनत
पांच साल पहले 2021 में जब असम में लगातार दूसरी बार कांग्रेस को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा तो विधानसभा चुनाव के फौरन बाद जुलाई में दो बार के विधायक रह चुके भूपेन बोरा को असम प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. करीब चार साल सालों तक बोरा ने पूरी मेहनत की. उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर पूरे असम में पदयात्रा भी की और हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के खिलाफ सड़कों पर नजर आए.
समर्थकों के साथ भूपेन बोरा
गौरव को जिम्मेदारी से भूपेन हुए आहत
लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद असम की बेहाली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस आलाकमान ने भूपेन बोरा की राय को दरकिनार कर उम्मीदवार तय कर दिया. इसके कुछ महीनों के बाद पिछले साल मई में बोरा की जगह गौरव गोगोई को असम कांग्रेस की कमान सौंप दी गई. भूपेन बोरा के करीबी सूत्रों की मानें तो बोरा इस बात से आहत थे कि चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उनकी अब तक की मेहनत को अनदेखा कर दिया गया. हालांकि बोरा को गठबंधन की कमिटी की जिम्मेदारी दी गई लेकिन सारे अहम फैसले गौरव ही कर रहे थे.
धार्मिक परंपरा में भी विपरित रुख
गौरव गोगोई के कामकाज के तौर तरीकों को लेकर भूपेन बोर समेत प्रदेश कांग्रेस के कई और नेता सहज नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक बीते दिनों माजुली में एक धार्मिक स्थल पर परंपरा के विपरीत गौरव गोगोई एक गैर हिंदू नेता को लेकर चले गए. इस घटना ने पहले से ही उपेक्षित महसूस कर रहे भूपेन बोरा को बड़ा मुद्दा दे दिया और उन्होंने पार्टी आलाकमान को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया. रोचक बात यह है भूपेन बोरा से ठीक पहले असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे रिपुन बोरा 2022 मे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे. हालांकि दो सालों में ही उन्होंने घर वापसी कर ली.
मीटिंग में असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा
भूपेन के अंतिम फैसले पर नजर
बहरहाल बोरा के आखिरी फैसले पर नजरें टिकी हुई हैं. लेकिन उनके जाने से असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हिमंत सरकार के खिलाफ मुहिम चला रही कांग्रेस की रणनीतियों को बड़ा झटका तो लग ही गया है. बोरा की पहचान जमीन से जुड़े हुए नेता के साथ प्रभावशाली वक्ता की भी है. ख़ास तौर पर उनमें असम की संस्कृति का जानकार माना जाता है.
बीजेपी में जाएंगे भूपेन?
बीते लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली थी. यात्रा जब गुवाहाटी पहुंची तो प्रशासन ने राहुल गांधी को शहर के अंदर से गुजरने से रोक दिया और बाहर से निकालने को कहा. इससे नाराज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड पर आक्रामक प्रदर्शन किया जिसकी अगुवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा कर रहे थे. तब मैंने करीब से देखा कि बोरा महज प्रदर्शन की औपचारिकता नहीं कर रहे थे बल्कि वाकई में आरपार में मूड में थे. कांग्रेस से करीब बत्तीस सालों के जुड़ाव के बाद अब भूपेन बोरा ने जब पार्टी से बाहर जाने के लिए कदम बढ़ा दिया है तो इस बार भी आरपार के मूड में ही हैं. माना जा रहा है कि वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.













