- प्रयागराज में कोडीन युक्त कफ सिरप की भारी मात्रा में गैर कानूनी खरीद और बिक्री का सनसनीखेज मामला सामने आया है
- मेसर्स एम के हेल्थकेयर के प्रोप्राइटर के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 26 (d) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है
- औषधि विभाग की जांच में पाया गया कि फर्म ने बिना मेडिकल सलाह के ९६७७२४ बोतल कोडीन युक्त सिरप खरीदी और बेची है
पूरे उत्तर प्रदेश में जहां कोडीन युक्त कफ सिरप को लेकर पिछले कई दिनों से छापेमारी चल रही है और उसके अवैध कारोबार को खंगालने के लिए यूपीएसटीएफ लगी हुई है. वहीं अब इसके तार प्रयागराज से जुड़ते हुए नजर आ रहे हैं. यूपी के प्रयागराज में भी अब कोडीन युक्त कफ सिरप की भारी मात्रा में खरीद फरोख्त का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस खुलासे के बाद मामले में प्रयागराज के एयरपोर्ट थाने में ड्रग इंस्पेक्टर, खाद्य सुरक्षा, एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से आरोपी फर्म के प्रोपाइटर के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज कराया गया है. वहीं इस मामले में ड्रग डिपार्टमेंट और पुलिस जांच में जुट गई है.
क्या है मामला
मामले के अनुसार प्रयागराज के एयरपोर्ट थाने में ड्रग इंस्पेक्टर संतोष कुमार पटेल ने शाहगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले मोहम्मद सैफ के खिलाफ एयरपोर्ट थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 26 (d) में एफआईआर दर्ज कराई है. एफआईआर के मुताबिक धूमनगंज थाना क्षेत्र के लखनपुर में आराजी नंबर 1360 एफ, ग्राउण्ड फ्लोर स्थित फर्म मेसर्स एम के हेल्थकेयर के प्रोपराइटर मोहम्मद सैफ है. प्रयागराज में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर संतोष पटेल द्वारा दी गई तहरीर में कहा गया है कि प्रोप्राइटर सैफ कोडीनयुक्त औषधि के गैर चिकित्सकीय प्रयोजनार्थ दुरुपयोग और बिक्री के अपराध में लिप्त है.
दिनेश कुमार तिवारी, सहायक आयुक्त (औषधि), कानपुर डिवीजन, कानपुर के द्वारा दिए गए निर्देश पर 15 अक्टूबर 2025 को मेसर्स अग्रवाल एण्ड ब्रदर्स द्वारा जारी विक्रय रिकॉर्ड 5 सितंबर 2025 जो कि एमके हेल्थ केयर प्रयागराज को जारी किया गया था और उसके विक्रय रिकॉर्ड द्वारा Escuf सिरप की 100 एमएल की 89600 की शीशी बेची गई थी. इस संबंध में सहायक आयुक्त (औषधि) प्रयागराज मण्डल प्रयागराज द्वारा माधुरी सिंह, औषधि निरीक्षक कौशांबी को निर्देशित किया गया कि इस फर्म का तत्काल निरीक्षण करते हुए प्रश्नगत औषधि Escuf कफ सिरप का खरीद और बिक्री का सत्यापन किया जाए.
कैसे खुला मामला
औषधि निरीक्षक कौशाम्बी द्वारा निर्देश के अनुपालन में 15 अक्टूबर 25 को ही फर्म M/S MK हेल्थ केयर का निरीक्षण किया गया और मौके पर फर्म बंद पाई गई. फर्म के प्रोप्राईटर मोहम्मद सैफ के द्वारा फोन पर बताया गया कि वो मौजूदा समय में दिल्ली में है.उसने कहा कि वह दो दिन में दिल्ली से आकर फर्म का निरीक्षण की कार्यवाही कराएगा. फर्म के प्रोप्राईटर मोहम्मा सैफ के भाई फैजुर रहमान के माध्यम से 16 अक्टूबर को Escuf कफ सिरप के बिक्री रिकॉर्ड को दिखाया गया. फर्म द्वारा M/S PD फार्मा SA, 8/34-C-15 वाराणसी के तिसरीया परशुरामपुर सारनाथ को 21 सितंबर और 6 अक्टूबर को Escuf कफ सिरप 100 ml, B.No. PEKSL108 से कुल 89600 Escuf कफ सिरप को बेचा गया है.
