कोयला घोटाले से लेकर हवाला नेटवर्क तक... बंगाल में चुनाव से पहले ED के रडार पर कई बड़े नाम

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले जांच एजेंसी ED की रडार पर कई बड़े नाम हैं. ये नाम कोयला घोटाला, स्कूल फंड घोटाला, भर्ती घोटाला और हलाला नेटवर्क तक से जुड़े हुए हैं.

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  • बंगाल चुनाव से पहले ED ने भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और भर्ती घोटालों में कई बड़े मामलों में कार्रवाई की है
  • ED ने देश के कई शहरों में छापेमारी कर अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क और अवैध फंडिंग के सबूत जुटाए हैं
  • पार्थ चटर्जी और सोना पप्पू समेत कई राजनेताओं और अपराधी सिंडिकेट से जुड़े लोगों के खिलाफ ED जांच कर रही है
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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक के बाद एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वसूली, जमीन कब्जा, भर्ती घोटाले और अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है. बीते कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग मामलों में छापेमारी, संपत्ति अटैचमेंट, समन जारी करने और चार्जशीट दाखिल करने जैसी कई बड़ी कार्रवाई सामने आई हैं. इन कार्रवाइयों में राजनेताओं, अधिकारियों, कारोबारियों और कथित अपराध सिंडिकेट से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं.

IPAC केस: कई शहरों में छापेमारी, हवाला नेटवर्क के संकेत

सबसे पहले बात करते हैं IPAC केस की. साल की शुरुआत को ED ने देश के कई शहरों हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, विजयवाड़ा और रांची में एक साथ 11 ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापे IPAC के दफ्तरों, उसके डायरेक्टर्स के घरों और उससे जुड़ी कंपनियों के ऑफिस पर मारे गए. जांच के दौरान ED को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग और घरेलू ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि चुनावी गतिविधियों के नाम पर कहीं अवैध फंडिंग तो नहीं हो रही थी? इस केस में छापेमारी के दौरान खुद राज्य की सीएम ममता बनर्जी जबरन दस्तावेज लेकर चली गई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर उन्हें फटकार लगाई थी,

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पार्थ चटर्जी केस: ED की दबिश तेज, समन की अवहेलना पर सख्ती

पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी एक बार फिर ED के निशाने पर हैं. 11 अप्रैल 2026 को कोलकाता में उनके आवास और सहयोगी प्रसन्न कुमार रॉय के दफ्तर पर छापेमारी की गई. ED के मुताबिक, SSC भर्ती घोटाले में उन्हें तीन बार समन भेजा गया लेकिन वे एक बार भी पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए. 2022 में प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था और 2025 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिली थी. अब ED उनके खिलाफ प्राथमिक शिक्षक, SSC असिस्टेंट टीचर और ग्रुप C-D भर्ती से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है.

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सोना पप्पू' केस: कैश, सोना और हथियार बरामद, आरोपी फरार

कोलकाता में कुख्यात सिंडिकेट से जुड़े बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू के खिलाफ ED ने 1 अप्रैल को 8 जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान करीब 1.47 करोड़ रुपये नकद, 67 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, एक फॉर्च्यूनर गाड़ी और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके घर से मेड इन यूएसए लिखी हुई एक रिवॉल्वर भी मिली, जिसे बाद में पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया गया. जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क उगाही, जमीन कब्जा और अवैध निर्माण के जरिए भारी मात्रा में काला पैसा बना रहा था.

फिलहाल सोना पप्पू फरार है और ED के समन के बावजूद जांच में शामिल नहीं हो रहा है. इस मामले में कारोबारी जय कमदार को भी समन जारी किया गया है, जिनके तार पुलिस अधिकारी संतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े बताए जा रहे हैं. ईडी के मुताबिक इस मामले में टीएमसी के बड़े नेताओं से भी पूछताछ होगी.

