- PM मोदी ने महिला आरक्षण बिल न पास होने पर विपक्षी दलों की स्वार्थी राजनीति को देश की नारी शक्ति पर चोट बताया
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम के संबोधन को राजनीतिक भाषण और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग बताया
- सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने पीएम के संबोधन को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करार देते हुए शिकायत की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में 'महिला आरक्षण संशोधन बिल' के पास न होने पर विपक्षी पार्टियों को जमकर सुनाया. विपक्ष ने अब पलटवार किया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने पीएम के राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत कर दी है. सीपीआई सांसद संदोष कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर शिकायत की है. सीपीआई सांसद ने आरोप लगाया है कि पीएम के संबोधन का मकसद राजनीतिक था, जो आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है. उन्होंने इस मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है.
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खरगे बोले- PM का संबोधन सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने पीएम मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने आधिकारिक संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया, जो कीचड़ उछालना और सरासर झूठ भरा था. मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "एक हताश और निराश पीएम मोदी, जिनके पास पिछले 12 सालों में दिखाने के लिए कुछ भी ठोस नहीं है, उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया. आचार संहिता पहले से लागू है, फिर भी पीएम मोदी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर अपने विरोधियों पर हमला किया. यह लोकतंत्र और भारत के संविधान का घोर अपमान है." खड़गे ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस का जिक्र 59 बार किया, जबकि महिलाओं का जिक्र बमुश्किल कुछ ही बार किया. इससे उनकी प्राथमिकताएं साफ हो जाती हैं. उन्होंने दावा किया कि महिलाएं भाजपा की प्राथमिकता नहीं हैं; कांग्रेस ही महिलाओं के साथ खड़ी है.
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पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साथियों, हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सबकुछ हो जाता है, दल हित देशहित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति और देशहित को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है. इस बार भी यही हुआ है. कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है. कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी. देश की नारी शक्ति देख रही थी. मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, जब नारी हित का प्रस्ताव गिरा तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं. महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर ये लोग मेज थपथपा रहे थे. उन्होंने जो किया, वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान और उसके आत्मसम्मान पर चोट थी, लेकिन नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती है.
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