इस दौरान एमके हेल्थकेयर फर्म को निर्देशित किया गया कि एक साल का शिड्यूल्ड औषधियों एवं नार्कोटिक्स औषधियों की डिटेल जनपद और फर्मवार प्रेषित कर क्रेता फर्मों की लिस्ट देने को कहा गया. विभाग द्वारा जांच के दौरान पाया गया कि मेसर्स एम के हेल्थकेयर ने NEW PHENSEDYL COUGH SYRUP 100 ml की कुल 967724 बोतल खरीदी थी. ये सभी कोडीन युक्त दवाई है और बिना मेडिकल सलाह के प्रयोग नहीं कर सकते.
एमके हेल्थकेयर द्वारा औषधि विभाग को NEW PHENSEDYL COUGH सिरप का कोई भी खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड पूर्व में भेजे गए कारण बताओ नोटिस में समस्त कोडीनयक्त औषधियों का खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया. इस दौरान रिकॉर्ड न मिलने पर कार्यवाही में औषधि विभाग ने फर्म के थोक औषधि विक्रय लाइसेंस को 20 नवंबर 2025 को निरस्त कर दिया. एफआईआर में कहा गया है कि खरीदे गए सिरप कोडीन नॉरकोटिक्स श्रेणी की औषधि है जिसका उपयोग चिकित्सकीय प्रयोग के लिए चिकित्सक के परामर्श पर किया जाता है. इसका कय-विक्रय फर्मों द्वारा किया जाना एवं इससे जुड़े सारे रिकॉर्ड्स रखना एवं कम्पीटेंट अथारिटी के माँगे जाने पर प्रस्तुत करना अनिवार्य है.
क्या है आरोप
आरोप लगाया है कि कोडीनयुक्त कफ सिरप को भारी मात्रा में फर्म द्वारा विधि विरुद्ध तरीके से गैर चिकित्सकीय, नशे के रूप में प्रयोग के लिए बेचा गया है जो स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985, (NDPS Act) की धारा-26 (d) के तहत दण्डनीय अपराध है. फर्म के प्रोप्राइटर मो० सैफ को 17 अक्टूबर 2025 को कारण बताओ जारी होने के बाद एक हफ्ते में स्पष्टीकरण देने के लिए निर्देशित किया गया था. फर्म द्वारा 20 नवंबर 2025 तक समस्त कोडीनयुक्त एवं अन्य शिडयूल्ड औषधियो का क्रय विक्रय रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया और फर्म का भौतिक सत्यापन भी नहीं कराया गया. साथ ही लोकसेवक द्वारा अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कार्यवाही से बचने के उद्देश से प्रोपराइटर फरार हो गया .
लोक सेवक द्वारा अपराध के अन्वेषण के प्रयोजन के लिए उपस्थित होने के निर्देश की जानबूझ कर अवेहलना करने, जांच एवम् सत्यापन के लिए वांछित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने का भी अपराध कारित किया गया है. फर्म मेसर्स एम के हेल्थकेयर का यह कृत्य औषधि एवम् प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत अपराध है. फिलहाल औषधि विभाग और पुलिस अब ये खंगालने में जुट गई है कि क्या कोडीन युक्त सिरप को अवैध तरीके से सिर्फ नशे के लिए बेचा जा रहा था. एफआईआर दर्ज होने के बाद अब इसकी सप्लाई चेन और खरीदारों की तह तक भी पहुंचने की कोशिश में विभाग लगा हुआ है.