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अमित गांगुली केस: फर्जी कागजों से जमीन हड़पने का बड़ा रैकेट

28 मार्च 2026 को ED ने कोलकाता में 7 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें जमीन कब्जा और फर्जीवाड़े के आरोपी अमित गांगुली और उसके सहयोगियों के ठिकाने शामिल थे. जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और नकली दस्तावेज बनाकर महंगी जमीनों पर कब्जा करते थे. इसके बाद उन्हीं जमीनों पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट बनाकर आम लोगों को बेच दिया जाता था. इस पूरे खेल में बैंक खातों का इस्तेमाल कर मनी लॉन्ड्रिंग भी की गई. ED ने कई बैंक अकाउंट फ्रीज किए हैं और 20 से ज्यादा FIR पहले से दर्ज हैं.

PDS राशन घोटाला: गरीबों का अनाज बाजार में बेचा गया

10 अप्रैल 2026 को ED ने 17 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें निरंजन चंद्र साहा और उसके नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल हैं. आरोप है कि सरकारी राशन यानी PDS का गेहूं गरीबों तक पहुंचने के बजाय अवैध तरीके से बाजार और एक्सपोर्ट में बेचा जा रहा था. जांच में सामने आया कि आरोपी FCI के बोरे बदलकर गेहूं की पहचान मिटा देते थे और उसे निजी माल की तरह बेच देते थे. इस दौरान करीब 31.9 लाख रुपये नकद और कई डिजिटल सबूत जब्त किए गए.

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मर्लिन ग्रुप केस: रियल एस्टेट में बड़ा घोटाला, राजनीतिक कनेक्शन की जांच

8 अप्रैल 2026 को ED ने मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी की. कंपनी के प्रमोटर सुशील मोहता और साकेत मोहता पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पकर बड़े प्रोजेक्ट खड़े किए. ED को जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस ग्रुप के राज्य के बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों से संबंध हो सकते हैं. फिलहाल इन वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है.

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NRI कोटा मेडिकल एडमिशन घोटाला: पुलिस अफसर पर ED का शिकंजा

कोलकाता पुलिस के अधिकारी संतनु सिन्हा बिस्वास को ED ने समन जारी किया है. मामला मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे के तहत फर्जी दाखिले से जुड़ा है. ED के मुताबिक, करीब 85 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं. जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए छात्रों को NRI कोटे में दाखिला दिलाया गया. संतनु सिन्हा बिस्वास ने ED के समन को कोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अभी तक ED की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगी है.

कोयला घोटाला: 650 करोड़ की उगाही, ED ने दाखिल की चार्जशीट

9 अप्रैल 2026 को ED ने अवैध कोयला खनन और वसूली के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की. इस केस में चिन्मय मंडल और किरन खान समेत कई आरोपी शामिल हैं. जांच में खुलासा हुआ कि कोयला माफिया ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से गुंडा टैक्स वसूलते थे, जो कोयले की कीमत का 20-25% तक होता था. पिछले पांच साल में सिर्फ उगाही से ही 650 करोड़ रुपये का काला धन इकट्ठा किया गया.

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स्कूल फंड घोटाला: 18.5 करोड़ की संपत्ति अटैच

ED ने कृष्णा दमानी और उनके परिवार से जुड़ी 18.5 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है. आरोप है कि साउथ पॉइंट एजुकेशन सोसायटी के फंड को फर्जी बिल, नकली कर्मचारियों और गलत भुगतान के जरिए ट्रांसफर किया गया. इस पैसे को बाद में म्यूचुअल फंड, शेयर और कंपनियों में निवेश कर सफेद किया गया.

कस्टम अधिकारी घोटाला: 194 करोड़ की स्मगलिंग का खुलासा

ED ने सस्पेंडेड कस्टम अधिकारी नवनीत कुमार की 48 लाख रुपये की संपत्ति अटैच की है. जांच में सामने आया कि 2017 में 194 करोड़ रुपये के माल को गलत तरीके से क्लियर किया गया था. आरोप है कि आरोपी ने जानबूझकर जांच से बचाने के लिए सीमित जांच के आदेश दिए और मैन्युअल क्लियरेंस का गलत इस्तेमाल किया.

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